शोपियाँ मुठभेड़ में मारे गए 2 आतंकी: ‘क्या इसके लिए भी सैनिकों को EC की अनुमति लेनी होगी?’

लश्कर-ए तैयबा के ये दोनों ही आतंकी वॉन्टेड की सूची में थे। दोनों ही आतंकियों की पहचान बशारत अहमद और तारिक अहमद के रूप में हुई है। बशारत अहमद निकलूरा और तारिक खारीपोरा का रहने वाला है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में एक रैली के दौरान पुछा कि क्या अब हमारे जवान आतंकियों को मार गिराने से पहले चुनाव आयोग से परमिशन लेने जाएँगे? चुनाव के अंतिम चरण के लिए कुशीनगर में विशाल जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कुछ लोगों को इस बात की चिंता सता रही है कि आज जब मतदान चल रहा है, तो सैनिकों ने आतंकियों को क्यों मारा? पीएम मोदी आज रविवार (मई 12, 2019) को जम्मू कश्मीर के शोपियाँ में आतंकियों व जवानों के बीच हुई मुठभेड़ को लेकर बोल रहे थे।

बता दें कि आज जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ ज़िले में मुठभेड़ के दौरान दो आतंकियों को ढेर कर दिया गया है। सेना की तरफ से इसकी पुष्टि की गई। एक सैन्य अधिकारी ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि सुरक्षा बलों को दक्षिण कश्मीर के शोपियाँ ज़िले के हिन्दसीतापुर इलाके में आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली थी, जिसके बाद इलाक़े की घेराबंदी की गई और तलाशी अभियान चलाया गया। मारे गए दोनों आतंकी कई हमलों में शामिल रहे हैं। लश्कर-ए तैयबा के ये दोनों ही आतंकी वॉन्टेड की सूची में थे। दोनों ही आतंकियों की पहचान बशारत अहमद और तारिक अहमद के रूप में हुई है। बशारत अहमद निकलूरा और तारिक खारीपोरा का रहने वाला है।

तारिक के बारे में कहा जा रहा है कि वह पहले एसपीओ था और बाद में सर्विस राइफल के साथ फ़रार हो गया था। उसके बाद उसके आतंकी बनने की ख़बर आई थी। इस मुठभेड़ के बाद क्षेत्र में मोबाइल सेवा ठप्प कर दी गई है। वहीं आज छठे चरण का मतदान भी चल रहा है, जिसमें दिल्ली की सातों सीटें शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों घटनाओं को जोड़ते हुए कहा, “वो बम-बंदूक लेकर सामने खड़ा है, क्या वहाँ मेरा जवान चुनाव आयोग की परमिशन लेने जाए कि मैं इसके गोली मारूँ या ना मारूँ? कश्मीर में जब से हम आए हैं, हर दूसरे-तीसरे दिन सफ़ाई होती रहती है। ये सफाई अभियान मेरा काम है भाई।

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

बौद्ध धर्म के लिए पवित्र स्थल का दर्जा रखने वाले कुशीनगर की बात करें तो इस लोकसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय लड़ाई हो रही है। यहाँ भाजपा ने पूर्व विधायक विजय दूबे को प्रत्याशी बनाया है। वहीं सपा-बसपा गठबंधन ने नथुनी कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया है, जबकि कॉन्ग्रेस की तरफ से आरपीएन सिंह मैदान में हैं। खड़ा से विधायक रहे दूबे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क़रीबी माने जाते हैं और वह उनके संगठन हिन्दू युवा वाहिनी में भी सक्रिय रहे हैं। मज़े की बात यह है कि महागठबंधन प्रत्याशी कुशवाहा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बैकग्राउंड से आते हैं और संघ में सक्रिय रहे हैं।

वहीं कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी भी इस सीट पर ख़ासे मज़बूत हैं। आरपीएन सिंह यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे हैं और 2009 में उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की थी। हालाँकि, 2004 में भाजपा के राजेश पांडेय ने उन्हें हरा दिया था। आरपीएन सिंह के पिता भी सांसद रहे हैं। इसी कारण कुशीनगर में बुआ-भतीजा के साथ-साथ कॉन्ग्रेस को भी पीएम ने ख़ासे निशाने पर रखा।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

नयनतारा सहगल जैसे लोग केवल व्यक्ति नहीं हैं, प्रतीक हैं- उस मानव-प्रवृत्ति का, उस ध्यानाकर्षण की लिप्सा और लोलुपता का, जिसके चलते इंसान अपने बूढ़े हो जाने, और अपने विचारों का समय निकल जाने के चलते हाशिए पर पहुँच जाने, अप्रासंगिक हो जाने को स्वीकार नहीं कर पाता।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

अरविन्द केजरीवाल

लड़की पर पब्लिकली हस्तमैथुन कर फरार हुआ आदमी: मुफ्त मेट्रो से सुरक्षा नहीं मिलती

आप शायद 'सुरक्षा' के नाम पर महिलाओं को मेट्रो में मुफ्त यात्रा करा सकते हैं, लेकिन आप यह कैसे सुनिश्चित करेंगे कि महिलाएँ वहाँ सुरक्षित हैं?
आसिया अंद्राबी

‘मैं हवाला के पैसे लेकर J&K में बवाल करवाती थी, उन्हीं पैसों से बेटे को 8 साल से मलेशिया में पढ़ा रही हूँ’

जम्मू-कश्मीर की अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी सहित गिरफ्तार अलगाववादी नेताओं ने 2017 के जम्मू-कश्मीर आतंकी फंडिंग मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। आसिया अंद्राबी ने कबूल किया कि वो विदेशी स्रोतों से फंड लेती थी और इसके एवज में...
हिन्दू धर्म और प्रतीकों का अपमान फैशन है क्योंकि कोई कुछ कहता नहीं

Netflix पर आई है ‘लैला’, निशाने पर हैं हिन्दू जिन्हें दिखाया गया है तालिबान की तरह

वो पीढ़ी जिसने जब से होश संभाला है, या राजनैतिक रूप से जागरुक हुए हैं, उन्होंने भारत का इतिहास भी ढंग से नहीं पढ़ा, उनके लिए ऐसे सीरिज़ ही अंतिम सत्य हो जाते हैं। उनके लिए यह विश्वास करना आसान हो जाता है कि अगर इस्लामी आतंक है तो हिन्दू टेरर क्यों नहीं हो सकता।
दि प्रिंट और दीपक कल्लाल

सेक्स ही सेक्स… भाई साहब आप देखते किधर हैं, दि प्रिंट का सेक्सी आर्टिकल इधर है

बढ़ते कम्पटीशन के दौर में सर्वाइवल और नाम का भार ढोते इन पोर्टलों के पास नग्नता और वैचारिक नकारात्मकता के अलावा फर्जीवाड़ा और सेक्स ही बचता है जिसे हर तरह की जनता पढ़ती है। लल्लनपॉट यूनिवर्सिटी से समाज शास्त्र में पीएचडी करने वाले ही ऐसा लिख सकते हैं।
जय भीम-जय मीम

जय भीम जय मीम की कहानी 72 साल पुरानी… धोखा, विश्वासघात और पश्चाताप के सिवा कुछ भी नहीं

संसद में ‘जय भीम जय मीम’ का नारा लगा कर ओवैसी ने कोई इतिहास नहीं रचा है। जिस जोगेंद्र नाथ मंडल ने इस तर्ज पर इतिहास रचा था, खुद उनका और उनके प्रयास का हश्र क्या हुआ यह जानना-समझना जरूरी है। जो दलित वोट-बैंक तब पाकिस्तान के हो गए थे, वो आज क्या और कैसे हैं, इस राजनीति को समझने की जरूरत है।
हार्ड कौर, मोहन भागवत, योगी आदित्यनाथ

सस्ती लोकप्रियता के लिए ब्रिटिश गायिका ने मोहन भागवत को कहा ‘आतंकी’, CM योगी को बताया ‘Rape-Man’

"भारत में हुए सारे आतंकी हमलों के लिए मोहन भागवत ही ज़िम्मेदार हैं, चाहे वो 26/11 का मुंबई हमला हो या फिर पुलवामा हमला। इतिहास में महात्मा बुद्ध और महावीर ने ब्राह्मणवादी जातिवाद के ख़िलाफ़ लड़ाइयाँ लड़ी थीं। तुम एक राष्ट्रवादी नहीं हो, एक रेसिस्ट और हत्यारे हो।"
नितीश कुमार

अप्रिय नितीश कुमार, बच्चों का रक्त अपने चेहरे पर मल कर 103 दिन तक घूमिए

हॉस्पिटल का नाम, बीमारी का नाम, जगह का नाम, किसकी गलती है आदि बेकार की बातें हैं, क्योंकि सौ से ज़्यादा बच्चे मर चुके हैं। इतने बच्चे मर कैसे जाते हैं? क्योंकि भारत में जान की क़ीमत नहीं है। हमने कभी किसी सरकारी कर्मचारी या नेता को इन कारणों से हत्या का मुकदमा झेलते नहीं देखा।
औली-उत्तराखंड

200 करोड़ रुपया गुप्ता का, ब्याह गुप्ता के लौंडे का और आपको पड़ी है बदरंग बुग्याळ और पहाड़ों की!

दो सौ से दो हजार तक साल लगते हैं उस परत को बनने में जिस भूरी और बेहद उपजाऊ मिट्टी के ऊपर जन्म लेती है 10 से 12 इंच मोती मखमली घास यानी बुग्याळ! और मात्र 200 करोड़ रुपए लगते हैं इन सभी तथ्यों को नकारकर अपने उपभोक्तावाद के आगे नतमस्तक होकर पूँजीपतियों के समक्ष समर्पण करने में।
पाकिस्तान

ईश-निंदा में फ़ँसे Pak हिन्दू डॉक्टर लटकाए जा सकते हैं सूली पर… लेकिन ‘इनटॉलेरेंस’ भारत में है

जिन्हें अपने देश भारत के कानून इतने दमनकारी लगते हैं कि लैला जैसी डिस्टोपिया बनाकर वह मुसलमानों की प्रताड़ना दिखाना चाहते हैं, उन्हें केवल एक हफ़्ते पाकिस्तान में बिता कर आना चाहिए। आपके हिन्दूफ़ोबिक यूटोपिया जितना तो अच्छा नहीं है, लेकिन वैसे हिंदुस्तान का लोकतंत्र काफी अच्छा है...
पत्रकारिता के नाम पर संवेदनहीनता और बेहूदगी आम हो चुकी है

जब रिपोर्टर मरे बच्चे की माँ से भी ज़्यादा परेशान दिखने लगें…

नर्स एक बीमार बच्चे के बेड के पास खड़ी होकर कुछ निर्देश दे रही है और हमारे पत्रकार माइक लेकर पिले पड़े हैं! ये इम्पैक्ट किसके लिए क्रिएट हो रहा है? क्या ये मनोरंजन है कुछ लोगों के लिए जिनके लिए आप पैकेज तैयार करते हैं? फिर आपने क्या योगदान दिया इस मुद्दे को लेकर बतौर पत्रकार?

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

50,880फैंसलाइक करें
8,839फॉलोवर्सफॉलो करें
69,851सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: