Wednesday, May 27, 2020
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‘नवरेह’ बनाम ‘नौरोज़’ में उलझ कर रह गई प्रियंका, सोशल मीडिया पर हुई ट्रोल

ट्विटर पर एक यूजर ने प्रियंका के इस ट्वीट का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मालकिन ने बोल दिया तो नौरोज़ ही माना जाएगा। इस शख्स ने प्रियंका के समर्थकों पर तंज कसते हुए कहा कि ये कोई भक्त नहीं हैं जो शिकायत करें या रूठ जाएँ, ये गुलाम हैं, गुलामी में बस इतनी ही छूट है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

चुनावों के मद्देनज़र कॉन्ग्रेस पार्टी में यूँ तो लगभग हर नेता अपने बयानों के कारण सक्रिय नज़र आ रहा है, लेकिन वास्तविक ‘मेहनत’ प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी द्वारा ही की जा रही है। एक तरफ़ जहाँ राहुल गाँधी बिना जीडीपी और बजट की समझ रखे सत्ता में आने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पर बजट का 70% हिस्सा खर्च करने को तैयार हैं वहीं प्रियंका गाँधी भी ‘नवरेह’ के मौके पर कश्मीरियों को ‘नौरोज़’ की बधाइयाँ देने पर तुली हुईं हैं।

जी हाँ, ट्वीटर पर चुनावों के लिहाज़ से सक्रिय होने वाली कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने आज कश्मीरी पंडितों को उनके नए साल ‘नवरेह’ की शुरुआत पर ‘नौरोज़’ की बधाइयाँ दी हैं।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि मेरे सभी कश्मीरी बहनों और भाइयों को नौरोज़ मुबारक!! इसके अलावा अपने ट्वीट में प्रियंका ने अपनी माँ के संदेश का भी ज़िक्र किया जिसमें कहा गया था कि थाली तैयार करना मत भूलना, लेकिन उनके पास थाली तैयार करने के लिए समय नहीं था और रोड शो के बाद जब वो घर पहुँची तो टेबल पर थाली देखी, जिसे शायद उनकी माँ ने तैयार किया था और इस पर प्रियंका ने लिखा कि मम्मी कितनी प्यारी होती हैं।

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पोस्ट को देखते हुए उनके समर्थक उन्हें नौरोज़ की बधाइयाँ देने लगे। वहीं जाने-माने स्तंभकार और लेखक तारेक फतेह जैसे लोगों ने उनके इस ट्वीट पर जवाब देते हुए बताया, ‘प्रिय प्रियंका गांधी, नौरोज़ पिछले महीने मनाया जा चुका है। कश्मीर में नए साल के त्योहार को नवरेह के नाम से जाना जाता है।’

इसे अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता कहिए या फिर बड़ी गलती, लेकिन प्रियंका के इस पोस्ट ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करवा दिया है। कई लोगों ने उन्हें इन दोनों त्यौहारों को लेकर कंफ्यूज़ बताया। क्योंकि नवरोज़ पारसियों का त्यौहार (नया साल) होता है। जबकि नवरेह कश्मीरी पंडितों का नया साल होता है।

बता दें कि कश्मीर से प्रियंका के परिवार का पुराना रिश्ता रहा है। शायद इसी कारण से उनकी माँ सोनिया गाँधी ने नवरेह पर सजाई जाने वाली थाली को उनके लिए तैयार रखा। लेकिन रोड शो और बड़ी-बड़ी रैलियों में व्यस्त प्रिंयका ने इसे सोशल मीडिया पर ‘माँ का प्यार’ दिखाने का प्रयास किया। जिसके कारण सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हे यहाँ तक बोल डाला कि एक असली कश्मीरी पंडित को इसका फर्क पता होता है। लेकिन आपकी माँ को ‘नवरेह’ और ‘नौरोज़’ के बीच कन्फ्यूज़ लगती हैं। नौरोज़ पारसियों का नया साल है।

इस पोस्ट पर एक शख्स ने तो प्रियंका को पूरे भारत का मानचित्र ही प्रियंका को दे दिया। क्योंकि शायद उन्हें इसकी जरूरत भी थी। साथ ही यहाँ लोगों ने उन्हें झूठा हिन्दू तक कह दिया।

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वहीं इब्न सिना ने प्रियंका को यहाँ तक कहा कि उन्हें उस शख्स को बदलने की जरूरत है जो उनका ट्वीटर हैंडल संभालता है।

बता दें कि नवरेह की पूर्व संध्या पर, चावल, दही, ब्रेड, अखरोट, इंकपॉट, कागज, कलम, दर्पण, फूल, चांदी का सिक्का और अगले वर्ष के पंचांग से भरी थैली को सुबह सबसे पहले देखने के लिए तैयार रखा जाता है। नवरोज़ पारसियों का नया साल है जो इस साल 21 मार्च को मनाया गया था। ऐसे में प्रियंका के इस पोस्ट ने उनकी माताजी की संस्कृति संबंधित समझ और प्रियंका के सामान्य ज्ञान पर सवाल खड़े कर दिए।

यहाँ ट्विटर पर चौकीदार सीए वी पी सिंह ने प्रियंका के इस ट्वीट का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि वो मालकिन ने बोल दिया तो नौरोज़ ही माना जाएगा। इस शख्स ने प्रियंका के समर्थकों पर तंज कसते हुए कहा कि ये कोई भक्त नहीं हैं जो शिकायत करें या रूठ जाएँ, ये गुलाम हैं, गुलामी में बस इतनी ही छूट है।

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