Homeराजनीति'IAS फ़ैसल का इस्तीफ़ा विश्वास की कमी का संकेत'

‘IAS फ़ैसल का इस्तीफ़ा विश्वास की कमी का संकेत’

फ़ैसल ने यह बेतुका आरोप लगाया कि क़रीब 20 करोड़ भारतीय मुस्लिम हिन्दुवादी ताक़तों के हाथों ग़ायब हो गए, हाशिये पर पहुँच गए और दोयम दर्ज़े के नागरिक बनकर रह गए

भारतीय प्रशासनिक सेवा के टॉपर रहे शाह फ़ैसल के इस्तीफ़े ने सियासी माहौल में हलचल पैदा कर दी। फ़ैसल के इस्तीफ़ा दिए जाने के बाद से ही बयानबाज़ी का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ज़ाहिर सी बात है कि एक आईएएस टॉपर का यह क़दम उठाना किसी को भी सोचने पर मजबूर कर सकता है, जिसपर सियासत होना लाज़मी है।

इस मुद्दे पर अब तक कई बयान सामने आ चुके हैं। इनमें पी चिदंबरम और उमर अब्दुल्ला जैसे बड़े नाम शामिल हैं। राजनीति से परे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शाह फ़ैसल के इस्तीफ़े की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि फ़ैसल द्वारा इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला उनके मज़बूत इरादों की कमी का संकेत है। यह इस्तीफ़ा, देश के प्रति उनके अविश्वास को व्यक्त करता है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अगर विश्वास में कमी ना होती तो फ़ैसल इस तरह के फ़ैसले का रुख़ कभी ना करते बल्कि आतंकी गतिविधियों का पुरज़ोर विरोध करते। ऐसा संभव नहीं है कि देश आतंकी गतिविधियों से आपका बचाव भी करे और आप आतंकी को आतंकी कहने से परहेज़ करें।

सिंह के मुताबिक़ भारत देश एक सहिष्णु देश है, जो सभी नागरिकों को एकसमान अधिकार देता है, जिसमें अभिव्यक्ति की आज़ादी भी शामिल है। लोग भारत जैसे देश को एक सॉफ्ट टारगेट पाते हैं, शायद इसीलिए इस तरह की गतिविधियाँ फलीभूत होती हैं।

बता दें कि कश्मीर में हो रही मौतों के चलते आईएएस शाह फ़ैसल ने बुधवार (जनवरी 10, 2019) को अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। साथ ही यह बेतुका आरोप भी लगाया था कि क़रीब 20 करोड़ भारतीय मुस्लिम हिन्दुवादी ताक़तों के हाथों ग़ायब हो गए, हाशिये पर पहुँच गए और दोयम दर्ज़े के नागरिक बनकर रह गए।

फ़ैसल के इस्तीफ़ा देने के बाद से ऐसी अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि वो उमर अब्दुल्ला की नैशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी से आगामी लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं। उमर अबदुल्ला ने ट्विटर के ज़रिये फ़ैसल के इस्तीफ़े का स्वागत भी किया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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