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लैपटॉप में ऐसा क्या है जिसे छुपाना चाहता है AltNews वाला जुबैर: बरामदगी के लिए बेंगलुरु ले जाएगी दिल्ली पुलिस, फोन कर चुका है फॉर्मेट

मोहम्मद जुबैर को 27 जून 2022 को दिल्ली पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने और विभिन्न समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153 और 295 के तहत कार्रवाई की गई है। उसे वहाँ से पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ से उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

इस्लामिक कट्टरपंथ को हवा देने वाले ऑल्ट न्यूज (Alt News) के को-फाउंडर मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) को गिरफ्तार करने के बाद अब दिल्ली पुलिस (Delhi Police) उसके लैपटॉप की तलाश में जुट गई है। इसके लिए पुलिस उसे बेंगलुरू ले जाएगी, ताकि उसके खिलाफ सबूतों को इकट्ठा किया जा सके।

रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का कहना है कि जुबैर किसी एक समुदाय को नाराज करने के लिए धर्म का इस्तेमाल कर रहा था। वह एक समुदाय को दूसरे से लड़ाकर लोकप्रियता हासिल करना चाहता था। वह पूछताछ में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सहयोग भी नहीं कर रहा है। जुबैर ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में केवल गुमराह करने वाले जवाब ही दिए हैं।

जुबैर को जब इस बात का आभास हुआ कि उसकी गिरफ्तारी हो सकती है तो उसने अपने फोन को फॉर्मेट कर दिया था। पुलिस के मुताबिक, ये उसकी अरेस्ट की बड़ी वजह बनी। पुलिस को उम्मीद है कि उसके लैपटॉप से कई सारी संवेदनशील जानकारियाँ हासिल हो सकती हैं। बरामदगी के बाद लैपटॉप को फोरेंसिक जाँच के लिए लैब में भेजा जाएगा।

पुलिस इस बात से और सतर्क हो गई है कि आखिर लैपटॉप में ऐसी क्या जानकारियाँ हैं, जिन्हें जुबैर पुलिस से छिपाना चाहता है और वह लैपटॉप उसे देना नहीं चाहता है। पुलिस को लैपटॉप से 50 लाख रुपए के लेनदेन सहित अन्य लेनदेन और उसके संपर्कों के बारे में जानकारियाँ मिल सकती हैं।

अपनी वकील वृंदा ग्रोवर के जरिए जुबैर ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया है कि उसे इसलिए परेशान किया जा रहा है, क्योंकि वह सत्ता में बैठे कुछ लोगों को चुनौती दे रहा था। बहरहाल पुलिस आज (बुधवार) को जुबैर को बेंगलुरू ले जा सकती है। हालाँकि, वहाँ भी उसे अपने वकील से मिलने की इजाजत होगी।

वृंदा ग्रोवर की दलील है कि जुबैर की जिस ट्वीट के आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया है, वह ‘किसी से ना कहना (1983)’ फिल्म का है। हालाँकि, कोर्ट इस दलील को खारिज कर चुका है और कहा कि यह तर्क आरोपित के लिए मददगार नहीं है।

वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपने तर्क में कहा था, “इस तरह के ट्वीट को रीट्वीट किया जा रहा था और ऐसा लग रहा था कि वह उसकी ब्रिगेड बन गई है, जो सांप्रदायिक सद्भाव और सार्वजनिक शांति को बिगाड़ने के लिए किसी को बदनाम करने के काम में लिप्त है।”

उधर दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए लोक अभियोजक (PP) ने तर्क दिया था कि मशहूर होने के लिए हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आजकल चलन बन गया है। उन्होंने यह कहा कि जुबैर के तीन-चार मीडिया पोस्ट संदिग्ध थे।

4 दिन की पुलिस रिमांड पर है जुबैर

गौरतलब है कि मोहम्मद जुबैर को 27 जून 2022 को दिल्ली पुलिस ने धार्मिक भावनाओं को भड़काने और विभिन्न समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस पर IPC (भारतीय दंड संहिता) की धारा-153 और 295 के तहत कार्रवाई की गई है। उसे वहाँ से पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया था, जहाँ से उसे 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

रिमांड का आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा था कि जुबैर का व्यवहार असहयोगी वाला रहा है और उसे अपने मोबाइल फोन एवं लैपटॉप की बरामदगी के लिए बेंगलुरु ले जाना होगा। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया था कि जुबैर को दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 41 A के तहत नोटिस नहीं दिया गया था।

जुबैर के एक पोस्ट का जिक्र करते हुए पीपी ने कहा था, “महाभारत के चरित्र संजय को लैपटॉप का उपयोग करते हुए दिखाया गया है। मोबाइल फोन से सभी एप्लिकेशन हटा दिए गए हैं। वह एक खाली फोन लेकर आया था। उसका जानबूझकर किया गया कृत्य रिकॉर्ड में है, जो धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। इसलिए पुलिस रिमांड की जरूरत है।”

क्या है पूरा मामला

बता दें कि जुबैर ने ‘हनीमून होटल और हनुमान होटल’ से संबंधित एक ट्वीट किया था। जिसको लेकर एक सोशल मीडिया यूजर ने पुलिस से शिकायत की थी और कहा था कि इससे उसकी धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। इसके आधार पर ही पुलिस ने मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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