Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीय'किसी 'मुस्लिम प्रभाकरण' के जन्म के लिए कोई गुंजाईश नहीं रहनी चाहिए'

‘किसी ‘मुस्लिम प्रभाकरण’ के जन्म के लिए कोई गुंजाईश नहीं रहनी चाहिए’

धमाकों में सैंकड़ों लोगों के मारे जाने के बाद वहाँ कड़ी कार्रवाई करते हुए इस्लामिक कट्टरवाद को मिटाने के लिए सुरक्षा बलों व जाँच एजेंसियों को खुली छूट दी गई है।

श्री लंका के राष्ट्रपति मत्रिपाला सिरिसेना ने बड़ा बयान देते हुए देशवासियों से अपील की है। राष्ट्रपति ने अपने देश में नागरिकों से निवेदन करते हुए कहा कि किसी “मुस्लिम प्रभाकरण” के जन्म के लिए कोई गुंजाईश नहीं छोडनी चाहिए। श्री लंका में इस वर्ष ईस्टर के दौरान हुए धमाकों में सैंकड़ों लोगों के मारे जाने के बाद द्वीपीय राष्ट्र ने कड़ी कार्रवाई करते हुए इस्लामिक कट्टरवाद को मिटाने के लिए सुरक्षा बलों व जाँच एजेंसियों को खुली छूट दे रखी है। इस मामले में सरकार को नेता प्रतिपक्ष व श्री लंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे का भी साथ मिला है।

राष्ट्रपति सिरिसेना ने कहा, “आज हमारे देश में नेतागण व धार्मिक शख्सियतें विभाजित हैं। मैं जनता से निवेदन करना चाहूँगा कि किसी मुस्लिम प्रभाकरण के जन्म के लिए कोई गुंजाईश नहीं रहनी चाहिए, ऐसा सुनिश्चित करें। अगर हम विभाजित रहते हैं और कुछ नहीं करते हैं तो पूरा देश हार जाएगा। अधिकतर नेता देश की जगह इस वर्ष होने वाले चुनावों पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं। यह विभाजन हमें आगे बढ़ने से रोक रहा है। मैं तमिल नागरिकों द्वारा झेली जाने वाली परेशानियों से परिचित हूँ और उन्हें हल करने के लिए प्रयास करूँगा। हमें कट्टरवाद को हावी नहीं होने देना है।

वेलुपिल्लई प्रभाकरण श्री लंका में मुख्य रूप से अस्सी व नब्बे के दशक व इक्कीसवीं सदी के पहले दशक में सक्रिय तमिल विद्रोही संगठन लिट्टे का प्रमुख था। एक बड़े ऑपरेशन में श्री लंका की सेना से उसे मार गिराया था। तमिल अधिकारों को लेकर लड़ाई करने का दावा करने वाला प्रभाकरण श्री लंका में कई हत्याओं व खूनी संघर्ष के लिए ज़िम्मेदार था।

बता दें कि अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी श्री लंका के दौरे पर हैं, जहाँ उन्होंने ईस्टर धमाकों के मृतकों को श्रद्धांजलि दी। पीएम मोदी इन धमाकों के बाद श्री लंका का दौरा करने वाले पहले राष्ट्रप्रमुख हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि श्री लंका फिर से उठ खड़ा होगा। पीएम मोदी ने वहाँ भारतीय मूल के लोगों को भी संबोधित किया। उन्होंने श्री लंका के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने अलग-अलग मुलाक़ात की और कोलम्बो में अपने सम्मान में आयोजित एक भोज में हिस्सा लिया।

श्री लंका में हुए धमाकों के बाद से वहाँ कानून व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी और इस्लामिक कट्टरपंथियों की धर-पकड़ के लिए एक बड़ा अभियान चलाया गया था, जो अब भी जारी है। कट्टरवाद फैलाने वाले कई मौलवियों को देश से निकाल बाहर किया गया व कई आतंकियों को एनकाउंटर में मार गिराया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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