Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयपाकिस्तान में छिड़ी थी 5 कबीलों की लड़ाई, 11 साल में 11 लाशें गिरने...

पाकिस्तान में छिड़ी थी 5 कबीलों की लड़ाई, 11 साल में 11 लाशें गिरने के बाद ‘जिरगा’ में हुई ‘पीस डील’: जानें आतंकी मुल्क में क्यों छिड़ा था भीषण घमासान

मियांवाली जिले में कुंडी, कालो, बिखन खेल, हजारा खेल और यारो खेल कबीलों के बीच 2015 से चली आ रही हिंसक दुश्मनी आखिरकार खत्म हो गई। शांति वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को गले लगाकर समझौता किया है।

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मियांवाली जिले में पाँच प्रमुख कबीलों के बीच 11 साल से चल रहा खूनी संघर्ष आखिरकार समाप्त हो गया। रविवार (28 जून 2026) को एक सुलह समारोह के दौरान प्रतिद्वंद्वी परिवारों ने एक-दूसरे को गले लगाकर वर्षों पुरानी दुश्मनी खत्म करने की औपचारिक घोषणा की।

इस संघर्ष में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी थी और 9 अन्य घायल हुए थे। यह झगड़ा कुंडी, कालो, बिखन खेल, हजारा खेल और यारो खेल कबीलों के बीच 2015 से लगातार हिंसा का कारण बना हुआ था।

2015 में शुरू हुआ था पहला बड़ा खूनी संघर्ष

इस लंबे विवाद की शुरुआत वर्ष 2015 में मियांवाली के वान भच्छरन थाना क्षेत्र में हुई थी, जब यारो खेल कबीले के दो भाइयों अशरफ खान और असगर खान समेत उनके सहयोगियों मोहम्मद जमान हजारा खेल और शेर अब्बास भट्टी की हत्या कर दी गई थी।

इसी हिंसा में कालो कबीले के मोहम्मद लतीफ की भी जान चली गई थी। इस घटना ने कबीलों के बीच तनाव को इतना बढ़ा दिया कि बदले की आग लगातार भड़कती रही और क्षेत्र में कई बार हिंसक झड़पें होती रहीं।

तीन साल बाद 2018 में मियांवाली सिटी थाना क्षेत्र में एक और बड़ा हमला हुआ, जब कालो और कुंडी कबीलों के लोग अदालत की सुनवाई में जा रहे थे, तभी घात लगाकर उन पर हमला कर दिया गया। इस हमले में अब्दुल वहीद कालो, मोहम्मद मेहरान कुंडी, मोहम्मद नोमान कुंडी और दो राहगीरों की मौत हो गई।

इसके बाद 2019 में कायदाबाद के पास हुई एक और घटना में अशरफ खान बिखन खेल की हत्या कर दी गई, जिसने दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी को और गहरा कर दिया।

11 साल बाद खत्म हुआ लंबा संघर्ष

इस संघर्ष को समाप्त कराने में मियां रियाज मियाना, शौकत खान, सिब्तैन खान और इंस्पेक्टर इरफान गुज्जर की अहम भूमिका मानी जा रही है। लंबे संवाद और भरोसा बहाली की कोशिशों के बाद आखिरकार मियांवाली के नूर मार्केट में सुलह समारोह आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल सरदार सलीम हैदर खान समेत कई पूर्व सांसद, राजनीतिक नेता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। समारोह के दौरान कबीलों के सदस्यों ने एक-दूसरे को गले लगाकर दुश्मनी खत्म करने की घोषणा की।

राज्यपाल ने इसे सामाजिक स्थिरता और शांति की दिशा में अहम कदम बताया। इसी मौके पर अकरम खान ने 12 मिलियन रुपए के किसास (खून बहा) को माफ करने की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने यह फैसला अल्लाह की रजा के लिए लिया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

राम मंदिर न जाने के लिए अखिलेश का राजनीतिक बहाना: असल मकसद है हिंदू बनाम हिंदू की लड़ाई और वोटरों को साधना

यूपी की राजनीति में राम मंदिर, सनातन और वोट बैंक पर फिर से सियासी पारा चढ़ गया है। सपा अध्यक्ष ने अयोध्या न जाने का नया बहाना बनाया है।

GAGAN की मदद से इंडिगो का विमान उदयपुर एयरपोर्ट पर उतरा: जानिए क्या है भारत का स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम और यह कैसे काम...

ISRO की मदद से देश में ही बनाया गया यह सिस्टम, एयरक्राफ्ट की आसान, ज़्यादा सटीक और सुरक्षित लैंडिंग कराएगा और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट को भी आसान बनाएगा।
- विज्ञापन -