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अचानक राज्यपाल से मिलने राजभवन पहुँचे CM नीतीश कुमार, माँझी ने ‘खेला होई’ कह कर बढ़ाया बिहार का राजनीतिक पारा: न्याय यात्रा पर कॉन्ग्रेस को जदयू का झटका

विपक्ष के I.N.D.I. गठबंधन में संयोजक न बनाए जाने से नाराज़ नीतीश ने दबाव बनाने के लिए ललन सिंह को हटा कर खुद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सँभाल ली थी।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार (23 जनवरी, 2024) को अचानक से राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मिलने के लिए राजभवन पहुँच गए। इससे बिहार में सियासी हलचल तेज़ हो गई है। वहीं पूर्व सीएम और HAM पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम माँझी के ट्वीट ने राजनीतिक पारा और बढ़ा दिया। माँझी ने लिखा, “बंगला में कहते हैं – ‘खेला होबे’, मगही में कहते हैं – ‘खेला होकतो’, भोजपुरी में कहते हैं – ‘खेला होखी’। बाकी तो आप खुद ही समझदार हैं।”

बता दें कि बिहार की राजनीति में विरोधियों द्वारा नीतीश कुमार को अक्सर ‘पलटूरम’ कह कर चिढ़ाया जाता है, क्योंकि वो कभी राजद तो कभी भाजपा के साथ जाते रहे हैं। राजभवन पहुँचे मुख्यमंत्री के साथ बिहार के वित्त, वाणिज्य कर एवं संसदीय मामलों के मंत्री विजय कुमार चौधरी भी साथ में थे। विजय चौधरी बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे हैं। बताया जा रहा है कि सीएम नीतीश कुमार का राजभवन जाने की पहले से कोई योजना नहीं थी, अचानक ये प्लान बना।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के बीच इस दौरान लगभग 40 मिनट तक बैठक हुई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के संबंध में दोनों की मुलाकात हुई है। बता दें कि राज्यपाल सरकारी यूनिवर्सिटीज के कुलाधिपति होते हैं। वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि बजट सत्र के संबंध में ये चर्चा हुई है। वहीं गठबंधन साथी राजद ने इसे सामान्य मुलाकात बताते हुए गठबंधन को मजबूत करार दिया। पार्टी ने कहा कि विपक्ष एक साजिश के तहत इसे दूसरा मोड़ दे रहा है, लेकिन उसकी मंशा पूरी नहीं होगी।

विपक्ष के I.N.D.I. गठबंधन में संयोजक न बनाए जाने से नाराज़ नीतीश ने दबाव बनाने के लिए ललन सिंह को हटा कर खुद जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सँभाल ली थी। उधर जदयू नेता खालिद अनवर ने कहा है कि राहुल गाँधी की न्याय यात्रा में शामिल होने के लिए नीतीश कुमार को कोई आधिकारिक न्योता नहीं मिला है। कॉन्ग्रेस इससे पहले कह रही थी कि नीतीश यात्रा का स्वागत करेंगे। कई राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि महागठबंधन के स्थानीय नेता राजद-जदयू मेल से खुश नहीं हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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