Monday, June 24, 2024
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मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को दी BSP की जिम्मेदारी, 15 साल पहले कहती थीं परिवार से नहीं होगा उत्तराधिकारी

बहुजन समाज पार्टी भी परिवारवाद की राह पर आगे बढ़ गई है। मायावती ने अपने भाई के बेटे यानी भतीजे को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। मायावती के न रहने पर वही पार्टी की कमान संभालेंगे। अभी उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर देश के दूसरे राज्यों पर फोकस करने को कहा गया है।

बहुजन समाज पार्टी में मायावती के बाद अब पार्टी का कामकाज आकाश आनंद संभालेंगे, जो मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे और मायावती के भतीजे हैं। लखनऊ में बीएसपी की बैठक में इस बात का आधिकारिक ऐलान कर दिया गया है। हालाँकि मायावती ने अब से 15 साल पहले प्रकाशित हुई अपनी आत्मकथा में कहा था कि उनके बाद बीएसपी का नेतृत्व कोई दलित करेगा, जो उनके परिवार से नहीं होगा। ये अलग बात है कि आकाश आनंद उनके ही परिवार के हैं।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया है। यह घोषणा 10 दिसंबर 2023 को पार्टी की एक बैठक में की गई थी। मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है। यह पद पार्टी का सर्वोच्च कार्यकारी पद है। आकाश आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। वह पिछले कई वर्षों से BSP में सक्रिय हैं और पार्टी के युवा नेताओं में से एक हैं।

हाल ही में संपन्न हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी का नेतृत्व करने का जिम्मा दिया था। उसी समय लगभग ये तय हो गया था कि उनके नाम की आधिकारिक घोषणा जल्द की जा सकती है। अब बीएसपी में लंबे समय से नंबर 2 पर रहे सतीष चंद्र मिश्रा के पायदान पर आकाश आनंद को लाया गया है। सतीष चंद्र मिश्रा पहले की तरह पार्टी का कामकाज देख रहे थे, लेकिन अब वह पार्टी में नंबर 2 पर नहीं हैं।

अपने ही वादे से मुकर गईं मायावती

मायावती का जन्म गौतमबुद्ध नगर के बादलपुर गाँव में हुआ था। उनका जीवन काफी संघर्षमय रहा। उन्होंने पढ़ाई करके शिक्षक की नौकरी पार्टी की, लेकिन काँशी राम के प्रभाव से बीएसपी में शामिल हो गईं और 4 बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही। उन्होंने 15 साल पहले प्रकाशित अपनी आत्मकथा ‘मेरे संघर्षमय जीवन का सफरनामा‘ में लिखा था कि बीएसपी का अगला नेतृत्वकर्ता उन्हीं की तरह दलित और वंचित समाज से होगा। जो उनसे 30-35 साल छोटा होगा। ऐसे में वो पार्टी का लंबे समय तक नेतृत्व कर सकेगा। उन्होंने कहा था कि बीएसपी का अगला नेता उनके परिवार से नहीं होगा।

ये अलग बात है कि 15 जनवरी 2008 को प्रकाशित हुई उनकी आत्मकथा के 15 साल बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई दलित नेता ऐसा नहीं मिला, जो बीएसपी का नेतृत्व कर सके। उन्होंने अपने से 39 साल छोटे भतीजे आकाश आनंद को अपनी और अपनी पार्टी बीएसपी का उत्तराधिकारी चुन लिया है। आकाश आनंद ने 2017 में बीएसपी को ज्वॉइन किया था और अब मायावती के बाद पार्टी की जिम्मेदारी वही संभालेंगे।

अभी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड को छोड़ पूरे देश का जिम्मा संभालेंगे आकाश

बीएसपी नेता उदयवीर सिंह ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, “बहनजी ने कहा कि मेरे न रहने पर आकाश आनंद पार्टी के उत्तराधिकारी होंगे। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड को छोड़ कर पार्टी की निगाह में कमजोर राज्यों में आकाश आनंद काम करेंगे। मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं से लोकसभा चुनाव की तैयारी में लग जाने को कहा।” आकाश आनंद पिछले कुछ सालों से बीएसपी का कामकाज देख ही रहे थे। वो पार्टी की सोशल मीडिया की टीम का भी नेतृत्व कर रहे थे।

बहुजन समाज पार्टी की विशेष राष्ट्रीय बैठक में मायावती ने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियाँ गरीबों से झूठे वादे करती हैं, और उन्हें पूरे नहीं करती। एक अकेली बहुजन समाज पार्टी है, जो समाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखती है और सर्वजन सुखाय की कामना करती है। उन्होंने कहा कि ‘वोट हमारा, राज तुम्हारा’ वाली कार्यशैली को खत्म करने का समय आ चुका है।

बता दें कि आकाश आनंद ने विदेश से एमबीए की पढ़ाई की है। वो लोकसभा चुनाव 2019 से ही लगातार पार्टी में सक्रिय हैं। उन्हें कई महत्वपूर्ण अभियानों की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। आकाश आनंद ने राजस्थान विधानसभा चुनाव के मद्देनजर साढ़े तीन हजार किलोमीटर की ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय संकल्प यात्रा’ शुरू थी। इस यात्रा को ‘बहुजन अधिकार यात्रा’ भी नाम दिया गया था।

आकाश आनंद को 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान राजस्थान में बीएसपी ने अपना स्टार प्रचारक भी बनाया था। इसके बाद से वो लगातार सभी चुनावों में पार्टी का नेतृत्व करते दिखते हैं। आकाश आनंद ने हाल ही में हुए चार चुनावों, खासकर मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रमुख जिम्मेदारियां निभाईं। हाल के विधानसभा चुनावों में बसपा ने राजस्थान में दो सीटें जीतीं लेकिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में उसे कोई सीट नहीं मिली।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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