Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयमहिला पत्रकार ने नौकरी नहीं छोड़ी तो शौहर दिलावर ने की हत्या, 7 महीने...

महिला पत्रकार ने नौकरी नहीं छोड़ी तो शौहर दिलावर ने की हत्या, 7 महीने पहले ही हुआ था निकाह

उरूज इकबाल एक क्राइम रिपोर्टर थीं। नौकरी छोड़ने के लिए दिलावर उन पर लगातार दबाव बना रहा था। उससे तंग आकर वह दफ्तर के पास ही कमरा लेकर रहने लगी। दिलावर ने दफ्तर के बाहर ही उनके सिर में गोली मार दी।

पाकिस्तान में 27 वर्षीय एक महिला पत्रकार की उसके शौहर ने गोली मारकर हत्या कर दी। जानकारी के अनुसार शौहर नहीं चाहता था कि उसकी बीवी नौकरी करे। कई बार वह नौकरी छोड़ने का दबाव भी बना चुका था। हैरान करने वाली बात ये है कि मृतका का पति खुद भी एक पत्रकार है और दोनों ने 7 महीने पहले ही अपनी मर्जी से (लव मैरेज) से निकाह किया था।

उरूज इकबाल नामक महिला एक उर्दू अखबार में पत्रकार थी। सोमवार (नवंबर 25, 2019) को लाहौर में किला गुज्जर सिंह के पास स्थित अपने दफ्तर में वह प्रवेश कर रही थी, तभी शौहर दिलावर अली ने उसके सिर पर गोली चला दी। उरूज को फौरन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जिंदगी नहीं बचाई जा सकी।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि मृतका के भाई यासिर इकबाल ने शिकायत दर्ज कराई है। मामले की जाँच जारी है। महिला का पति भी एक उर्दू अखबार में पत्रकार का काम करता है। इकबाल ने अपनी शिकायत में बताया कि उसकी बहन ने अली से 7 महीने पहले निकाह किया था, लेकिन कुछ समय बाद दोनों के रिश्तों में घरेलू कारणों से खटास आ गई। अली लगातार उसे नौकरी छोड़ने के लिए कहता था। इकबाल के मुताबिक अली लगातार उसकी बहन को परेशान कर रहा था और हाल ही में उन्होंने इस संबंध में उसके ख़िलाफ़ शिकायत भी दर्ज करवाई थी, लेकिन उस समय पुलिस ने अली के ख़िलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

उल्लेखनीय है कि उरूज इकबाल एक क्राइम रिपोर्टर थीं। जो अपने शौहर से घरेलू नोक-झोंक के बाद अपने ऑफिस के पास ही एक बिल्डिंग में कमरा लेकर रहती थीं। लेकिन अली से ये बर्दाशत नहीं हुआ और दफ्तर के बाहर पहुँचकर उसने अपनी बीवी की हत्या कर दी। उरूज की हत्या के बाद पुलिस सीसीटीवी फुटेज खँगालने में जुटी है और प्राप्त सभी सबूतों को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जा रहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।

संभल की डेमोग्राफी: हिंदू 13 हजार से हुए 47 हजार, मुस्लिम 23 हजार से हो गए 1 लाख 71 हजार – मुस्लिम भीड़ की...

2011 की जनगणना के अनुसार संभल शहर की डेमोग्राफी 77.67% मुस्लिम आबादी जबकि हिंदू आबादी सिर्फ 22% वाली बताई गई है। वर्तमान में मुस्लिम 80% तक।
- विज्ञापन -