Monday, April 15, 2024
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जिस सवाल से चीन चाह रहा था बचना, भारत सहित दुनिया के 62 देश अब हुए उसके सामने खड़े

यूरोपीय संघ द्वारा प्रायोजित मसौदा प्रस्ताव सर्वसम्मति से 73 वें विश्व स्वास्थ्य सभा में अपनाया जाएगा। यानी जिस सवाल से चीन बचने की कोशिश कर रहा था, उसे अब उसका सामना करना पड़ेगा।

भारत ने विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) के सामने पेश किए गए 62 देशों के गठबंधन मसौदा प्रस्ताव का समर्थन किया है, जो आज (18मई, 2020) से शुरू होने वाले दो दिवसीय बैठक के दौरान कोरोना को रोकने के लिए किए गए WHO के कामों और इसके लिए तय की गई समय-सीमा की भी जाँच करने की माँग की जाएगी।

इंडिया टुडे टीवी के रिपोर्ट के अनुसार ‘कोविड-19 की प्रतिक्रिया’ पर यूरोपीय संघ द्वारा प्रायोजित मसौदा प्रस्ताव सर्वसम्मति से 73 वें विश्व स्वास्थ्य सभा में अपनाया जाएगा। यानी जिस सवाल से चीन बचने की कोशिश कर रहा था, उसे अब उसका सामना करना पड़ेगा।

मूल रूप से, यह प्रस्ताव यूरोपीय संघ द्वारा तैयार किया गया था, लेकिन बाद में इसे 62 अन्य देशों द्वारा को-स्पॉन्सर किया गया। जबकि पहले अमेरिका जैसे देशों ने कोरोनो वायरस प्रकोप और इसकी उत्पत्ति की स्वतंत्र जाँच की माँग की थी। यूरोपीय संघ के मसौदे में किसी के भी खिलाफ पूछताछ और जाँच का उल्लेख नहीं है।

सूत्रों के अनुसार, यूरोपीय संघ के ड्राफ्ट रिज़ॉल्यूशन को अधिकांश देशों द्वारा स्वीकार किया गया है। प्रस्‍ताव की भाषा ऐसी है, जिसे ऑस्ट्रेलिया, यूरोपीय संघ सहित सभी ने स्वीकार कर लिया है। यहाँ तक अमरीका या चीन ने भी इस पर आपत्ति नहीं जताई है।

मसौदा प्रस्ताव में चीन द्वारा कोरोनो वायरस प्रकोप की प्रतिक्रिया पर सख्त कार्रवाई और पारदर्शिता की तलाश को फिलहाल छोड़ दिया गया है। हालाँकि, इसका उद्देश्य एक संगठन के रूप में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के बारे में उठाए गए सवालों और महामारी की प्रतिक्रिया को संबोधित करना है।

भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सभी बहुपक्षीय बैठकों में इसका बड़ा लक्ष्य हासिल करने पर बल दिया है। इनमें प्रधानमंत्री ने डब्ल्यूएचओ को मजबूत बनाने और सुधारने की बात कही है।

उन्होंने कहा, “संकल्प का उद्देश्य एकता दिखाने के लिए है, जो कोरोना वायरस से लड़ने के लिए दवाओं, निदान, टीकों और भविष्य के नवाचारों के लिए अधिक न्यायसंगत पहुँच को सुनिश्चित करता है। लेकिन, यह इस तथ्य पर भी केंद्रित है कि लोगों को झूठ या गलत सूचना से परेशान नहीं किया जाना चाहिए।”

अंतिम मसौदा प्रस्ताव इन देशों द्वारा सह-प्रायोजित किया गया है- अल्बानिया, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, बेलारूस, भूटान, बोत्सवाना, ब्राजील, कनाडा, चिली, कोलंबिया, अल साल्वाडोर, ग्वाटेमाला, आइसलैंड, भारत, इंडोनेशिया, जापान, मैक्सिको, मोनाको, मोंटेनेग्रो, मोज़ाम्बिक , न्यूजीलैंड, उत्तर मैसेडोनिया, नॉर्वे, पैराग्वे, पेरू, कोरिया गणराज्य, मोल्दोवा गणराज्य, रूसी संघ, सैन मैरिनो, सिएरा लियोन, दक्षिण अफ्रीका, यूरोपीय संघ और इसके सदस्य राज्य, तुर्की, यूक्रेन, यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन और उत्तरी आयरलैंड और जाम्बिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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