Wednesday, April 14, 2021
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दौर-ए-खास और दौर-अल-राद: पकड़े गए जैश के आतंकियों ने खोली बालाकोट की सच्चाई

बालाकोट में प्रशिक्षण देने के दौरान कई तरह के कोर्स भी चलाए जाते हैं। तीन माह के अग्रिम युद्ध कोर्स को दौर-ए-खास कहा जाता है और अग्रवर्ती हथियारों के प्रशिक्षण कोर्स को दौर-अल-राद कहा जाता है।

साल 2014-17 के बीच पकड़े गए जैश-ए-मुहम्मद के आतंकियों में से 4 आतंकियों को प्रशिक्षण बालाकोट के उसी कैंप में मिला है जहाँ पर वायु सेना द्वारा हाल ही में हमला किया गया। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट में बताया गया है कि जैश के यह चारों आतंकी पाकिस्तान से हैं, जिन्होंने पूछताछ में बालाकोट में प्रशिक्षित हुए आतंकियों से जुड़ी कुछ खास बातों का खुलासा किया है।

अधिकारियों के अनुसार, वकास मंसूर खैबर पख्तूनख्वा का निवासी है। उसे 2014-15 में सुरक्षा बलों द्वारा गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान मंसूर ने बताया कि उसे 100 युवकों के साथ प्रशिक्षित किया गया था। साल 2007 से मंसूर घाटी में सक्रिय था, यहाँ उसके साथ के 40 और आतंकी थे जबकि 60 को अफगान में युद्ध छेड़ने के लिए भेज दिया गया था।

अधिकारियों के अनुसार घाटी में हुए दो बड़े हमलों में मंसूर का नाम आया था। साल 2009 के मार्च में वह आतंकियों के उस समूह का हिस्सा था, जिसने कुपवाड़ा के पास लोलब में सेना के जवानों पर हमला किया था। इसके अलावा वह जून 2009 में एक ऐसे हमले में भी शामिल था जिसमें छह जवानों की मौत की हुई थी।

इन हमलों के बाद वो 2010 में पाकिस्तान लौट गया था और लश्कर से जुड़ गया और लश्कर-ए-तैयबा के केन्द्र में ट्रेनिंग लेने लगा था।

अधिकारियों की मानें तो जैश के आतंकियों से पूछताछ में पता चला कि प्रशिक्षण देने के दौरान उनके लिए कई तरह के प्रशिक्षण कोर्स भी चलाए जाते हैं। तीन माह के अग्रिम युद्ध कोर्स को दौर-ए-खास कहा जाता है और अग्रवर्ती हथियारों के प्रशिक्षण कोर्स को दौर-अल-राद कहा जाता है।

साल 2016 में पकड़े गए जैश आतंकी जिसकी पहचान अब्दुल रहमान मुगल अलियास राजा के नाम से की गई, वह बताता है कि कश्मीर में भेजे हर आतंकी का एक कोड नाम होता है। अधिकारियों के अनुसार मुगल का नाम रोमियो था और उसका काम कश्मीर में प्रशिक्षण केन्द्रों को सेट करना था।

मुगल से हुई पूछताछ में उसने बताया कि फिदायिन बनने से पहले किसी को भी अपनी इच्छा जाहिर करनी होती है। साथ ही बालाकोट स्थित कैंप के कमांडर को लिखित रूप में भी देना होता है कि वह ऐसा करने के लिए इच्छुक है।

अधिकारियों के अनुसार, 2014 में कश्मीर में गिरफ्तार किए गए एक अन्य जैश आतंकवादी नासिर मोहम्मद अवान ने पूछताछ के दौरान कहा था कि बालाकोट शिविर में 80 से अधिक प्रशिक्षक थे। अधिकारियों ने बताया कि नासिर 2003 में रेडियो कश्मीर पर हमले में शामिल था, जिसमें सीआरपीएफ के एक जवान और बीएसएफ के एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

इन सबके अलावा अधिकारियों ने पाकिस्तान के सियालकोट के निवासी मोहम्मद साजिद गुज्जर से पूछताछ का भी हवाला दिया, जिसे 2015 में गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने कहा कि गुर्जर 3 नवंबर 2015 को तंगधार के एक आर्मी कैंप पर हुए हमले में शामिल था, जिसमें उसके साथ मौजूद तीन आतंकवादी मारे गए थे, जबकि वह भागने में सफल रहा था।

अधिकारियों ने कहा कि हमले के दौरान मारे गए तीनों की पहचान गुर्जर ने बाद में रिजवान, हुसैन पठान और मुइवा के रूप में की थी। अधिकारियों की मानें तो वे सभी पाकिस्तानी नागरिक थे, जिन्होंने बालाकोट कैंप में गुर्जर के साथ प्रशिक्षण लिया था और एक साथ घाटी में घुसपैठ की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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