Sunday, July 25, 2021
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तो कॉन्ग्रेस ने ‘आतंकी’ के हिमायतियों से ही गठबंधन कर लिया… क्यों?

"साध्वी ने भी लगभग वही कहा जो शिवसेना की ओर से पहले भी कहा जा चुका है। वही शिवसेना जो महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस का एक सहयोगी दल है। मगर क्या प्रज्ञा को आतंकवादी बोलने वाले राहुल की कॉन्ग्रेस शिवसेना को आतंकवादी से सहानुभूति रखने वाला बोल सकती है?"

संसद में साध्वी प्रज्ञा के नाथूराम गोडसे को देशभक्त कहने से नया हंगामा खड़ा हो गया है। नाथूराम गोडसे को महात्मा गाँधी की हत्यारे के रूप में जाना जाता है। इस बीच एक नया विवाद तब सामने आ गया जब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने पलटकर साध्वी प्रज्ञा को ही आतंकवादी कह डाला। अपने एक ट्वीट में राहुल ने लिखा “भारत के संसदीय इतिहास में यह एक काला दिन है। आतंकी प्रज्ञा ने आतंकवादी गोडसे को देशभक्त कहा है।”

राहुल अपने इस बयान में उसी महिला का ज़िक्र कर रहे थे जिसे यूपीए के शासनकाल में “हिन्दू आतंकवाद” को साबित करने के लिए जेल में बंद कर प्रताड़ित किया गया। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस पार्टी गोडसे को सम्मान देने वाली पार्टी शिवसेना को समर्थन दे रही है।

राहुल या उनकी कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं से इस बात की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वह राष्ट्रवादियों की सलाह पर ध्यान भी देंगे। मगर उन्हें अब अपने नए सहयोगी दल ‘शिवसेना’ की तो सुननी चाहिए।

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में 2010 में छपे एक सम्पादकीय में नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। उसमें कहा गया था कि गोडसे इटली से नहीं आए थे बल्कि एक देशभक्त थे जो बँटवारे के वक़्त हिन्दुओं के कत्लेआम से बहुत आहत थे।

सामना में नाथूराम गोडसे पर यह सम्पादकीय उस वक़्त लिखा गया था जब ठाणे लिटरेरी मीट की एक स्मारिका में गोडसे को फीचर किया गया था। इसके बाद एनसीपी और कॉन्ग्रेस दोनों ही पार्टियों ने इसका जमकर विरोध किया था। जिसपर सामना के सम्पादकीय में लिखा गया कि, “उनका ज़िक्र किया गया यह कॉन्ग्रेस और एनसीपी के दुखी होने का कारण तो नहीं” इसके अलावा सम्पादकीय में यह भी कहा गया कि उस स्मारिका में गोडसे को गाँधी के हत्यारे के तौर पर नही दर्शाया गया।”

इस सम्बन्ध में ही एक एडिटोरियल में कहा गया था कि “जो लोग गोडसे को नहीं मानते वह क्या इशरत से प्रेम करते हैं? क्या स्मारिका पर इशरत की तस्वीर छापी जाती? गोडसे एक देशभक्त थे जो हमेशा अखंड भारत के लिए जिए। उनके लिए भावना होना क्या एंटी-नेशनल होना है? “

साध्वी ने भी लगभग वही कहा जो शिवसेना की ओर से पहले भी कहा जा चुका है। वही शिवसेना जो महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस का एक सहयोगी दल है। मगर क्या प्रज्ञा को आतंकवादी बोलने वाले राहुल की कॉन्ग्रेस शिवसेना को आतंकवादी से सहानुभूति रखने वाला बोल सकती है? गोडसे और साध्वी के लिए ‘आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल करने वाले राहुल का तो जैसे इस शब्द पर एकाधिकार है।

एक लम्बे समय से कई राजनेताओं ने नाथूराम के नाम को ऐसा मोहरा बनाया है जिसके ज़रिए वह हिन्दुत्ववादियों को निशाना बना रहे हैं। यह कॉन्ग्रेस और गाँधी परिवार की भ्रष्टता नहीं तो और क्या है कि इन्होने देश के प्रधानमंत्री रहे इनके अपने परिवार के सदस्य राजीव गाँधी के हत्यारों को चुनाव में फायदे के लिए माफ़ कर दिया। जबकि कॉन्ग्रेस पार्टी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि गोडसे को लेकर आम जनता क्या सोचती है क्योंकि अगर उन्हें इसका फर्क पड़ता तो महाराष्ट्र में वह उस शिवसेना से गठबंधन नहीं करती जो हमेशा से गोडसे के प्रति सम्मान का भाव प्रकट करती रही है। उनके खुद के ही बयानों का सार देखें तो कॉन्ग्रेस पार्टी इस समय आतंकवादी के हिमायती संग गठजोड़ कर के बैठी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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