Homeराजनीति'राम मंदिर जाने की क्या आवश्यकता है?': पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ रही लालू यादव...

‘राम मंदिर जाने की क्या आवश्यकता है?’: पाटलिपुत्र से चुनाव लड़ रही लालू यादव की बेटी के विवादित बोल, कहा – प्राण प्रतिष्ठा में केवल पूंजीपतियों को बुलाया

बता दें कि हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर में स्थित है। बता दें कि इससे पहले वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जेल भेजने की भी बात कर चुकी हैं।

राजद सुप्रीमो लालू यादव ने अपनी सबसे बड़ी बेटी मीसा भारती को बिहार की पाटलिपुत्र लोकसभा सीट से 2024 के चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। उनका सामना भाजपा के रामकृपाल यादव से है, जो उन्हें 2014 और 2019 में भी हरा चुके हैं। पटना नगर निगम के डिप्टी मेयर रहे रामकृपाल यादव पटना लोकसभा क्षेत्र से भी 3 बार सांसद रहे हैं। अब चुनाव प्रचार के दौरान मीसा भारती ने अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर को लेकर विवादित बयान दे दिया है।

मीसा भारती ने कहा, “राम मंदिर जाने की क्या आवश्यकता है, हमारे सोनपुर में हरिहर बाबा का मंदिर है। वहाँ से मेरा पूरा परिवार पूजा कर के और आशीर्वाद लेकर निकला है। अभी चुनाव चल रहा है। मैं मंदिर भी जाऊँगी, राम मंदिर भी इसी देश में है। राम तो हमारे भी राम है, वो केवल मोदी जी के राम नहीं हैं।” बता दें कि हरिहरनाथ मंदिर सोनपुर में स्थित है। बता दें कि इससे पहले वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जेल भेजने की भी बात कर चुकी हैं।

मीसा भारती वही पुराना प्रोपेगंडा दोहराया कि चारों शंकराचार्यों को राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में नहीं बुलाया गया था, सारे पूंजीपतियों को वहाँ बुलाया गया था। जबकि सच्चाई ये है कि श्रृंगेरी एवं कांची मठ के शंकराचार्यों ने राम मंदिर उद्घाटन समारोह का स्वागत किया था, कार्यक्रम में कई गरीब आम लोग, खासकर कारसेवक भी आए थे। उन्होंने पाटलिपुत्र निर्वाचन क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर, गाँधी आश्रम और लाइब्रेरी बनवाने का भी वादा किया।

याद दिलाते चलें कि अबकी रामनवमी के अवसर पर बुधवार (17 अप्रैल, 2024) को रामलला का ‘सूर्य तिलक’ भी किया जाना है, जिसके लिए IIT रुड़की के विशेषज्ञों ने तकनीक तैयार की है। जहाँ तक पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र का सवाल है, ये वही सीट है जहाँ से लालू यादव को 2009 में अपने ही पुराने साथी रंजन यादव के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। वहीं अगले ही चुनाव में रंजन यादव तीसरे स्थान पर घिसक लिए। दोनों बार उन्होंने जदयू से चुनाव लड़ा था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -