Homeराजनीति23 पाकिस्तानी शरणार्थियों को महाराष्ट्र सरकार ने दी भारत की नागरिकता

23 पाकिस्तानी शरणार्थियों को महाराष्ट्र सरकार ने दी भारत की नागरिकता

जिन लोगों को नागरिकता के प्रमाण पत्र मुहैया करवाए गए हैं वे सभी पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत में पैदा हुए लोग थे और बँटवारा होने के बाद भारत आ गए थे। ये लोग लंबी अवधि के वीजा पर जलगाँव में ही रह रहे थे।

महाराष्ट्र सरकार ने कल यानी मंगलवार (सितंबर 10, 2019) को पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए 23 प्रवासियों को प्रमाण पत्र के साथ देश की नागरिकता दी। जानकारी के मुताबिक ये लोग कई साल पहले लंबी अवधि के वीजा पर भारत आए थे।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री दीपक केसारकर ने बताया कि जिन लोगों को नागरिकता के प्रमाण पत्र मुहैया करवाए गए हैं वे सभी पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत में पैदा हुए लोग थे और बँटवारा होने के बाद भारत आ गए थे। ये लोग लंबी अवधि के वीजा पर जलगाँव में ही रह रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो जिन लोगों को नागरिकता प्रदान की गई है। उनमें से अधिकतर सिंधी और पंजाबी समुदाय से संबंध रखते हैं। इन्हें केंद्र सरकार द्वारा हरी झंडी दिखाने के बाद ही नागरिकता के प्रमाण पत्र दिए गए हैं।

जानकारी के लिए बता दें कि इस फैसले से जलगाँव, औरंगाबाद, अमरावती व कोल्हापुर जिले में रहने वाले कई लोगों को लाभ मिला है। कई वर्षों से भारत में रह रहे इन लोगों ने भारतीय नागरिकता देने की माँग की थी। जिसे नागरिकता देने के चौथे चरण में पूरा कर दिया गया।

गृह राज्यमंत्री (शहर) डॉ रणजीत पाटील ने कहा कि पिछले कई साल पहले पाकिस्तान से भारत आए और अब यहीं रहने वाले नागरिकों (प्रवासी) द्वारा भारतीय नागरिकता की माँग की जा रही थी। जिसे पूरा करना उनके लिए खुशी की बात है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -