J&K: ब्लॉक चुनाव से पहले आतंकियों ने लगाई स्कूल में आग, सब्जी मंडी में फेंके पेट्रोल बम

राज्य की तीन मुख्य पार्टियाँ इन चुनावों से किनारा किए हुए हैं- जहाँ कॉन्ग्रेस ने चुनावों की घोषणा के पहले उससे मशविरा न किए जाने का आरोप लगाते हुए चुनावों में हिस्सा न लेने का ऐलान किया हुआ है, वहीं महबूबा मुफ़्ती की पीडीपी और उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने भी चुनावों का बहिष्कार कर रखा है।

जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने फिर हमला बोलते हुए एक स्कूल और जनरल स्टोर में आग लगा दी है, और एक सब्जी मंडी पर भी पेट्रोल बम से हमला हुआ है। श्रीनगर में हुए इस हमले में हालाँकि किसी को भी जान से हाथ नहीं धोना पड़ा है, लेकिन कल (गुरुवार, 24 अक्टूबर, 2019) होने जा रहे स्थानीय BDC (ब्लॉक डेवलपमेंट कमेटी) के चुनावों के ठीक पहले हुए इस हमले से उनके मंसूबे साफ़ पता चल रहे हैं। इसीलिए राज्य की पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मामला दर्ज कर लिया है और ज़ोरों शोरों से अपराधियों की तलाश कर रही है

जिस स्कूल और जनरल स्टोर में आग लगाई गई है, वे दोनों ही श्रीनगर के कुलगाम में स्थित हैं। इन दोनों पर हमलों के अतिरिक्त घाटी के आतंक के गढ़ों में से एक माने जाने वाले इलाके पुलवामा में भी एक ट्रक को आग के हवाले कर दिया गया है

कल होने वाले चुनावों के बारे में जानकारी मीडिया को देते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी शैलेंद्र कुमार ने बताया था कि 26,629 ग्राम स्तर पर पंच और सरपंच पदों पर आसीन उम्मीदवार BDC के अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी के योग्य पाए गए हैं। इनमें एक-तिहाई से ज़रा ही कम (8,313) अनुपात महिलाओं का है, और 18,316 पुरुष उम्मीदवार मैदान में हैं। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के अनुसार यह संख्या (26,629) भी राज्य के कुल ऐसे पदों के तीन चौथाई से ही कुछ अधिक है, और करीब 24% पद (12,766) विभिन्न कारणों से रिक्त हैं। इन सरपंचों को ही अपने इलाके की BDC का चुनाव करना हैं।

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राज्य की तीन मुख्य पार्टियाँ इन चुनावों से किनारा किए हुए हैं- जहाँ कॉन्ग्रेस ने चुनावों की घोषणा के पहले उससे मशविरा न किए जाने का आरोप लगाते हुए चुनावों में हिस्सा न लेने का ऐलान किया हुआ है, वहीं महबूबा मुफ़्ती की पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) और उमर अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ़्रेंस ने भी चुनावों का बहिष्कार कर रखा है। ऐसे में लड़ाई में केवल भाजपा, निर्दलीय उम्मीदवार और पैंथर्स पार्टी ही बचे हुए हैं।

पीडीपी और नेशनल कॉन्फ़्रेंस के चोटी के नेता नज़रबंद हैं। इसका कारण है कि उन्होंने उस बॉन्ड पर साइन करने से इंकार कर दिया जिसमें उन्हें यह आश्वासन देना था कि बाहर आने पर वे शांति और कानून व्यवस्था के लिए किसी तरह खतरा नहीं बनेंगे। जहाँ महबूबा मुफ़्ती की तरफ से ट्विटर के ज़रिए संवाद उनकी बेटी इल्तज़ा कर रहीं हैं, वहीं उमर अब्दुल्ला की बहन और बुआ को कश्मीर पुलिस ने कुछ दिन पहले ही भड़काऊ तख्तियाँ लेकर शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया था

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