Homeराजनीतिआजम खान की SIT के सामने पेशी, जाँच अधिकारियों ने माँगे 90 सवालों के...

आजम खान की SIT के सामने पेशी, जाँच अधिकारियों ने माँगे 90 सवालों के जवाब

सोमवार को आजम खान काफी दिनों बाद रामपुर में सार्वजनिक रूप से दिखे। उन्होंने पहले सुबह रामपुर विधानसभा सीट से सपा की उम्मीदवार और अपनी पत्नी तंजीन फाातिमा का नामांकन करवाया। बाद में, वह उनके ख़िलाफ़ 84 मामलों की जाँच कर रही एसआइटी टीम के सामने पेश होने महिला थाने पहुँचे।

उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद आजम खान ने सोमवार (अक्टूबर 1, 2019) को अपने ऊपर चल रहे कई मामलों को एक के बाद एक निबटाने की जद्दोजहद की। वे अपने ख़िलाफ़ दर्ज मुकदमों की जाँच के लिए एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) के सामने पेश हुए। उनके साथ इस दौरान उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटा अब्दुल आजम भी मौजूद रहे। आजम और उनके परिजन आधे घंटे के करीब महिला थाना में रहे। उन्होंने अफसरों से कहा कि उनके ख़िलाफ़ चल रहे सभी मुकदमे झूठे है। वहीं, जाँच अधिकारियों ने आजम से 90 सवालों के जवाब माँगे हैं।

बताया जा रहा है कि सोमवार को आजम खान काफी दिनों बाद रामपुर में सार्वजनिक रूप से दिखे। उन्होंने पहले सुबह रामपुर विधानसभा सीट से सपा की उम्मीदवार और अपनी पत्नी तंजीन फाातिमा का नामांकन करवाया, फिर कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने लोगों से तंजीन को जिताने की अपील की। बाद में, वह उनके ख़िलाफ़ 84 मामलों की जाँच कर रही एसआइटी टीम के सामने पेश होने महिला थाने पहुँचे।

थाने में आजम खान एसआईटी के सीओ सत्यजीत गुप्ता से मिले। उन्होंने सीओ से कहा कि उनका राजनीतिक जीवन बेदाग है। सरकार आती-जाती रहती है। अफसर बिना किसी भय, पक्षपात के निष्पक्ष होकर जाँच करें।

पेशी के दौरान सीओ ने आजम खान से एक दो नहीं बल्कि 90 सवालों के जवाब की तलब की। उन्होंने आजम खान से जवाब देने का आग्रह किया। आजम खान ने बाताया कि उनके ख़िलाफ़ सभी मुकदमे झूठे हैं, उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस दौरान आजम खान के समर्थक दलीलें देते रहे, लेकिन अधिकारियों पर कोई असर नहीं पड़ा।

यहाँ उल्लेखनीय है कि आलियागंज के किसानों की जमीन हड़पने के मामले में दर्ज 27 मुकदमों में बयान लेने के लिए पुलिस ने सपा सांसद को नोटिस दिया था। जौहर विश्वविद्यालय को लेकर उनका (सपा सांसद आजम खान) कहना था कि इस विश्वविद्यालय का निर्माण उनका सपना था और उसे पूरा करने के लिए ही उन्होंने लोगों से चंदे माँगे। उनके मुताबिक उन्होंने किसी की जमीन नहीं हड़पी है। जो किसान आज अपने आप को पीड़ित बता रहे हैं और उनपर केस कर रहे हैं, उनकी सहमति से ही जमीनें ली गई थीं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -