जन्मदिन पर माँ नर्मदा की महाआरती और दत्तात्रेय की पूजा करेंगे PM मोदी, लिया कई प्रोजेक्ट्स का जायजा

पीएम ने 'स्टेचू ऑफ यूनिटी' के आसपास चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। सरदार सरोवर बाँध अपनी पूरी क्षमता तक भर गई और पीएम इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनेंगे।

आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 69वाँ जन्मदिन है और इस अवसर पर वह नर्मदा के केवडिया शहर में पहुँचे। प्रधानमंत्री अपना जन्मदिन सरदार सर्वोवर बाँध से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करते हुए बिताएँगे और इस अवसर पर वह एक समारोह में भी शामिल होंगे। पीएम मोदी ने सबसे पहले केवडिया में सरदार सरोवर बाँध जाकर जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने जंगल सफारी से जुड़ी चीजों को जाना और ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ का भी दौरा किया।

पीएम ने केवडिया के पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर का निरीक्षण किया। अहमदाबाद पहुँचने पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री विजय रुपाणी और उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने पीएम मोदी का स्वागत किया। देखिए पीएम मोदी के गुजरात दौरे की तस्वीरें:

अहमदाबाद पहुँचने पर पीएम का स्वागत करते राज्यपाल, सीएम और डिप्टी सीएम
जंगल सफारी का निरीक्षण करते पीएम मोदी
केवडिया में कैक्टस गार्डन का जायजा लेते प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘नमामि देवी नर्मदे महोत्सव’ में भाग लेते हुए माँ नर्मदा की महाआरती का हिस्सा बनेंगे। इसके बाद वह गरुड़ेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। तत्पश्चात प्रधानमंत्री रायसेन गाँव में अपनी माँ हीराबेन से आशीर्वाद लेने जाएँगे। आज मंगलवार (सितम्बर 17, 2019) को पीएम ने ‘स्टेचू ऑफ यूनिटी’ के आसपास चल रहे विकास कार्यों का जायजा लिया। सरदार सरोवर बाँध अपनी पूरी क्षमता तक भर गई और पीएम इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनेंगे।

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केवडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक जनसभा भी प्रस्तावित है, जिसमें 3 जिलों से हज़ारों लोगों के आने की संभावना है। जनसभा के लिए गुम्बद की आकार का बड़ा पंडाल भी बनाया गया है। बता दें कि पीएम मोदी जिस गरुड़ेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे, वहाँ भगवान दत्तात्रेय विराजमान हैं। कई प्रमुख नेताओं ने पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी। भाजपा इसे ‘सेवा सप्ताह’ के रूप में मना रही है और स्वच्छता को थीम रख कर पार्टी की विभिन्न इकाइयाँ समारोह आयोजित कर रही हैं।

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शरजील इमाम
“अब वक्त आ गया है कि हम गैर मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे।"

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