मायावती से मिलने के लिए लगी UP के ‘बाबुओं’ की लाइन, ‘BSP की वापसी की ‘उम्मीद’

सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन की तरफ एबीपी ने 56 सीटें जाती हुई दिखाई है वहीँ इंडिया टुडे के अनुसार, महागठबंधन सिर्फ़ 10-16 सीटों पर सिमट जाएगा। उत्तर प्रदेश में एग्जिटपोल्स को लेकर एजेंसियों के अलग-अलग अनुमान होने की स्थिति में दोनों ही पक्षों को उम्मीद है कि उन्हें अधिक सीटें मिलेंगी।

एग्जिट पोल्स में उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। अगर यूपी की बात करें तो जहाँ एबीपी न्यूज़ की एग्जिट पोल में भाजपा को मात्र 22 सीटें मिलती दिख रही है, इंडिया टुडे-एक्सिस के एग्जिट पोल में पार्टी को 62-68 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

सपा-बसपा-रालोद महागठबंधन की तरफ एबीपी ने 56 सीटें जाती हुई दिखाई है वहीँ इंडिया टुडे के अनुसार, महागठबंधन सिर्फ़ 10-16 सीटों पर सिमट जाएगा। उत्तर प्रदेश में एग्जिटपोल्स को लेकर एजेंसियों के अलग-अलग अनुमान होने की स्थिति में दोनों ही पक्षों को उम्मीद है कि उन्हें अधिक सीटें मिलेंगी। कहते हैं, दिल्ली का रास्ता लखनऊ होकर जाता है और पिछली बार राज्य में भाजपा के एकतरफा परफॉरमेंस को देखें तो बात सच भी साबित होती है।

इस बीच एक ऐसी ख़बर आई है, जो चौंकाने वाली है। मायावती के घर के बाहर नेताओं की नहीं बल्कि सरकारी बाबुओं की लाइन लगी हुई है। ये नौकरशाह ‘बहन जी’ से मिलने के लिए उनके पास पहुँच रहे हैं। इनमें कई मौजूदा अधिकारी हैं तो कई वर्तमान में कार्यरत हैं। ‘बेस्ट विशेज’ से लेकर मायावती की ‘उज्जवल भविष्य की कामना’ वाली संदेश लिखी हुई पर्चियों के साथ ‘बहन जी’ को गुलदस्ते भेंट किए जा रहे हैं। अचानक से मायावती के घर के बाहर बाबुओं की लगी लाइन से पत्रकारों सहित कई लोगों की नज़रें उधर गई हैं और लोग अंदेशा लगा तरहे हैं कि इसका कारण क्या होगा?

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कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इन नौकरशाहों को मायावती की पार्टी बसपा के अधिक सीटें जीतने का अंदेशा है। उन्हें लगता है कि मायवती राज्य में फिर से प्रासंगिक हो जाएँगी और उनका प्रभाव बढ़ जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, मायावती के घर पर कार्यरत एक कर्मचारी ने बताया, “ये अधिकारीगण मायावती से शिष्टाचार मुलाक़ात के लिए पहुँच रहे हैं। इनमें से अधिकतर ऐसे हैं, जिन्होंने उनके मुख्यमंत्रित्व काल में काम किया था। इनमें से कुछ का सम्बन्ध बहुजन समाज से है। ये अधिकारी बहन जी को मौजूदा स्थितियों से अवगत भी करा रहे हैं।

चुनाव परिणाम आने से पहले हुई ऐसी मुलाक़ातों को स्थानीय भाषा में ‘भूल न जाना’ कह कर पुकारा जाता है। 2007 में मुख्यमंत्री सचिवालय में कार्यरत एक अधिकारी ने मायावती से मलकट की ख़बर को स्वीकारते हुए कहा, “मैं उन्हें चुनावों के लिए शुभकामनाएँ देने गया था। बसपा वापसी कर रही है और शुभकामनाएँ देने में कोई बुराई नहीं है। जब नेताओं की स्थिति बुरी हो, तब आप उन्हें विश करने नहीं जाते।” कुछ अधिकारियों ने चुनाव परिणाम आने के बाद मायावती से मिलने की बजाए उन्हें सिर्फ़ गुलदस्ता भेजने का निर्णय लिया है। एक अधिकारी ने कहा कि बसपा एग्जिट पोल में सिखाए गए आँकड़ों से बेहतर प्रदर्शन करेगी।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि वो मायावती से इसीलिए मिल रहे हैं क्योंकि एग्जिट पोल्स के अनुसार, वो कमबैक कर रही हैं। बता दें कि मायावती के कार्यकाल के दौरान कई ऐसे अधिकारी थे, जिनकी तूती बोलती थी। मायावती के सचिव रहे एक अधिकारी भ्रष्टाचार के मामले में सरकारी एजेंसियों की राडार पर हैं और उनके यहाँ छापा भी पड़ा है।

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