Sidhu के क़रीबी DSP ने मंत्री को कहा- ‘Dirty Dog’, पंजाब सरकार ने किया सस्पेंड

सिद्धू को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए, सेखों ने दावा किया था कि उन्हें आशु और कॉन्ग्रेस नेता कमलजीत सिंह करवाल द्वारा ‘धमकी’ दी गई थी और उन्होंने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पास एक शिक़ायत सौंपी थी।

पंजाब सरकार ने शुक्रवार (6 दिसंबर) को लुधियाना के नगर निगम डीएसपी बलविंदर सिंह सेखों को निलंबित कर दिया। बताया जा रहा है कि डीएसपी ने पंजाब के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशु को अपमानजनक मैसेज भेजे थे और फेसबुक पेज पर उनके लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए भद्दी टिप्पणी की थी।

दरअसल, आशु उन तीन मंत्रियों में शामिल थे, जिन्होंने अपनी शिक़ायतों के संबंध में सरकार की सुनवाई नहीं होने की कैबिनेट की बैठक में शिक़ायत की थी। डीएसपी ने एक मैसेज में, आशु को एक “Dirty Dog” कहा और दूसरे में, उन्होंने मंत्री को स्पष्ट रूप से गाली दी। आशु ने पिछली बैठक में अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को वो मैसेज भी दिखाए। पंजाब के मंत्री आशु ने बुधवार (4 दिसंबर) को कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे को उठाया था।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद भी, सेखों ने अपने फेसबुक पेज पर कुछ भद्दी टिप्पणियाँ पोस्ट की थी। आशु का कहना है कि डीएसपी पिछले तीन महीने से उन्हें गालियाँ दे रहे हैं, वह इस इंतज़ार में थे कि डीएसपी उन्हें गालियाँ देना कब बंद करेंगे, उनका यह सिलसिला रुका ही नहीं।

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जानकारी के अनुसार, मंत्री ने इस बात का भी ख़ुलासा किया डीएसपी सेखों पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के क़रीबी थे। उन्होंने कहा, “सिद्धू ने उनसे मेरे ख़िलाफ़ जाँच कराने को कहा था। सरकार द्वारा सेखों के ख़िलाफ़ भी जाँच का आदेश दिया गया था। मुझे जानकारी नहीं है।”

नवजोत सिंह सिद्धू ने आशु पर आरोप लगाते हुए फरवरी में लुधियाना में कई करोड़ के ग्रैंड मैनर होम्स को भूमि उपयोग (CLU) में नियमों के उल्लंघन और अनुदान के मुद्दे की जाँच का आदेश दिया था।

सिद्धू को अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए, सेखों ने दावा किया था कि उन्हें आशु और कॉन्ग्रेस नेता कमलजीत सिंह करवाल द्वारा ‘धमकी’ दी गई थी और उन्होंने पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के पास एक शिक़ायत सौंपी थी।

वहीं, डीएसपी से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “अगर कोई ऐसे लोगों द्वारा परेशान किया जाता है, जो ख़ुद सत्ता में हों, तो उनके पास प्रतिक्रिया देने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचता।” उन्होंने कहा, मुझे तत्कालीन स्थानीय सरकार के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के निर्देश पर मामले की जाँच करने का भुक्तभोगी होना पड़ा है।

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