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‘कमल हासन राजनीति में बिना डायपर का बच्चा, पूरे राज्य में गंध मचा रखी है’

हासन ने 3 अक्टूबर को चेन्नै के एक कार्यक्रम में हिंदी को 'डायपर वाला बच्चा' जैसी नवजात भाषा करार दिया था। उन्होंने हिंदी की मानी हुई आयु की तुलना प्राचीन समय से चली आ रही भाषाओं जैसे तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़ आदि से करते हुए यह बात कही थी।

अभिनेता से नेता बनने की कोशिश कर रहे कमल हासन ने हाल ही में हिंदी को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए भारतीय भाषा परिवार में इसे ‘डायपर वाला बच्चा’ करार दिया था। इसके जवाब में भाजपा नेता और राज्य सभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने हासन को ‘बिना डायपर वाला बच्चा’ करार दिया है।

कमल हासन ने 3 अक्टूबर को चेन्नै के एक कार्यक्रम में हिंदी को ‘डायपर वाला बच्चा’ जैसी नवजात भाषा करार दिया था। उन्होंने हिंदी की मानी हुई आयु की तुलना प्राचीन समय से चली आ रही भाषाओं जैसे तमिल, संस्कृत, तेलुगु, कन्नड़ आदि से करते हुए यह बात कही थी।

हासन ने हालाँकि बात सँभालने के लिए साथ में यह भी जोड़ा कि उन्हें हिंदी का भी ख्याल रखे जाने की चिंता है, क्योंकि “ये भी हमारा ही बच्चा है आखिरकार”, लेकिन इशारा साफ़ था। इसके पहले भी एक बार कमल हासन हिंदी के खिलाफ तमिलनाडु में हिंसक आंदोलन की बात कह चुके हैं।

एक ट्विटर यूज़र ने इसी मसले पर ऑपइंडिया की लिंक साझा करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी को टैग कर उनका ध्यान इस मुद्दे पर आकर्षित किया था। उसी के जवाब में स्वामी ने लिखा, “और राजनीति में कमल हासन क्या है? एक बिना डायपर का बच्चा,जो पूरे राज्य में बदबू फैला रहा है।” उल्लेखनीय है कि खुद तमिल होने के बावजूद स्वामी हिंदी-संस्कृत को भारत की आधिकारिक और राष्ट्रीय भाषाएँ बनाए जाने की वकालत करते रहे हैं। उनके मुताबिक भारत की राष्ट्रीय भाषा संस्कृत होनी चाहिए, जिसे शनैः-शनैः बढ़ावा दे कर आधिकारिक भाषा बनने की तरफ़ ले जाना चाहिए। वहीं अंग्रेजी के साथ तत्सम/संस्कृतनिष्ठ हिंदी को तात्कालिक राजभाषा और ‘link language’ के तौर पर प्रचारित किया जाना चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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