Sunday, April 21, 2024
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‘अच्छे दिन’ के इंतजार में सिद्धू: कॉन्ग्रेस नेता भी जोड़ रहे प्रचार कराने से हाथ

हरियाणा कॉन्ग्रेस के नेताओं को डर है कि सिद्धू के आते ही भाजपा राष्ट्रवाद को सबसे बड़ा मुद्दा बना देगी और वे स्थानीय मुद्दे जिन पर कॉन्ग्रेस नेता खट्टर सरकार को घेरना चाहते हैं, गौण हो जाएँगे। हरियाणा में 21 अक्टूबर को चुनाव होने हैं।

क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू कभी भाजपा के स्टार प्रचारक हुआ करते थे। हाल तक कॉन्ग्रेस में भी सितारे बुलंद थे। लेकिन, आम चुनावों के बाद किस्मत ने ऐसी पलटी खाई कि इस पूर्व सांसद और पंजाब के मौजूदा विधायक को उनकी पार्टी के नेता ही नहीं पूछ रहे।

कॉन्ग्रेस नेता आलाकमान से गुहार लगा रहे हैं कि उनके क्षेत्र में सिद्धू को प्रचार के लिए न भेजा जाए। पंजाब का पड़ोसी प्रदेश हरियाणा इसमें प्रमुख है, जहॉं इसी महीने विधानसभा के चुनाव होने हैं। हरियाणा में सिद्धू की एक जनसभा में न केवल उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई, बल्कि उन पर चप्पल फेंकने की भी कोशिश हुई। उल्लेखनीय है कि सिद्धू का नाम पार्टी के स्टार-प्रचारकों की सूची में है।

बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस नेताओं को डर है सिद्धू के आने से भाजपा को बैठे-बिठाए राष्ट्रवाद का मुद्दा मिल जाएगा, क्योंकि इस ‘पिच’ पर सिद्धू का ‘फॉर्म’ हालिया समय में कतई अच्छा नहीं रहा है। वे न केवल तालिबान-समर्थक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ अपनी क्रिकेट के दिनों की दोस्ती को खुल कर ‘फ्रंट-फुट’ पर खेलते हैं, बल्कि वे पाकिस्तानी आर्मी के प्रमुख जनरल बाजवा से गले भी मिल आए थे। पुलवामा हमले पर उनका बयान इतना आपत्तिजनक था कि उनके ‘बॉस’, पंजाब के मुख्यमंत्री और पूर्व सैनिक कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सार्वजनिक रूप से उनकी निंदा की थी। लोक सभा चुनाव के नतीजे आने के बाद उनसे ‘मलाईदार’ मंत्रालय छीन कर हाशिए वाले मंत्रालय थमा दिए गए तो उन्होंने प्रभार ही ग्रहण नहीं किया और मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया।

ऐसे में हरियाणा कॉन्ग्रेस के नेताओं को डर है कि सिद्धू के आते ही भाजपा राष्ट्रवाद को सबसे बड़ा मुद्दा बना देगी और वे स्थानीय मुद्दे जिन पर कॉन्ग्रेस नेता खट्टर सरकार को घेरना चाहते हैं, गौण हो जाएँगे। हरियाणा के लोक सभा चुनाव में भी सिद्धू आए थे और नतीजा यह हुआ कि 2014 की मोदी लहर में 7 सीटें जीतने वाली भाजपा ने इस बार पूरी 10 सीटें निकाल ली। हरियाणा के बड़े नेताओं की मानें तो सिद्धू जहाँ-जहाँ गए, पार्टी को वहाँ-वहाँ हार का सामना करना पड़ा था। पंजाब में भी लोक सभा हार का ठीकरा कई नेताओं ने सिद्धू के ही सर फोड़ा था। हरियाणा में 21 अक्टूबर को चुनाव होने हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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