Sunday, April 2, 2023
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दिल्ली-महाराष्ट्र में लॉकडाउन: राहुल गाँधी ने एक बार फिर राज्यों की नाकामी के लिए मोदी सरकार को ठहराया जिम्मेदार

जहाँ एक ओर दिल्ली में केजरीवाल और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार ने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में आकर लॉकडाउन की घोषणा कर प्रवासी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं दूसरी ओर ठाकरे के सहयोगी और कॉन्ग्रेस सुप्रीमो राहुल गाँधी ने मोदी सरकार से प्रवासी मजदूरों के बैंक खातों में रुपए डालने को कहा है।

देश भर में कोविड-19 के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोनो वायरस प्रकोप की दूसरी लहर से सबसे अधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र और दिल्ली हैं। कोरोना की बेकाबू रफ्तार पर काबू पाने के लिए महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा की है।

यहाँ अचानक लॉकडाउन लगने से अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया है। इसकी वजह से प्रवासी मजदूर परेशान हो रहे हैं। उनकी भीड़ रेलवे और बस स्टैंड पर देखी जा सकती है। यही स्थिति पिछले साल भी देखने को मिली जब यहाँ एकाएक लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। उस दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों ने पलायन किया था, जिससे काफी लोग कोरोना संक्रमित हुए थे।

दिल्ली से प्रवासी मजदूरों का पलायन जारी है, इसके बावजूद केजरीवाल सरकार इस मुद्दे पर अडिग है। इसी तरह, महाराष्ट्र में महाविकास आघाडी सरकार ने इन प्रवासी मजदूरों को उनके हाल पर छोड़ दिया है।

जहाँ एक ओर दिल्ली में केजरीवाल और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार ने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में आकर लॉकडाउन की घोषणा कर प्रवासी मजदूरों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं दूसरी ओर ठाकरे के सहयोगी और कॉन्ग्रेस सुप्रीमो राहुल गाँधी ने मोदी सरकार से प्रवासी मजदूरों के बैंक खातों में रुपए डालने को कहा है।

प्रवासी मजदूरों के पलायन पर कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा, “प्रवासी एक बार फिर पलायन कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके बैंक खातों में रुपए डाले। लेकिन कोरोना फैलाने के लिए जनता को दोष देने वाली सरकार क्या ऐसा जन सहायक कदम उठाएगी?”

दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार द्वारा अचानक लॉकडाउन लगाने के फैसले के बाद गाँधी के इस ट्वीट ने प्रवासी श्रमिकों को बेहद निराश किया है, इसके चलते वे और इन राज्यों को छोड़ने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

हालाँकि, यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने यहाँ काम करने वाले प्रवासी मजदूरों की जरूरतों का ध्यान रखें। इससे पहले भी राहुल गाँधी ने 2020 में महामारी की पहली लहर के दौरान प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए उनसे इनकी मदद करने को कहा था। उन्होंने मोदी सरकार पर बिना सोचे समझे लॉकडाउन लगाने का आरोप लगाया था।

बेहद हैरानी तो तब हुई जब दिल्ली सरकार द्वारा मनमाने तरीके से लगाए गए लॉकडाउन को लेकर गाँधी ने इस तरह की कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी। इससे भी महत्वपूर्ण बात तो यह है कि महाराष्ट्र में महाविकास आघाडी सरकार, जिसका वह एक अभिन्न हिस्सा हैं, उस पर भी वे कुछ नहीं बोले।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोरोना की दूसरी लहर से पैदा हुए संकट का फायदा उठाकर कमाई करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों ने महाराष्ट्र पुलिस पर वसूली का आरोप लगाया है। राज्य में 15 दिनों का कर्फ्यू लगाए जाने के कारण मजदूर अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हैं।

एक टैक्सी ड्राइवर ने बताया, “कर्फ्यू लगने के बाद आजीविका की समस्या उत्पन्न हो गई है। हम अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। पिछले साल भी हम लॉकडाउन के दौरान अपने घरों को लौट गए थे। लेकिन स्थिति सुधरने के बाद हम फिर से वापस आ गए। पिछले साल की तरह इस साल भी पुलिस हमसे जबरन वसूली कर रही है।”  

इसी तरह महाराष्ट्र से वापस लौट रहे एक प्रवासी मजदूर सनाउल्लाह खान ने बताया,  “हम पुणे से आ रहे हैं। एक बस ने हमसे 2500-3000 रुपए लिए। महाराष्ट्र बॉर्डर पर हमें बस से उतारकर दो गाड़ियों में बैठने को कहा गया। बॉर्डर चेक प्वाइंट पर पुलिस और परिवहन विभाग के लोगों ने भी हमें अनदेखा कर दिया।”

वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) की पोल आम लोगों की नजर में सोमवार (19 अप्रैल 2021) की शाम होते-होते खुल गई। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक लॉकडाउन का ऐलान करते हुए कहा था कि वे हाथ जोड़कर प्रवासी मजदूरों से विनती करते हैं कि ये एक छोटा सा लॉकडाउन है, जो मात्र 6 दिन ही चलेगा, इसलिए वे दिल्ली को छोड़ कर कहीं और न जाएँ।

लेकिन उनके इस ऐलान के साथ ही पहले दिल्ली के ठेकों पर भीड़ उमड़ी और फिर उसके कुछ ही घंटों बाद दिल्ली से घर लौटने की मजदूरों के बीच होड़ शुरू हो गई। ठीक उसी तरह जैसे पिछले साल लॉकडाउन के दौरान देखने को मिला था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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