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‘RSS की तालिबान से तुलना स्वीकार्य नहीं, यह हिंदू संस्कृति का अपमान’: जावेद अख्तर को शिवसेना ने दिया करारा जवाब

''आरएसएस और विहिप चाहते हैं कि हिंदुओं के अधिकारों का दमन न किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने कभी भी महिलाओं के अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। वहीं, अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति बेहद भयावह है। लोग दहशत में हैं। तालिबानियों से डर कर अपने ही देश से भाग गए और वहाँ महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जा रहा है।”

बॉलीवुड के मशहूर गीतकार जावेद अख्तर द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) की तुलना तालिबान से करने पर शिवसेना ने उन पर हमला बोला है। शिवसेना ने सोमवार (6 सितंबर) को जावेद अख्तर की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की तुलना ‘हिंदू संस्कृति के लिए अपमानजनक’ है। अपने मुखपत्र सामना में शिवसेना ने इस तरह की तुलना करने वालों से ‘अपने विचारों पर पुन: विचार करने’ को कहा।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में जावेद अख्तर पर बसरते हुए कहा, ”इन दिनों कुछ लोग किसी की तुलना तालिबान से कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि वे समाज और मानव जाति के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। पाकिस्तान और चीन, जो लोकतांत्रिक देश नहीं हैं, वो भी अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन कर रहे हैं, क्योंकि इन दोनों देशों में मानवाधिकारों का कोई स्थान नहीं है। हालाँकि, हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं जहाँ एक व्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है। इसलिए, तालिबान से आरएसएस की तुलना करना गलत है। भारत हर तरह से बेहद सहिष्णु है।”

संपादकीय में आगे कहा गया है कि आरएसएस और विहिप जैसे संगठनों के लिए हिंदुत्व एक ‘संस्कृति’ है। इसमें कहा गया है, ”आरएसएस और विहिप चाहते हैं कि हिंदुओं के अधिकारों का दमन न किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने कभी भी महिलाओं के अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। वहीं, अफगानिस्तान की वर्तमान स्थिति बेहद भयावह है। लोग दहशत में हैं। तालिबानियों से डर कर अपने ही देश से भाग गए और वहाँ महिलाओं के अधिकारों का दमन किया जा रहा है।”

सामना ने अपने संपादकीय में अख्तर को ऐसे व्यक्ति के रूप में चिन्हित किया है, जो अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं। साथ ही उन्होंने मुस्लिम समाज के चरमपंथी विचारों पर भी हमला किया है। इसमें आगे लिखा गया है, ”संघ की तुलना तालिबान से स्वीकार्य नहीं है। हमारे देश में ज्यादातर लोग धर्मनिरपेक्ष हैं और तालिबान की विचारधारा को स्वीकार नहीं करेंगे। भारत में हिंदू बहुसंख्यक है, इसके बावजूद यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है।”

बता दें कि 3 सितंबर को एनडीटीवी के एक शो में अख्तर ने कहा था, “आरएसएस, वीएचपी और बजरंग दल का समर्थन करने वालों की मानसिकता भी तालिबान जैसी ही है।” उन्होंने कहा, ”जिस तरह तालिबान एक मुस्लिम राष्ट्र बनाने की कोशिश कर रहा है। उसी तरह कुछ लोग हमारे सामने हिंदू राष्ट्र की अवधारणा पेश करते हैं।” जावेद अख्तर ने आगे कहा, “इन लोगों की मानसिकता एक जैसी है। तालिबान हिंसक हैं। जंगली हैं। उसी तरह आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल का समर्थन करने वाले लोगों की मानसिकता एक जैसी है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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