Wednesday, June 19, 2024
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चीन और रूस आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत के साथ, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Pak बिलकुल अकेला

"आतंकी गतिविधियों का जो भी समर्थन करता है या उसे बढ़ावा देता है, ऐसी संस्थाओं और देशों को आतंकवाद के ख़िलाफ़ वर्तमान के अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह माना जाए।"

चीन के वू-चेन में भारत, रूस और चीन के विदेश मंत्रियों की हुई बैठक में आतंकवाद पर लगाम लगाने को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बड़ी जीत हुई है। तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जो घोषणापत्र जारी किया गया, उसमें आतंकवाद और आतंकी ठिकाने नष्ट करने का स्पष्ट संदेश दिया गया।

तीनों देश के मंत्रियों ने आतंकवाद के सभी प्रारूपों की कड़ी निंदा की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व में आतंकवाद विरोधी ‘ग्लोबल काउंटर टेररिज्म कोऑपरेशन’ को मजबूत करने का निवेदन किया। उन्होंने उचित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों पर अमल करने की भी अपील की। तीनों नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अंतररष्ट्रीय क़ानून के तहत सभी देशों की स्वतन्त्रता और सम्प्रभुपता की रक्षा करते हुए आतंकवाद के ख़िलाफ़ अविलम्ब एक समग्र सहमति विकसित करने की भी बात कही। वे इस बात पर सहमत हुए कि राष्ट्र और उनकी योग्य एजेंसियाँ राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के ख़िलाफ लड़ाई में एक अहम किरदार निभाती है। तीनों मंत्रियों ने इस बात पर भी बल दिया कि आतंकवाद का इस्तेमाल राजनीतिक व भू-राजनीतिक (Geopolitical) हितों को साधने के लिए नहीं होना चाहिए।

आतंकी गतिविधियों का जो भी समर्थन करता है या उसे बढ़ावा देता है, ऐसी संस्थाओं और देशों को आतंकवाद के ख़िलाफ़ वर्तमान के अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जवाबदेह माना जाए। इन कानूनों में यूएन ग्लोबल काउंटर-टेररिजम, यूएन सिक्यॉरिटी काउंसिल रेजोल्यूशन और FATF स्टैंडर्ड के अलावा ऐसी अंतरराष्ट्रीय संधियों को भी शामिल करना चाहिए, जिसमें प्रत्यर्पण और सज़ा का भी प्रावधान है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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