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मैंने ईश्वर को नहीं देखा, लेकिन आपको देखा है: लकवाग्रस्त महिला की बातें सुन भावुक हुए PM मोदी

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि जन औषधि केंद्रों के साथ-साथ डिस्ट्रिब्यूशन, क्वालिटी टेस्टिंग लैब जैसे अनेक दूसरे साधनों का भी विस्तार हो रहा है। उन्होंने बताया कि इससे हज़ारों युवाओं को रोज़गार मिल रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘जन औषधि दिवस’ पर इसके कई लाभार्थियों के साथ चर्चा की। पीएम मोदी ने इस दौरान कई महिलाओं से उनकी बातें सुनीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौके का इस्तेमाल कोरोना वायरस को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए भी किया और लोगों को एक-दूसरे से हाथ मिलाने की जगह ‘नमस्ते’ कह के अभिवादन करने की सलाह दी। उन्होंने जनता को अफवाहों से बचने की सलाह दी। पीएम ने जन औषधि केंद्रों की उपयोगिता की चर्चा की और उसकी अब तक की उपलब्धियों के बारे में बताया।

इस चर्चा के दौरान एक ऐसा पल भी आया जब प्रधानमंत्री भावुक हो गए। दीपा शाह नामक महिला ने कुछ ऐसा कहा, जिससे पीएम इमोशनल हो उठे। महिला ने बताया कि वह लकवा की मरीज हैं। दीपा ने कहा कि उन्होंने भगवान को तो नहीं देखा है, लेकिन नरेंद्र मोदी को देखा है। उक्त महिला ने बताया कि पहले जब वो दवाएँ खरीदती थीं तो 5000 रुपए से भी अधिक ख़र्च होते थे, जबकि अब मात्र 1500 रुपए प्रतिमाह में उनकी दवाओं का ख़र्च निकल आता है।

महिला ने बताया कि दवाओं से रुपए बचते हैं तो वो घर के ख़र्च में इस्तेमाल किए जाते हैं। उससे वह फल वगैरह भी खरीद लेती हैं। महिला ने रोते हुए अपना दर्द बयाँ दिया और ये भी बताया कि कैसे ‘जन औषधि केंद्र’ से उसे फायदा पहुँचा है।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि जन औषधि केंद्रों के साथ-साथ डिस्ट्रिब्यूशन, क्वालिटी टेस्टिंग लैब जैसे अनेक दूसरे साधनों का भी विस्तार हो रहा है। उन्होंने बताया कि इससे हज़ारों युवाओं को रोज़गार मिल रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि एक हजार से अधिक जरूरी दवाइयों की कीमत नियंत्रित होने से मरीजों के 12,500 करोड़ रुपए बचे हैं। स्टेंट्स और नी-इम्प्लांट्स की कीमत कम होने से लाखों मरीजों को नया जीवन मिला है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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