Wednesday, August 4, 2021
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राम मंदिर में अड़ंगा डालने में लगी AAP, ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश: जानिए, ‘जमीन घोटाले’ की हकीकत

यहाँ तक कि कोर्ट फी और स्टाम्प तक की खरीददारी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन की जा रही है। विक्रेता के खाते में रुपए भी ऑनलाइन ही भुगतान किए जा रहे हैं। सहमति पत्र के हिसाब से ही कार्य हो हो रहा है।

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक संभावनाओं की तलाश में जुटी आम आदमी पार्टी (AAP) हिंदुओं को विभाजित करने और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण कार्य में अड़ंगा डालने की कोशिशों में लगी है। पार्टी सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर के लिए जमीन की खरीद में का आरोप लगाया है। AAP नेता संजय सिंह ने विकास दुबे की पत्नी ख़ुशी दुबे से प्रेस कॉन्फ्रेंस करा कर ‘ब्राह्मण कार्ड’ भी खेला। संजय सिंह देशद्रोह में नामजद रहे हैं और राज्यसभा से उन्हें निलंबित भी किया गया था।

जमीन खरीद में लगाया घोटाले का आरोप

संजय सिंह ने रविवार (जून 13, 2021) को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में जमीन की गाटा संख्या 243, 244, 246, जिसकी कीमत 5 करोड़ 80 लाख रुपए है, उसे 2 करोड़ रुपये में पहले खरीदा गया, इसके बाद सुल्तान अंसारी ने इस जमीन की खरीदारी में करोड़ों का हेरफेर किया

दिल्ली में इमामों का वेतन बढ़ाने वाली पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने यूपी आते ही ‘हिन्दू कार्ड’ खेलते हुए राम मंदिर के लिए चिंता जताई और दावा किया कि अयोध्या के मेयर तक इस घोटाले में शामिल थे। संजय सिंह के अनुसार, 18 मार्च 2021 को ये जमीन शाम को 7 बजकर 10 मिनट पर खरीदी गई और 5 मिनट बाद 2 करोड़ रुपए में खरीदी गई जमीन को राम जन्मभूमि ट्रस्ट ने साढ़े 18 करोड़ रुपए में खरीदा।

बकौल संजय सिंह, इसमें से 17 करोड़ रुपए मात्र 5 मिनट में RTGS किए गए। उन्होंने एक सेकंड में साढ़े 5 लाख रुपए की दर से गबन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट द्वारा खरीददारी और बैनामा में डॉक्टर अनिल मिश्रा और मेयर ऋषिकेश उपाध्याय गवाह बने। उन्होंने इसे ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ और भ्रष्टाचार का मामला बताते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए करोड़ों रुपए का चंदा देने वाली जनता को इससे आघात लगा है।

इस मामले की जाँच CBI और ED से कराने की माँग करते हुए संजय सिंह ने एंग्रीमेंट व बैनामा के स्टाम्प और समय, सब में हेरफेर का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट की जमीन का एग्रीमेंट 5:11 में खरीदा गया और जमीन का स्टाम्प 5:22 में। साथ ही ट्रस्ट में प्रस्ताव पारित कराए बिना 5 मिनट में जमीन बेचना का फैसला लेने का आरोप भी लगाया। कुल मिला कर उनका सवाल ये था कि 18 मार्च को जिस जमीन को 2 करोड़ रुपए में खरीदा गया, उसी जमीन का 10 मिनट बाद साढ़े 18 करोड़ रुपए में एग्रीमेंट क्यों हुआ?

ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने दिया जवाब

अब चंपत राय ने खुद इसका जवाब देकर दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने निर्माणाधीन राम मंदिर के आसपास के छोटे-मोटे मंदिरों और गृहस्थों की जमीन खरीदी। परकोटा व रीटेनिंग दीवार की वस्तु में सुधार, पूर्व-पश्चिम दिशा में आवागमन की सुविधा, खुला मैदान रखने के लिए और सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा आवश्यक था। साथ ही जिनसे भूमि ली गई है, उनके पुनर्वास की भी समुचित व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए भी जमीन की खरीददारी चालू है। उन्होंने कहा कि क्रय-विक्रय का कार्य सहमति के आधार पर किया जाता है और सहमति पत्र पर हस्ताक्षर भी होते हैं। यहाँ तक कि कोर्ट फी और स्टाम्प तक की खरीददारी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन की जा रही है। विक्रेता के खाते में रुपए भी ऑनलाइन ही भुगतान किए जा रहे हैं। चंपत राय ने बताया कि सहमति पत्र के हिसाब से ही कार्य हो हो रहा है।

चंपत राय ने बताया कि अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के साथ ही यहाँ जमीन के भाव यकायक बढ़ गए, क्योंकि कई इलाकों से लोग आकर यहाँ भूमि खरीदने लगे। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए भूमि खरीद रही है। जिस भूखंड को लेकर संजय सिंह से आरोप लगाया, उसे रेलवे लाइन के पास खरीदा गया। ये एक प्रमुख स्थान है।

चंपत राय ने स्पष्ट किया कि ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने अब एक जितनी भी भूमि खरीदी है, उसे खुले बाजार की कीमत से कम पर ही लिया गया है। उन्होंने कहा, “उस भूमि को बेचने वालों ने वर्षों पूर्व अनुबंध करा लिया था। मार्च 18, 2021 को इसका बैनामा हुआ। फिर ट्रस्ट के साथ अनुबंध किया गया।” चंपत राय ने आरोपों को भ्रामक, गुमराह करने वाला और राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित करार दिया।

क्यों संजय सिंह के आरोपों में नहीं है दम

मोटा-मोटी AAP का आरोप यही है कि मिनटों में 2 करोड़ रुपए की जमीन 18 करोड़ रुपए की हो गई। किस-किस खाते से 17 करोड़ रुपए RTGS किए गए, इसकी जाँच की माँग भी की गई है। 1.208 हेक्टेयर जमीन का बैनामा और एंग्रीमेंट हुआ। पूर्व सपा नेता पवन पांडेय का आरोप है कि बाबा हरिदास ने उस जमीन को सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी को बेचा और उसी को ट्रस्ट ने खरीदा। मतलब, आरोप है कि 2 करोड़ की जमीन खरीद कर ट्रस्ट के साथ 18 करोड़ में एग्रीमेंट की गई और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा दोनों में गवाह हैं।

अधिवक्ता अभिषेक द्विवेदी ने राम मंदिर पर संजय सिंह द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए चीजों को समझाया है। उन्होंने ‘एग्रीमेंट टू सेल’ और ‘सेल डीड’ का अंतर समझाते हुए कहा कि एग्रीमेंट का अर्थ हुआ कि किसी बाद की तारीख को जमीन बेचने का वादा किया गया, वहीं डीड मतलब सेल पूर्ण हो गया। सितंबर 17, 2019 को कुसुम पाठक नामक महिला ने सुल्तान अंसारी समेत कुछ लोगों के साथ ‘एग्रीमेंट टू सेल’ किया।

गौर कीजिए, तब उस समय के बाजार मूल्य के आधार पर ऐसा किया गया क्योंकि राम मंदिर के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने में अब भी 2 महीने बाकी थे। ये एग्रीमेंट 2 करोड़ रुपए का हुआ। मार्च 18, 2021 को ही सुल्तान अंसारी ने उसी ‘एग्रीमेंट टू सेल’ को आधार बना कर ‘सेल एग्रीमेंट’ किया (बेचने के लिए), जिसमें 2021 के बाजार मूल्य के हिसाब से 18 करोड़ रुपए की बात हुई। ठीक उसी दिन, कुसुम पाठक ने 2019 वाला सेल एग्रीमेंट लागू किया, जो सुल्तान अंसारी के साथ हुआ था।

याद कीजिए, कुसुम पाठक और सुल्तान अंसारी वाला ये ‘एग्रीमेंट टू सेल’ 2019 के बाजार मूल्य पर ही था। अब ट्रस्ट ने जब इस जमीन को खरीद लिया (सेल एग्रीमेंट) है, इसका अधिग्रहण भी हो गया है और कुछ ही दिनों में सेल डीड भी एग्जिक्यूट किया जाएगा। अयोध्या में 2019 और 2021 – इन दो वर्षों में जमीन के दाम अच्छे-खासे बढ़े हैं। राम मंदिर जजमेंट और यूपी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण ऐसा हुआ, ये सभी जानते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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