कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका चतुर्वेदी का पार्टी से इस्तीफ़ा, उपेक्षित और दुखी महसूस कर रही थीं

कल ही वो ट्विटर पर पार्टी द्वारा मेहनती लोगों की जगह गुंडों को तरजीह देने की बात कर रही थीं। ऐसा माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को इस्तीफ़ा सौंपने के बाद वो शिवसेना में शामिल हो सकती हैं।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ता और पार्टी का जाना-माना चेहरा रहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने, जो टीवी पर होने वाली डिबेट्स में कॉन्ग्रेस का पक्ष मज़बूती से रखा करती थीं, पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है। कल ही वो ट्विटर पर पार्टी द्वारा मेहनती लोगों की जगह गुंडों को तरजीह देने की बात कर रही थीं। ऐसा माना जा रहा है कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को इस्तीफ़ा सौंपने के बाद वो शिवसेना में शामिल हो सकती हैं।

प्रियंका चतुर्वेदी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी को सौंपा इस्तीफ़ा
पार्टी कार्यकर्ताओं के दुर्व्यवहार से थीं आहत

चतुर्वेदी से दुर्व्यवहार पर बच निकले पार्टी सदस्य, सिंधिया की सिफारिश  

इससे पहले, राजनीति कवर करने वालीं पत्रकार विजय लक्ष्मी शर्मा ने परसों रात (अप्रैल 17, 2019) कॉन्ग्रेस के आन्तरिक संवाद के एक पत्र को ट्वीट किया। उस पत्र में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के सदस्य श्री फजले मसूद पार्टी के कुछ सदस्यों को यह सूचित करते हैं कि श्रीमती चतुर्वेदी से दुर्व्यवहार समेत अनुशासन के उल्लंघन के मामले में उनपर की गई कार्रवाई को निरस्त किया जा रहा है।

मामला राफेल विवाद को लेकर मथुरा में कॉन्ग्रेस की पत्रकार वार्ता के दौरान का है।

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कार्रवाई की संस्तुति और मामले की शिकायत प्रियंका चतुर्वदी ने की थी, और कार्रवाई निरस्त कॉन्ग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश के पार्टी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की सिफारिश पर की गई थी। आरोपियों में अधिकतर मथुरा के स्थानीय कॉन्ग्रेस नेता थे, पर दो बड़े नाम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के सदस्य श्री अब्दुल जब्बार और महासचिव श्री उमेश पंडित के थे।

पत्र के ‘प्रतिलिपि’ खण्ड में देखा जा सकता है कि उक्त पत्र को कॉन्ग्रेस के उच्च स्तरीय सदस्यों ज्योतिरादित्य सिंधिया और एके एंटनी (कॉन्ग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष) को भी प्रेषित किया गया था- यानि माफ़ी के इस निर्णय में केवल सिंधिया ही नहीं, कॉन्ग्रेस के पूरे ढाँचे की सहमति मानी जा सकती है।

चतुर्वेदी का क्षोभ

विजय लक्ष्मी शर्मा के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा कि उनकी पार्टी मेहनती कार्यकर्ताओं की बजाय गुंडों को तरजीह दिए जाने से वह दुखी हैं। उन्होंने पार्टी के लिए हर तरफ से गालियाँ झेलीं पर यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पार्टी के भीतर ही उन्हें धमकाने वाले मामूली कार्रवाई के भी बिना बच निकलते हैं।

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