Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयऑस्ट्रेलिया में रहने वाले 111 साल के बुजुर्ग ने खोला अपनी लंबी उम्र का...

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले 111 साल के बुजुर्ग ने खोला अपनी लंबी उम्र का राज, तोड़ा जैक लॉकेट का रिकॉर्ड

डेक्सटर अभी 111 वर्ष और 124 दिन के हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोशन (एबीसी) को दिए इंटरव्यू में बताया कि पोल्ट्री फार्म में मुर्गे का दिमाग खाने की वजह से उनकी उम्र लंबी है। इस समय वह ग्रामीण क्वींसलैंड के रोमा कस्बे में स्थित एक नर्सिंग होम में रहते हैं।

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले 111 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति डेक्सटर क्रूगर ने दुनिया के सामने अपने लंबे जीवन का रहस्य बताया है। रिटायर्ड पशुपालक ने दावा किया है कि वह मुर्गे के दिमाग (Chicken Brain) को खाने की वजह से इतने लंबे समय से जीवित हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सोमवार (17 मई 2021) को प्रथम विश्व युद्ध के वेटरन जैक लॉकेट (Jack Lockett) के सबसे अधिक उम्र तक जीने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। जैक लॉकेट का साल 2002 में निधन हो गया था, वह 111 साल और 123 दिन के थे।

डेक्सटर अभी 111 वर्ष और 124 दिन के हैं। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोशन (एबीसी) को दिए इंटरव्यू में बताया कि पोल्ट्री फार्म में मुर्गे का दिमाग खाने की वजह से उनकी उम्र लंबी है। इस समय वह ग्रामीण क्वींसलैंड के रोमा कस्बे में स्थित एक नर्सिंग होम में रहते हैं।

क्रूगर ने कहा, ”मुर्गे का दिमाम। आप जानते हैं, इनका एक सिर होता है और उसके भीतर एक दिमाग होता है। वो छोटी सी चीज खाने में बहुत ही टेस्टी लगती है।” वहीं, क्रूगर के 74 वर्षीय बेटे ग्रेग ने अपने लंबे जीवन के लिए अपने पिता की सरल जीवनशैली को क्रेडिट दिया।

नर्सिंग होम के मैनेजर मेलानी कैल्वर्ट ने बताया कि क्रूगर यहाँ रहने वाले लोगों में सबसे ज्यादा तेज दिमाग वाले व्यक्ति हैं। वह, फिलहाल अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं। कैल्वर्ट ने बताया कि 111 साल का होने के बावजूद उनकी याददाश्त काफी तेज है।

बता दें कि ‘ऑस्ट्रेलियन बुक रिकॉर्ड्स’ के फाउंडर जॉन टेलर पुष्टि की कि क्रूगर अब तक के सबसे बुजुर्ग ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति बन गए हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया की सबसे बुजुर्ग महिला क्रिस्टीनी कुक के नाम पर थी। इनका साल 2002 में 114 साल और 148 दिन की उम्र की निधन हो गया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कॉकरोच जनता पार्टी: मीम्स की आड़ में छिपा ‘रेजीम चेंज’ का इंटरनेशनल ब्लूप्रिंट?

Rhino Party से शुरू हुआ और 'कॉकरोच' तक पहुँचा... राजनीति अब मीम्स के भरोसे है? मई 2026 में अचानक उभरी 'कॉकरोच जनता पार्टी' के पीछे छिपे उन 3 सीक्रेट फॉर्मूलों को समझिए जो किसी भी सरकार को घुटनों पर लाने का दावा करते हैं। क्या स्र्द्जा पोपोविच की 'रेजिम चेंज' हैंडबुक भारत में अपनाई जा रही है?

आधार नहीं, वोटर ID नहीं, पासपोर्ट भी अंतिम प्रमाण नहीं: फिर भारत में नागरिकता कैसे साबित होती है? समझें पूरी बहस

जानिए क्यों पासपोर्ट, आधार और वोटर ID नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जाते और नागरिकता ऐक्ट 1955 क्या कहता है।
- विज्ञापन -