Sunday, August 1, 2021
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‘देश का कानून सर्वोपरि, आपका नियम नहीं’ – शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने ट्विटर को सुनाई दो टूक

ट्विटर ने कहा - "भारतीय कानूनों का सम्मान करते हैं, लेकिन व्यापक हित को देखते हुए कंपनी के नियमों का पालन करते हैं।" इस पर संसदीय समिति ने कहा - "देश का कानून सर्वोपरि है, आपकी नीति नहीं।"

केंद्र सरकार के नए आईटी नियमों को लेकर सरकार और ट्विटर में जारी तनाव के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को संसदीय समिति ने शुक्रवार (18 जून 2021) को तलब किया। इस समिति की अध्यक्षता कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने की।

उनके अलावा समिति की बैठक में सांसद महुआ मोइत्रा, निशिकांत दुबे, राज्यवर्धन सिंह राठौर, तेजस्वी सूर्या, संजय सेठ, जफर इस्लाम, सुभाष चंद्रा और जयदेव गल्ला शामिल रहे।

वहीं माइक्रो ब्लॉगिंग साइट्स की ओर से ट्विटर इंडिया की लोक नीति प्रबंधक शगुफ्ता कामरान और कानूनी सलाहकार आयुषी कपूर ने संसदीय समिति के समक्ष अपना पक्ष रखा। प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के मुद्दे पर तलब किए गए ट्विटर से समिति ने कई कड़े सवाल पूछे।

केंद्र सरकार के नए आईटी नियमों को लेकर संसद की स्थाई समिति ने ट्विटर से जब यह पूछा कि क्या वो देश के नियमों और कानूनों को मानता है तो उसने कहा कि वो केवल खुद की पॉलिसीज को फॉलो करता है।

ट्विटर की नीति से ऊपर है देश का कानून

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्विटर को कड़ी फटकार लगाते हुए संसदीय समिति ने स्पष्ट सवाल किया कि भारत के कानूनों का उल्लंघन करने के मामले में आप पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाए? इसके अलावा संसदीय समिति ने अमेरिकी कंपनी को स्पष्ट कहा है कि देश का कानून ही सर्वोपरि है, उसकी नीति नहीं। उसे देश के कानून का पालन करना ही होगा। सूत्रों ने कहा है कि पार्लियामेंट्री कमेटी में इस बात पर आम सहमति बनी है कि ट्विटर को आईटी एक्ट का पालन करते हुए मुख्य अनुपालन अधिकारी की नियुक्त करना चाहिए।

करीब डेढ़ घंटे की इस पूछताछ के दौरान ट्विटर से संसदीय समिति ने यह पूछा कि आपके लिए देश का कानून जरूरी है या आपकी नीति? इसके जवाब में कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि वो भारतीय कानूनों का सम्मान करते हैं, लेकिन व्यापक हित को देखते हुए कंपनी के नियमों का पालन करते हैं।

समिति के सवालों का जवाब नहीं दे पाया ट्विटर

सूत्रों के मुताबिक पता चला है कि संसदीय समिति ने ट्विटर से कई तीखे सवाल किए थे, जिसका वो उत्तर नहीं दे पाया। इसके अलावा सांसदों ने इस विषय को भी उठाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने पर्मानेंट अनुपालन अधिकारी के बजाय एक अंतरिम अधिकारी की नियुक्ति की है, जो वकील है।

दूसरे दौर की बैठक पर बनी सहमति

संसदीय समिति में इस बात को लेकर एक राय बनी है कि ट्विटर के अधिकारियों के साथ दूसरे दौर की वार्ता होनी चाहिए। समिति ने प्लेटफॉर्म से कुछ सवालों के लिखित जवाब माँगे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले कई बार केंद्र सरकार नियमों के पालन, टूलकिट मामले को लेकर ट्विटर को चेतावनी दे चुकी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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