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बांग्लादेश: मस्जिद में 2 दर्जन लोगों को रमजान की नमाज अदा कराने वाला मौलवी कोरोना पॉजिटिव, मचा हड़कंप

बांग्लादेश में जारी प्रतिबंधों के बीच मगुरा जिले के अडडांगा गाँव की एक मस्जिद में करीब 24 लोगों को एक मौलवी द्वारा रमजान की नमाज अदा कराई गई। इसके बाद जब मौलवी का कोरोना टेस्ट कराया गया तो पता चला कि मौलवी को कोरोना पॉजिटिव है। इसकी जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।

चीन के वुहान शहर से निकलकर विश्वभर में फैले कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए ज्यादातर देश लॉकडाउन के साथ तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं। इस बीच ज्यादातर देशों में किसी भी प्रकार के आयोजनों पर रोक है, इन्ही में से एक देश बांग्लादेश है, लेकिन इसके बाद भी बांग्लादेश की एक मस्जिद में रमजान के दौरान नमाज अदा की गई। अब मस्जिद में करीब 24 लोगों को नमाज अदा कराने वाले मौलवी को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है।

जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश में जारी प्रतिबंधों के बीच मगुरा जिले के अडडांगा गाँव की एक मस्जिद में करीब 24 लोगों को एक मौलवी द्वारा रमजान की नमाज अदा कराई गई। इसके बाद जब मौलवी का कोरोना टेस्ट कराया गया तो पता चला कि मौलवी को कोरोना पॉजिटिव है। इसकी जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।

इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया है। वहीं स्थानीय प्रशासन स्थास्थ्य विभाग की टीम के साथ ऐसे लोगों की सूची बनाने में जुट गया है, जिन्होंने मस्जिद में हुई नमाज में हिस्सा लिया था।

इससे पहले 6 अप्रैल को बांग्लादेश के धार्मिक मामलों के मंत्रालय द्वारा देश में सभी प्रकार के धार्मिक आयोजनों को प्रतिबंधित कर दिया गया था। आदेश के मुताबिक मस्जिदों में शुक्रवार को नमाज में अधिकतम 10 लोगों के ही भाग लेने की अनुमति दी गई थी, लेकिन इन आदेशों की अनदेखी करते हुए मौलवी ने मस्जिद के अंदर 24 लोगों को रमजान की नमाज अदा कराई।

गौरतलब है कि इस्लामिक देश बांग्लादेश शुरूआत में 26 मार्च को 10 दिनों की अवधि के लिए देशव्यापी लॉकडाउन घोषित किया था, लेकिन इसके बाद भी देश में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए सरकार ने मजबूरन इसे बढ़ाकर 5 मई तक कर दिया है।

आपको बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक 27 अप्रैल तक बांग्लादेश में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या 145, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 5,913 हो गई है।

गौरतलब है कि मुस्लिम मौलवियों के दवाब में आकर 18 अप्रैल को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी ने लॉकडाउन में डील देते हुए रमजान के महीने में मस्जिदों के अंदर नमाज पढ़ने की अनुमति दे दी थी। बताया जा रहा है कि राजनीतिक प्रतिनिधियों और इस्लामी मौलवियों के साथ हुई बैठक के बाद पाकिस्तान सरकार ने यह निर्णय लिया था, जबकि इससे पहले इमरान खान सरकार ने मस्जिद में एक समय में 5 लोगों के एकत्र होने की अनुमति दी थी

सरकार को कट्टरपंथियों के दवाब में आकर अपने ही फैसले में बदवाव करना पड़ा, हालाँकि इमरान सरकार ने रमजान की नमाज के दौरान सुरक्षात्मक मास्क की उपयोगिता को अनिवार्य करते हुए और सोशल डिस्टेंडिंग का पालन करने की बात कही है। इतना ही नहीं सरकार की ओर से जारी दिशा निर्देशों में मस्जिद में आने वाले लोगों को 2 मीटर की दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया है।

साथ ही सरकार ने प्रशासन को मस्जिदों को हर दिन सैनिटाइज करने का निर्देश दिया गया है। वहीं पाकिस्तानी सरकार ने लोगों को दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए पाए जाने पर प्रतिबंधों को और कड़ा करने की भी चेतावनी दी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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