Friday, October 22, 2021
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उत्तराखंड को 6 बड़ी योजनाओं की सौगात, PM मोदी ने कहा – ‘अब पैसा न पानी की तरह बहता है, न पानी में बहता है’

"नमामि गंगे मिशन को सिर्फ गंगा की साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देश का सबसे बड़ा और विस्तृत नदी संरक्षण कार्यक्रम बनाया। अब उत्तराखंड में 1 रुपए में पानी का कनेक्शन मिल रहा है।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘नमामि गंगे मिशन’ के तहत उत्तराखंड में 6 मेगा परियोजनाओं का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उद्घाटन किया। परियोजनाओं में 68 एमएलडी एसटीपी का निर्माण, हरिद्वार में जगजीतपुर में मौजूदा 27 एमएलडी का उन्नयन, हरिद्वार में सराय में 18 एमएलडी एसटीपी का निर्माण, ऋषिकेश में लक्कड़घाट पर 26 एमएलडी एसटीपी का उद्घाटन शामिल है।

इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि जल जीवन मिशन से हर घर तक शुद्ध जल पहुँचाया जाएगा। उन्होंने बताया कि गंगा हमारी सांस्कृतिक वैभव, आस्था और विरासत का प्रतीक है। गंगा देश की आधी आबादी को समृद्ध करती है। पहले भी गंगा की सफाई को लेकर बड़े अभियान चलाए, लेकिन उनमें जनभागीदारी नहीं थी। अगर वही तरीके अपनाते तो गंगा साफ ना होती और उसकी हालत आज भी उतनी ही बुरी होती।

पीएम मोदी ने बताया कि उनकी सरकार ने नमामि गंगे मिशन को सिर्फ गंगा की साफ-सफाई तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देश का सबसे बड़ा और विस्तृत नदी संरक्षण कार्यक्रम बनाया। साफ पानी को लेकर पीएम ने कहा कि अब उत्तराखंड में 1 रुपए में पानी का कनेक्शन मिल रहा है। पीएम मोदी बोले कि पहले दिल्ली में फैसले होते थे, लेकिन जल जीवन मिशन से अब गाँव में ही फैसला हो रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि अब गंगा में गंदे पानी को गिरने से रोका जा रहा है। ये प्लांट भविष्य को देखते हुए बनाए गए, साथ ही गंगा के किनारे बसे 100 शहरों और 5000 गाँवों को खुले में शौच से मुक्त किया। गंगा के साथ सहायक नदियों को साफ किया जा रहा है। पीएम ने कहा कि नमामि गंगे के तहत 30 हजार करोड़ से अधिक योजनाओं का काम चल रहा है।

वह कहते हैं कि आज सरकार के इस चौतरफा काम का परिणाम हम सब देख रहे हैं। आज नमामि गंगे परियोजना के तहत 30 हजार करोड़ रुपए की परियोजनाओं पर काम चल रहा है या पूरा हो चुका है। उत्तराखंड में तो स्थिति ये थी कि गंगोत्री, बद्रीनाथ, केदारनाथ से हरिद्वार तक 130 से अधिक नाले गंगा में गिरते थे। आज इन नालों में से अधिकतर को रोक दिया गया है।

पीएम मोदी ने बताया कि अब उत्तराखंड में गंगा म्यूजियम के बनने से वहाँ का आकर्षण और अधिक बढ़ जाएगा। वो म्यूजियम हरिद्वार आने वाले पर्यटकों के लिए, गंगा से जुड़ी विरासत को समझने का एक माध्यम बनने वाला है।

उन्होंने ऋषिकेश से सटे मुनि की रेती का चंद्रेश्वर नगर नाला का जिक्र करते हुए कहा कि इसके कारण यहाँ गंगा के दर्शन के लिए आने वाले और राफ्टिंग करने वाले साथियों को बहुत परेशानी होती थी। लेकिन अब से यहाँ देश का पहला चार मंजिला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट शुरू हो चुका है। हरिद्वार में भी ऐसे 20 से अधिक नालों को बंद किया जा चुका है।

पीएम मोदी के मुताबिक नमामि गंगे अभियान को अब नए स्तर पर ले जाया जा रहा है। गंगा की स्वच्छता के अलावा अब गंगा से सटे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के विकास पर भी फोकस है। सरकार द्वारा उत्तराखंड के साथ ही सभी राज्य के लोगों को जैविक खेती से जोड़ने की योजना बनाई गई है।

प्रधानमंत्री कहते हैं, “आज पैसा न पानी की तरह बहता है, न पानी में बहता है। पैसे की पाई-पाई पानी पर लगाई जाती है। हमारे यहाँ तो हालत ये थी कि पानी जैसा महत्वपूर्ण विषय, अनेकों मंत्रालयों और विभागों में बँटा हुआ था। इन मंत्रालयों में, विभागों में न कोई तालमेल था और न ही समान लक्ष्य के लिए काम करने का कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश। नतीजा ये हुआ कि देश में सिंचाई हो या फिर पीने के पानी से जुड़ी समस्या, ये निरंतर विकराल होती गईं।”

प्रधानमंत्री ने सभी को संबोधित करते हुए देश में पानी से जुड़ी चुनौतियों के लिए बने जल शक्ति मंत्रालय का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पानी से जुड़ी चुनौतियों के साथ यह मंत्रालय आज हर घर पानी पहुँचाने के मिशन में लगा है। जलजीवन मिशन की ही देन है कि हर दिन करीब 1 लाख परिवारों को शुद्ध पेयजल की सुविधा से जोड़ा जा रहा है।

सिर्फ 1 साल में ही देश के 2 करोड़ परिवारों तक पीने का पानी पहुँचाया जा चुका है। इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने साल 2022 तक हर घर जल पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। कोरोना काल के बीच भी उत्तराखंड में बीते 4-5 महीने में करीब 50 हजार घरों में पानी के कनेक्शन भी दिए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के किसानों, श्रमिकों और देश के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे पर भी बात की। साथ ही उन लोगों पर भी निशाना साधा जो उनकी नीतियों का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने डिजिटल भारत अभियान का, जनधन बैंक खातों का जिक्र करते हुए बताया कि इससे देश के लोगों की बहुत मदद हुई। मगर, कुछ लोगों ने इसका भी हमेशा विरोध किया।

उन्होंने याद दिलाया कि देश के जांबांजों ने सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए आतंक के अड्डों को तबाह कर दिया था। लेकिन विरोध करने वाले लोग अपने जांबाजों से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत माँगने लगे। उन्होंने कहा सर्जिकल स्ट्राइक का भी विरोध करके, ये लोग देश के सामने अपनी मंशा साफ कर चुके हैं। इसलिए विरोध करने वाले न किसानों के साथ हैं और न वीर जवानों के साथ। सरकार सैनिकों को लाभ देने के लिए जब वन रैंक वन पेंशन का लाभ देने लगी थी, तब भी सवाल उठे थे।

उन्होंने विरोधियों की नीयत की ओर इशारा करते हुए कहा कि ऐसे लोग नहीं चाहते कि देश का किसान खुले बाजार में अपनी उपज बेच पाए। जिन उपकरणों की किसान पूजा करता है, उन्हें आग लगाकर ये लोग अब किसानों को अपमानित कर रहे हैं।

पीएम मोदी वायुसेना को सशक्त करने वाले राफेल का उदहारण दिया। साथ ही राम मंदिर भूमि पूजन से पहले सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई में विरोधियों का पक्ष लोगों को याद दिलवाया और कहा बदलती हुई तारीख के साथ विरोध के लिए विरोध करने वाले ये लोग अप्रासंगिक होते जा रहे हैं।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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