Monday, August 15, 2022
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इस्लामी कॉलेज के कैंपस में यौन हिंसा, खुलासा करने वाले मैगजीन को बंद करवाया: इंडोनेशिया में छात्रों-पत्रकारों ने खोला मोर्चा

इंडोनेशिया के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने साल 2019 में कानून बनाया था कि परिसर में यौन हिंसा की घटना को लेकर सभी इस्लामी स्कूलों और विश्वविद्यालयों को एक टास्क फोर्स का गठन करना अनिवार्य है। हालाँकि, IAIN ने अब तक ऐसा नहीं किया है।

विश्व की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले मुल्क इंडोनेशिया (Indonesia) के एक इस्लामी कॉलेज ने परिसर में हुई यौन शोषण (Sexual Assault) की घटना के आरोपितों पर कार्रवाई करने के बजाए इसे सामने लाने वाले मैगजीन पर ही प्रतिबंध लगा दिया है।

इस घटना की अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट वॉच (Human Right Watch) ने निंदा की है। वहीं, इस घटना के बाद इंडोनेशिया के कई इलाकों में इस निर्णय के खिलाफ छात्रों और पत्रकारों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।

इंडोनेशिया के मालुकु प्रांत में एंबोन में सरकारी इस्लामिक संस्थान ‘इंस्टीट्यूट अगामा इस्लाम नेगेरी (IAIN)’ में विद्यार्थियों द्वारा निकाली जाने वाली पत्रिका लिंटास मैगजीन (Lintas Magazine) ने परिसर में यौन उत्पीड़न की घटनाओं का कवरेज किया था। आरोपितों के खिलाफ जाँच करने के बजाय कॉलेज ने इसे बंद करने का आदेश कर दिया।

ह्यूमन राइट वॉच के अनुसार, इस साल 14 मार्च को लिंटास पत्रिका ने साल 2015 से 2021 के बीच इस्लामी कॉलेज कैंपस में हुई यौन हिंसा की दर्जनों घटनाओं की रिपोर्टिंग की थी। जब मैगजीन का यह अंक सामने आया तो हंगामा हो गया।

लिंटास ने परिसर में यौन हिंसा की घटनाओं की शिकार 27 छात्राओं और 5 छात्रों की 32 को कवर किया। मैगजीन ने स्टोरी के लिए पाँच साल तक किए अपने शोध में हिंसा के शिकार छात्र-छात्राओं के अलावा कैंपस के अधिकारियों का साक्षात्कार लिया। जिन अधिकारियों की साक्षात्कार लिया गया उनमें ज़ैनल आबिदीन रहावरिन भी शामिल थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, पत्रिका ने शोध में यौन हिंसा के 14 कथित आरोपितों की है। इन लोगों ने पीड़ितों के साथ फील्ड रिसर्च ट्रीप के दौरान, कैंपस, लेक्चरर ऑफिस और घरों में यौन हिंसा को अंजाम दिया। इनमें से पाँच पीड़ितों ने बताया कि उनके एक व्याख्याता रिश्तेदार ने ही उनका शोषण किया।

घटना सामने आने के बाद यह व्याख्याता लिंटास के न्यूज़रूम में गया और दो स्टाफ पर हमला किया। हमले में रिपोर्टर एम नूरदीन कैसुपी और डिजाइनर मुहम्मद पेब्रिएंटो घायल हो गए। इसके बाद रहावरिन ने छात्र पत्रिका को बंद करने, न्यूज़रूम को सील करने और सभी उपकरणों को जब्त करने का आदेश दिया।

उन्होंने इसके पत्रकारों और संपादकों पर कॉलेज को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए नौ पत्रकारों के खिलाफ पुलिस में शिकायत की। इतना ही नहीं, लिंटास पत्रिका के मुख्य संपादक योलांदा अग्ने पर सभी पीड़ितों और आरोपितों के नामों का खुलासा करने का दबाव डाला गया।

बता दें कि इंडोनेशिया के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने साल 2019 में कानून बनाया था कि परिसर में यौन हिंसा की घटना को लेकर सभी इस्लामी स्कूलों और विश्वविद्यालयों को एक टास्क फोर्स का गठन करना अनिवार्य है। हालाँकि, IAIN ने अब तक ऐसा नहीं किया है।

रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज द्वारा पत्रिका को बंद करने का आदेश देने के बाद लगभग दो हजार पत्रकारों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। इन पत्रकारों को इंडोनेशिया के एलायंस ऑफ इंडिपेंडेंट जर्नलिस्ट्स और अंबोन के स्थानीय समूह का भी साथ मिला है। इसके साथ ही छात्र संगठनों भी पत्रिका के समर्थन में सामने आए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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