Monday, May 16, 2022
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‘मुझे PM बनाना है तो…’ : जब 2012 में जीत के बाद सपाइयों ने फूँके थे दलितों के घर, बच्चे से लेकर बसपा नेता समेत 3+ की हुई थी मौत

अखिलेश यादव ने तब अपने कार्यकर्ताओं के बचाव में कहा था, "समाजवादी पार्टी का कोई भी शख्स इसमें शामिल नहीं है। आप इस बारे में अपने सूत्रों से भी पता कर सकते हैं। अगर कोई भी शख्स इसमें शामिल पाया गया तो उसके विरुद्ध त्वरित और कड़ी कार्रवाई होगी।"

साल 2022 के विधानसभा चुनाव होने के बाद उत्तर प्रदेश में जो खुशी का माहौल देखने को मिल रहा है वो योगी सरकार की वापसी के कारण है। लोग खुश हैं कि एक बार फिर प्रदेश योगी सरकार के नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। लेकिन इस खुशी में वो किसी को नुकसान नहीं पहुँचा रहे। वरना एक समय ऐसा भी था जब समाजवादी पार्टी सत्ता में आई थी और इसका खामियाजा आम जन को भुगतना पड़ा था।

वो साल 2012 के विधानसभा चुनाव थे जब सपा ने प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी को हराकर जीत हासिल की थी। इस जीत का नशा सपा कार्यकर्ताओं पर ऐसा चढ़ा कि उन्होंने प्रदेश में हंगामा करना शुरू कर दिया। मात्र जीत के 36 घंटों में कई दलितों के घरों को फूँक दिया गया और तीन लोग मौत के घाट उतार दिए गए। हालात ऐसे हो गए कि मुलायम सिंह यादव ने आकर अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि अगर वे लोग अनुशासन नहीं बरतेंगे तो उनको प्रधानमंत्री नहीं बना पाएँगे और पार्टी की छवि भी बिगड़ेगी।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, मुलायम सिंह यादव ने सैफई में कहा था, “अगर आप लोग अनुशासन में नहीं रहेंगे तो आप मुझे प्रधानमंत्री नहीं बनवा पाएँगे। हमने बहुत मेहनत से विधानसभा चुनाव जीते हैं तो ऐसी कोई हरकत न करें जिससे पार्टी की छवि बिगड़े।” वहीं समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव ने इन सबके पीछे बहुजन समाज पार्टी को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि ये उन लोगों की साजिश है जिन्हें उनकी पार्टी ने चुनाव में हराया और इसमें शामिल कुछ अधिकारी हैं जो बसपा के प्रति वफादार थे।

अखिलेश यादव ने कहा था, “समाजवादी पार्टी का कोई भी शख्स इसमें शामिल नहीं है। आप इस बारे में अपने सूत्रों से भी पता कर सकते हैं। अगर कोई भी शख्स इसमें शामिल पाया गया तो उसके विरुद्ध त्वरित और कड़ी कार्रवाई होगी।” इतना ही नहीं 10 साल पहले जिस दिन सपा ने जीत दर्ज की थी उस दिन सपा कार्यकर्ताओं ने पत्रकारों को झांसी में पीटा था और उनके उपकरणों की भी तोड़फोड़ की थी। फिर यादव और बिंद समुदाय के लोगों ने मकदुमपुर गाँव में नटों के घरों में आग लगा दी थी। खुशबू नाम की महिला ने बताया था, “मुझपर हमला हुआ और घर को आग लगा दी गई क्योंकि मैंने सपा को वोट नहीं दिया।”

इनके अलावा सीतापुर जिला के भंभिया गाँव में भी दर्जन भर दलितों के घरों को जलाया गया था। स्थानीयों ने दावा किया था सपा वाले अपनी जीत का जश्न मना रहे थे तभी उनके घरों में आग लगाई गई। सपा और बसपा के कार्यकर्ताओं में भिड़ंत के बाद अंबेडकर नगर के सम्मानपुर में भी पूर्व मंत्री राम अचल राजभर की चावल की मिल को फूँका गया था। इलाहाबाद के नैनी इलाके में दो लोगों की हत्या हुई थी जबकि आगरा के मनसुखपुर में बसपा के मुन्ना लाल को मार दिया गया था। ग्रामीणों ने दावा किया था कि सारे कुकर्म सपा वालों के हैं। चुनावी जीत के बाद संभल में भी एक बच्चे की मौत हुई थी, वारदात तब घटी थी जब सपाई अपनी पार्टी के जीत के जश्न में फायरिंग कर रहे थे। फिरोजाबाद में एक युवा बुलेट लगने से मरा था, ये घटना भी सपा और पुलिसकर्मियों के बीच भिड़ंत के समय घटी थी।

2012 में सत्ता में आई थी सपा

उल्लेखनीय है कि साल 2012 के विधानसबा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 401 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उस समय उन्हें 224 सीटों पर विजय हासिल हुई थी और राज्य में सपा ने अपनी सरकार बनाई थी। ये पहली दफा था जब प्रदेश में सपा की बहुमत से सरकार बनी थी। इसके बाद साल 2017 में सपा ने कॉन्ग्रेस के साथ चुनाव लड़ा लेकिन फिर भी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। 311 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करने के बावजूद उन्हें 47 सीट मिली और इस तरह सपा को सत्ता से हटाया गया। इस बार सपा को भारी प्रचार के बाद 111 सीटों पर विजय मिली।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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