Friday, November 27, 2020
Home राजनीति बंगाल: बिना अनुमति कोरोना टेस्ट कर सकेंगे डॉक्टर, बैकफुट पर ममता सरकार

बंगाल: बिना अनुमति कोरोना टेस्ट कर सकेंगे डॉक्टर, बैकफुट पर ममता सरकार

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट कर कहा है कि यह भाजपा के लिए एक बड़ी जीत है। आखिरकार लॉकडाउन के 38 दिन बर्बाद करने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें डॉक्टरों के लिए कोरोना की जाँच करने से पहले सरकार की मँजूरी लेनी जरूरी थी।

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने वह आदेश वापस ले लिया है जिसमें कोरोना टेस्ट से पहले डॉक्टरों को अनुमति लेने को कहा गया था। अब प्रदेश के डॉक्टर सरकार की अनुमति के बिना भी कोरोना की जाँच कर सकेंगे। इस मामले में ममता सरकार लगातार बैकफुट पर नजर आ रही है। उस पर कोरोना से जुड़े आँकड़े छिपाने के भी आरोप लग रहे हैं।

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से 30 अप्रैल को जारी एडवायजरी के दूसरे बिंदू में कहा गया है, “यह स्पष्ट किया जाता है कि आईसीएमआर जाँच प्रोटोकॉल के तहत अब किसी भी अस्पलात में किसी मरीज को भर्ती करने या इलाज करने या फिर व्यक्तिगत तौर पर कोरोना की जाँच के लिए सरकार से अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है।”

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट कर कहा है कि यह भाजपा के लिए एक बड़ी जीत है। आखिरकार लॉकडाउन के 38 दिन बर्बाद करने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपने उस आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें डॉक्टरों के लिए कोरोना की जाँच करने से पहले सरकार की मँजूरी लेनी जरूरी थी। बंगाल ने इस फैसले के कारण कई लोगों की जिंदगियों को छीन लिया, जो कि दुखद है।

मालवीय ने दूसरे ट्वीट में लिखा कि यह एडवाइजरी पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की उस शिकायत के बाद जारी की गई, जिसमें किसी भी व्यक्ति के कोरोना जाँच के लिए ममता सरकार की अनुमति जरूरी थी। यह कोरोना मामलों की संख्या को कम रखने का बंगाल सरकार का एक तरीका था, जबकि यह पार्दर्शिता का समय है।

दरअसल इस महीने की शुरुआत में पश्चिम बंगाल सरकार ने मृत्यु का वास्तविक कारण तय करने के लिए पाँच डॉक्टरों की एक समिति का गठन किया था। इस कदम से संदेह पैदा हो गया था कि पश्चिम बंगाल अन्य राज्यों के विपरीत, कोरोनो वायरस रोगियों की मौतों के लिए पहले से मौजूद स्थितियों के कारण अनिच्छुक है।

ममता सरकार के आदेश में कहा गया था कि मृत्यु प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले डॉक्टरों को एक फॉर्म भरना होगा, जिसके बाद पाँच डॉक्टरों की एक समिति द्वारा जाँच की जाएगी। इसके अलावा, उन्हें स्क्रब टाइफस, डेंगू, मलेरिया और अन्य सहित परीक्षण रिपोर्ट संलग्न करना भी आवश्यक होगा।

इसके बाद बंगाल के नॉन रेसिडेंट मेडिकल प्रोफेशनलों ने कोलकाता के सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के हवाले से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक खुली चिट्ठी लिखकर कहा था, सिर्फ सरकार की ओर से नियुक्त कमिटी ही इसकी घोषणा करती है कि मरीज कोरोना से मरा है।

जब कोरोना वायरस का मरीज भी साँस संबधी रुकावटों की वजह से मर गया, समिति ने कोरोना वायरस को मौत की वजह नहीं बताया। कोरोना वायरस को मौत की वजह नहीं बताना आँकडों के साथ फर्जीवाड़ा करना है, जबकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च ने अपनी गाइडलाइंस में इसके स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं।

गौरतलब हो कि पिछले दिनों पश्चिम बंगाल से कुछ ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि पुलिसकर्मी और स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी पहचान छिपाते हुए रात में मृतकों के संस्कार किया था, जिससे पश्चिम बंगाल में कोरोनो वायरस के केसों को लेकर संदेह और बढ़ गया था।

वहीं बंगाल के डॉक्टरों ने दावा किया था कि कोरोना वायरस को लेकर राज्य सरकार द्वारा दी जा रही जानकारियों में हेरफेर है। वास्तिवक मामलों का खुलासा करने पर डॉक्टरों ने अपनी नौकरी खोने की आशंका व्यक्त की। डॉक्टरों का कहना था कि राज्य की ओर से जारी आधिकारिक आँकड़े संक्रमित मरीजों की वास्तविक संख्या से बहुत कम है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

FIR में अर्णब पर लगाए आरोप साबित नहीं कर पाई मुंबई पुलिस: SC ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आपराधिक कानून, उत्पीड़न का औजार नहीं बनना चाहिए, जमानत मानवता की अभिव्यक्ति है।

मसूद की फौज दर्रे में घुसती और दो टुकड़े कर डालते मराठा: शिवा नाई, बाजी और शिवाजी के विशालगढ़ पहुँचने की गाथा

"मेरे बहादुरों। हमारे राजा जब तक गढ़ न पहुँच जाए, तब तक एक भी शत्रु इस दर्रे से होकर नहीं गुजरना चाहिए। मराठी आन की लाज हमारे हाथों में है। हर हर महादेव!"

BMC ने बदले की भावना से तोड़ा कंगना रनौत का ऑफिस, नुकसान की करे भरपाई: बॉम्बे HC ने लगाई फटकार

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बीएमसी को कंगना रनौत के ऑफिस में की गई तोड़फोड़ के लिए हर्जाना देना होगा। हाईकोर्ट ने कंगना के ऑफिस के नुकसान का आकलन करने के आदेश भी दिए हैं।

मैं नपुंसक नहीं.. हिंदुत्व का मतलब पूजा-पाठ या मंदिर का घंटा बजाना नहीं, फ़ोर्स किया तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाऊँगा: उद्धव ठाकरे

साक्षत्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें विरोधियों के पीछे पड़ने को मजबूर ना किया जाए। इसके साथ ही ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब मंदिर का घंटा बजाना नहीं है।

देखिए 48 घंटों में द वायर ‘मोदी की रैली में कोई नहीं आता’ से ‘बिहार में मोदी को सब चाहते हैं’ कैसे पहुँच गया

द वायर सरीखे एजेंडापरस्त मीडिया समूहों के लिए इस श्रेणी का गिरगिटनुमा विश्लेषण या दावा कोई नई बात नहीं है। प्रोपेगेंडा ही इनका एकमात्र उद्देश्य है भले उसके लिए स्क्रीन पर कुछ अनर्गल ही क्यों न परोसना पड़े।

प्रचलित ख़बरें

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

"सभी 10 हमलावरों के पास फर्जी हिंदू नाम वाले आईकार्ड थे। कसाब को जिंदा रखना पहली प्राथमिकता थी। क्योंकि वो 26/11 मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। उसे मारने के लिए ISI, लश्कर-ए-तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग ने..."

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सुबह साढ़े चार बजे कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए... और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं तो...

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

‘माझ्या कक्कानी कसाबला पकड़ला’ – बलिदानी ओंबले के भतीजे का वो गीत… जिसे सुन पुलिस में भर्ती हुए 13 युवा

सामने वाले के हाथों में एके-47... लेकिन ओंबले बिना परवाह किए उस पर टूट पड़े। ट्रिगर दबा, गोलियाँ चलीं लेकिन ओंबले ने कसाब को...

गरीब कल्याण रोजगार अभियान: प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने में UP की योगी सरकार सबसे आगे

प्रवासी श्रमिकों को काम मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया था। उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

12वीं शताब्दी में विष्णुवर्धन के शासनकाल में बनी महाकाली की मूर्ति को मिला पुन: आकार, पिछले हफ्ते की गई थी खंडित

मंदिर में जब प्रतिमा को तोड़ा गया तब हालात देखकर ये अंदाजा लगाया गया था कि उपद्रवी मंदिर में छिपे खजाने की तलाश में आए थे और उन्होंने कम सुरक्षा व्यवस्था देखते हुए मूर्ति तोड़ डाली।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

FIR में अर्णब पर लगाए आरोप साबित नहीं कर पाई मुंबई पुलिस: SC ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आपराधिक कानून, उत्पीड़न का औजार नहीं बनना चाहिए, जमानत मानवता की अभिव्यक्ति है।

संघियों-मनुवादियों को खत्म करने के लिए लश्कर-तालिबान से मदद की ग्राफिटी: मेंगलुरु की सड़कों पर खुलेआम चेतावनी

26/11 हमलों की बरसी के मौके पर मेंगलुरु की दीवारों पर भयावह बातें लिखी (ग्राफिटी) हुई थीं। जिसमें चेतावनी दी गई थी कि ‘संघी और मनुवादियों’ को ख़त्म करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद ली जा सकती है।

हिन्दू युवती के पिता का आरोप मुश्ताक मलिक के परिवार ने किया अपहरण: पुलिस ने नकारा ‘लव जिहाद’ एंगल, जाँच जारी

युवती के घर वालों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने फैज़ल, इरशाद, सोनू, हिना, लाइबा और मुश्ताक मलिक पर अपहरण के दौरान मदद करने के लिए मामला दर्ज कर लिया है।

मसूद की फौज दर्रे में घुसती और दो टुकड़े कर डालते मराठा: शिवा नाई, बाजी और शिवाजी के विशालगढ़ पहुँचने की गाथा

"मेरे बहादुरों। हमारे राजा जब तक गढ़ न पहुँच जाए, तब तक एक भी शत्रु इस दर्रे से होकर नहीं गुजरना चाहिए। मराठी आन की लाज हमारे हाथों में है। हर हर महादेव!"

टोटल 7 हैं भाई, पर भौकाल ऐसा जैसे यही IIMC हों: क्यों हो रहा दीपक चौरसिया का विरोध?

IIMC में दीपक चौरसिया को बुलाए जाने का कुछ नए छात्र विरोध कर रहे हैं। कुछ पुराने छात्र इनके समर्थन में आगे आए हैं।

ये कौन से किसान हैं जो कह रहे ‘इंदिरा को ठोका, मोदी को भी ठोक देंगे’, मिले खालिस्तानी समर्थन के प्रमाण

मीटिंग 3 दिसंबर को तय की गई है और हम तब तक यहीं पर रहने वाले हैं। अगर उस मीटिंग में कुछ हल नहीं निकला तो बैरिकेड तो क्या हम तो इनको (शासन प्रशासन) ऐसे ही मिटा देंगे।

BMC ने बदले की भावना से तोड़ा कंगना रनौत का ऑफिस, नुकसान की करे भरपाई: बॉम्बे HC ने लगाई फटकार

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बीएमसी को कंगना रनौत के ऑफिस में की गई तोड़फोड़ के लिए हर्जाना देना होगा। हाईकोर्ट ने कंगना के ऑफिस के नुकसान का आकलन करने के आदेश भी दिए हैं।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,432FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe