Tuesday, September 28, 2021
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दुबई में चीन ने बना रखी है ‘गुप्त जेल’, चीनी महिला का दावा- उइगर मुस्लिमों को रखकर किया जाता है टॉर्चर

चीनी क्षेत्र में ब्लैक साइट्स चल रही हैं ये तो सभी जानते थे। लेकिन चीन ने विदेशों में भी ऐसे डिटेंशन कैंप बना रखे हैं इसका खुलासा केवल वू के ही बयानों से होता है। ब्लैक साइट्स ऐसी खुफिया जेल होती है जहाँ कैदियों पर अपराध का आरोप नहीं लगाया जाता है।

उइगर मुस्लिमों को चीन किस तरह प्रताड़ित करता है यह अब छिपा नहीं है। शिनिजियांग प्रांत में इनके लिए बनाए गए यातना शिविरों को वह ‘रि एजुकेशन’ कैंप कहता है। यहाँ उइगर मुस्लिमों को अपनी परंपरा, मजहबी तौर-तरीकों को छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। अब एक चीनी महिला ने दावा किया है कि उइगरों को प्रताड़ित करने के लिए चीन ने दुबई में भी इस तरह की एक गुप्त जेल बना रखी है। इस महिला की पहचान वू हुआन के तौर पर हुई है।

चीन प्रत्यर्पित किए जाने से बचने के लिए इधर-उधर भाग रही वू हुआन (26) ने दावा किया है कि उसे दुबई की इस खुफिया जेल में 8 दिनों तक रखा गया था। उसने ये भी बताया कि उसका मंगेतर चीन की सरकार के असंतुष्ट था। वू हुआन के मुताबिक, उसे दुबई में चीन की ‘सीक्रेट जेल’ में दो अन्य उइगर मुस्लिम बंदियों के साथ रखा गया था।

यूक्रेन स्थित एक सेफ हाउस में 30 जून, 2021 को एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक इंटरव्यू के दौरान वू ने बताया कि दुबई के एक होटल से चीनी अधिकारियों ने उसे किडनैप कर लिया था। इसके बाद वे उसे एक विला में ले गए, जिसे उन्होंने सीक्रेट जेल बना रखा था। यहीं पर वो दो अन्य उइगर मुस्लिमों से मिली थी। नीदरलैंड में शरण माँगने वाली वू ने मीडिया को बताया कि 8 दिनों तक डिटेंशन कैंप में रखने के बाद उसे 8 जून को रिहा कर दिया गया था। महिला ने बताया कि इन 8 दिनों के दौरान उसे धमकी दी गई औऱ उसके मंगेतर पर उसे परेशान करने का आरोप लगाते हुए कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया गया।

हालाँकि, चीन द्वारा उइगर मुस्लिमों के उत्पीड़न किए जाने की खबरें नई नहीं हैं। लेकिन वू और उनका 19 वर्षीय मंगेतर वांग जिंग्यु उइगर नहीं, बल्कि हान चीनी हैं और ये समुदाय चीन का बहुसंख्यक समाज है। रिपोर्ट के मुताबिक, वांग ने चीनी अधिकारियों द्वारा साल 2019 के हांगकांग विरोध-प्रदर्शनों के दौरान चीनी मीडिया के कवरेज की आलोचना करने और भारत के साथ सीमा विवाद में चीन के आचरण पर सवाल उठाया था। इसी कारण चीनी अधिकारियों ने उन्हें वांटेड करार दे दिया था।

एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, वो वू के बयान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि या खंडन नहीं कर सकता है क्योंकि चीनी अधिकारियों ने उन्हें जिस स्थान पर रखा था, वो उस स्थान के बारे में सटीक जानकारी नहीं दे पा रही हैं। हालाँकि उनके पासपोर्ट के मुहर, एक चीनी अधिकारी द्वारा पूछताछ की फोन रिकॉर्डिंग और उनके द्वारा जेल से पादरी दंपति को भेजे गए मैसेज उनके दावे को प्रमाणित करते हैं। इस संबंध में चीन के विदेश मंत्रालय और दुबई स्थित उसके वाणिज्य दूतावास ने कई बार संपर्क करने के बावजूद जवाब नहीं दिया।

चीनी क्षेत्र में ब्लैक साइट्स चल रही हैं ये तो सभी जानते थे। लेकिन चीन ने विदेशों में भी ऐसे डिटेंशन कैंप बना रखे हैं इसका खुलासा केवल वू के ही बयानों से होता है। ब्लैक साइट्स ऐसी खुफिया जेल होती है जहाँ कैदियों पर अपराध का आरोप नहीं लगाया जाता है। यही कारण होता है कि यहाँ बंद कैदियों के पास कोई भी कानूनी सहारा भी नहीं होता है। इस तरह की खुफिया जेलें अक्सर होटल या गेस्टहाउस के रूप में होती हैं। चीन से असंतुष्ट या चीनी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाने वालों को दबाने के लिए इस तरह का जगहों का इस्तेमाल किया जाता है।

नमाज पढ़ने पर हिरासत में लिए गए

रेडियो फ्री एशिया (RFA) की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में बकरीद के दौरान बिना इजाजत नमाज पढ़ने के आरोप में चीनी अधिकारियों ने 170 से अधिक उइगर मुस्लिमों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था। यह घटना शिनजियांग के अक्सू शहर की अयकोल बस्ती में हुई थी। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, 50 वर्ष से कम आयु के लगभग 170 उइगरों ने भी आदेशों का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा की थी। नतीजतन, उन्हें ईद के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए हिरासत में रखा गया था।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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