Tuesday, April 16, 2024
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जी-20 शिखर सम्‍मेलन से पहले सऊदी अरब ने वापस लिया विवादित नोट: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को बताया था अलग देश

भारतीय राजदूत औसाफ सईद ने 28 अक्टूबर को सऊदी अरब के सामने रियाद में गलत मैप को लेकर आपत्ति जताई थी। साथ ही नोट में बदलाव करने के लिए भी कहा था। जिसके बाद न केवल नोट को वापस लिया गया, बल्कि उसकी छपाई बंद करवा दी गई।

21 नवंबर को जी-20 देशों का शिखर सम्‍मेलन शुरू हो रहा है। कोरोना काल में शुरू हो रहे इस शिखर सम्‍मेलन में पहली बार दुनिया के 20 देश एक वर्चुअल मंच पर शिरकत करने जा रहे हैं। वहीं हाल ही में रियाद के नोट पर भारत का गलत नक्शा छापने के चलते उठे विवाद की वजह से सऊदी अरब ने सम्मेलन से पहले गलत मैप वाले नोट को वापस ले लिया है। बता दें सऊदी अरब ने 20 रियाल बैंक में अविभाजित जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग दिखाया गया था।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय राजदूत औसाफ सईद ने 28 अक्टूबर को सऊदी अरब के सामने रियाद में गलत मैप को लेकर आपत्ति जताई थी। साथ ही नोट में बदलाव करने के लिए भी कहा था। जिसके बाद न केवल नोट को वापस लिया गया, बल्कि उसकी छपाई बंद करवा दी गई।

गौरतलब है कि पूरा विवाद नोट के सार्वजनिक होने के बाद शुरू हुआ। इसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके), गिलगित-बाल्टिस्तान समेत पूरे जम्मू-कश्मीर को अलग देश के रूप में दिखाया गया था, जोकि भारत के लिए बर्दाश्त से बाहर था। इस विवादित बैंक नोट में एक तरफ किंग सलमान और जी-20 सऊदी समिट का लोगो था, तो दूसरी तरफ जी-20 देशों का वैश्विक मैप था।

विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को कहा था, “हमने सऊदी अधिकारियों के साथ भारतीय सीमाओं के गलत चित्रण का मामला उठाया था। रियाद के साथ ही नई दिल्ली में भी सऊदी के अधिकारियों से बात हुई। हमें सऊदी अधिकारियों द्वारा सूचित किया गया है कि उन्होंने इस मामले में हमारी चिंताओं को नोट किया है।”

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ते विवाद को शांत करने के लिए सऊदी अरब ने मामले को संभालते हुए दोनों देशों के बीच के रिश्ते में खटास नहीं आने दी। साथ ही जो मुद्रा स्मारिका के तौर पर जारी की गई थी, संचलन के लिए नहीं थी, उसे वापस ले लिया गया।

उल्लेखनीय है कि सऊदी अरब पहली बार इस सम्‍मेलन की मेजबानी कर रहा है। 15वें जी-20 शिखर सम्‍मेलन के जरिए सऊदी अरब की निगाह विश्‍व की दूसरी उभरती आर्थिक शक्तियों के साथ अपने संबंधों को सुधारने पर होगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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