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‘दिल से चाहता था योगी CM न बनें’: दृष्टि IAS वाले विकास दिव्यकीर्ति को तेजस्वी यादव में दिखा ‘बिहार का भविष्य’, माना 2024 में राहुल गाँधी के लिए मौका नहीं

विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि पहले उन्हें संदेह था कि मठ से आया हुआ व्यक्ति धर्म से राजनीति में आकर ठीक काम करेगा या नहीं। विकास दिव्यकीर्ति ने इसके बाद बिहार पर भी अपनी राय दी।

UPSC कोचिंग संस्थान ‘दृष्टि’ के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति ने ‘साहित्य आजतक’ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को लेकर अपनी बात रखी है। इस दौरान उन्होंने राहुल गाँधी को लेकर भी टिप्पणी की। स्टार शिक्षक माने जाने वाले विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि राहुल गाँधी अपने बेस्ट संस्करण लगातार बन रहे हैं, पहले की तुलना व बेहतर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2024 में तो उन्हें कोई संभावना नज़र नहीं आ रही, लेकिन 2029 में कुछ हो सकता है।

विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि हम क्यों मान कर चलें कि एक ही पार्टी और नेता देश चलाते रहेंगे, अलग-अलग नेताओं को सामने आना चाहिए और देश चलाना चाहिए। वहीं CM योगी आदित्यनाथ के संबंध में उन्होंने कहा कि जब उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा चल रही थी तब वो दिल से चाहते थे कि वो सीएम न बनें। लेकिन, पिछले 6-7 साल के परफॉर्मेंस की बात करते हुए उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ एक शानदार मुख्यमंत्री रहे हैं।

विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि पहले उन्हें संदेह था कि मठ से आया हुआ व्यक्ति धर्म से राजनीति में आकर ठीक काम करेगा या नहीं। विकास दिव्यकीर्ति ने इसके बाद बिहार पर भी अपनी राय दी। बिहार पर उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में वो नीतीश कुमार को अच्छे मुख्यमंत्री मानते रहे हैं और नए लोगों में उन्हें तेजस्वी यादव से उम्मीदें हैं। उन्होंने कहा कि इस बार राजद सरकार में आई तो उन्हें लालू यादव वाले जंगलराज को लेकर डर था, लेकिन राजद ने पूरी ताकत लगाई कि वो छवि फिर से न बन जाए।

उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव उन गलतियों से मुक्ति के साथ CM बनने के रास्ते पर हैं तो वो अच्छे नेता साबित होंगे। वहीं UPSC की तैयारी कराने वालों और इसमें चुने जाने वालों को दिए जाने वाले डेमीगॉड स्टेटस को लेकर उन्होंने कहा कि पहले उन्हें यूट्यूब के धुरंधरों ने छोटे वीडियो डालने की सलाह दी थी, लेकिन उनके घंटों के वीडियो भी करोड़ों लोग देखते थे। उन्होंने कहा कि हिंदी समाज भी ज्ञान-पढ़ाई का भूखा है और यदि उनके जैसे कुछ लोग इसमें कुछ भूमिका निभा रहे हैं तो ये स्वागत की बात है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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