Monday, May 25, 2020
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‘हम कोरोना वायरस में विश्वास नहीं करते, हमें अल्लाह पर विश्वास है’ – 37 मौतों के बाद भी खुली हैं मस्जिदें

“हम कोरोना वायरस में विश्वास नहीं करते हैं, हम अल्लाह पर विश्वास करते हैं। जो कुछ भी होता है, वह अल्लाह की मर्जी से होता है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने देश भर में लॉकडाउन की घोषणा तो की है लेकिन मस्जिदों को आधिकारिक रूप से बंद नहीं किया गया है। इमरान खान लोगों से अपील कर रहे हैं कि सोशल डिस्टैन्सिंग का ख्याल रखें और मस्जिदों में बड़ी संख्या में जमा ना हों। मुस्लिम बहुल मध्य पूर्व में भी मस्जिदें बंद कर दी गई हैं, लेकिन पाकिस्तानी सरकार ने मौलवियों के सामने घुटने टेक दिए। अब तक वहाँ कोरोना संक्रमण के ढाई हजार से ज्यादा मामले सामने आए हैं और 37 लोगों की जानें जा चुकी हैं।

इन मौलवियों ने सरकार के लॉकडाउन और सोशल डिस्‍टेसिंग के नियमों को ताक पर रख दिया है। मौलवियों ने कोरोना महामारी को गंभीरता से नहीं लिया और मजहबी के नाम पर इंसान का इंसान से अलगाव को रोकने से इनकार कर दिया है। AFP की रिपोर्ट के अनुसार इस्लामाबाद के निवासी अल्ताफ खान का कहना है, “हम कोरोना वायरस में विश्वास नहीं करते हैं, हम अल्लाह पर विश्वास करते हैं। जो कुछ भी होता है, वह अल्लाह की मर्जी से होता है।”

वहीं कुछ मौलवियों ने लोगों को मस्जिदों में नमाज अता करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस्लामाबाद के एक अन्य आदमी ने लोगों के मस्जिद जाकर नमाज अता करने पर बात करते हुए कहा कि लोग अल्लाह से मदद माँगने के लिए मस्जिद में जाते हैं क्योंकि वे डर गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि लोगों को मस्जिदों में जाने से रोकना आसान नहीं था, जब तक कि वे स्वेच्छा से सहयोग नहीं करते। दरअसल पिछले हफ्ते मार्च के अंत तक, देश के मजहबी विद्वानों ने केवल बीमार और बुजुर्ग लोगों को मस्जिद में जाकर नमाज अता करने से परहेज करने के लिए कहा था।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंध सरकार ने लोगों को मस्जिदों में जाने से रोकने के लिए दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक कर्फ्यू जैसी पाबंदी की घोषणा की थी, जो कि नमाज पढ़ने का समय होता है। वहीं पंजाब सरकार ने लोगों को अपने घरों में नमाज अता करने का फतवा जारी किया था। अन्य प्रांतों और संघीय सरकार द्वारा इसी तरह के निर्देश जारी किए गए थे। मस्जिदों ने भी लोगों से घर पर नमाज पढ़ने की घोषणा की है। हालाँकि, पाकिस्तानियों ने दिशा-निर्देशों की अवहेलना कर भारी संख्या में मस्जिदों में नमाज अता की, खासकर शुक्रवार को।

जामिया मस्जिद कुबा में नमाज पढ़वाने वाले ने कहा, “सरकार और पुलिस डर की भावना पैदा करने के लिए ऐसे बयान दे रही है। कुछ नहीं होगा। कराची 20 मिलियन का शहर है, सरकार हर नुक्कड़ या हर सभा में अपना फैसला लागू नहीं कर सकती है।”

कराची में न्यू मेमन मस्जिद और कुछ अन्य इलाकों में पुलिस और रेंजर्स के जवानों की भारी टुकड़ी की तैनाती भी की गई थी। कराची में, अधिकांश मस्जिदों ने सरकारी आदेशों का पालन किया है, हालाँकि कुछ मस्जिदों में नियमित रुप से नमाज अता की गई। प्रांत के अन्य कुछ शहरों में मस्जिदों को बंद का निर्देश दिया गया है, साथ ही कहा गया है कि तीन से पाँच लोग जुमे की नमाज अदा कर सकेंगे। 

हालाँकि, ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर गाँवों में, लॉकडाउन को सख्ती से लागू नहीं किया गया है। कम्बर शाहदकोट जिले के एक गाँव में रहने वाले अब्दुल हनन ने कहा, “हमने शुक्रवार को अपनी नमाज जामिया मस्जिद में उसी भीड़ के साथ अदा की।”

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बलूचिस्तान में भी स्थिति बहुत अलग नहीं थी। एक पुलिस स्टेशन के पास स्थित प्रांतीय राजधानी क्वेटा की कंधारी मस्जिद में शुक्रवार की नमाज में भाग लेने के लिए एक बड़ी भीड़ आई थी। प्रांत के अन्य क्षेत्रों में अधिकांश मस्जिदें खुली थीं, लेकिन उपस्थिति कम थी।

इससे इतर पंजाब में, मस्जिदों ने लोगों से घरों पर नमाज अदा करने का अनुरोध किया है। शहरों में इन आदेशों का अधिकतर पालन किया गया लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति अलग थी क्योंकि लोग बड़ी संख्या में नमाज अदा करने के लिए बाहर आए थे।

लाहौर के एक इस्लामिक विश्वविद्यालय, दार उल इफ्ता जामिया नईमिया ने एक फतवा जारी करते हुए कहा कि जिन लोगों को सरकार द्वारा मस्जिदों में आने से रोका जाता है, वे समूह में नमाज़ अदा करने के लिए बाध्य नहीं थे।

मस्जिदों में जाने के मुद्दे पर पुलिस और मुसलमानों के बीच टकराव के मामले सामने आए हैं। कराची के लियाकताबाद इलाके में घौसिया मस्जिद के पास लोग इकट्ठा हुए और मस्जिद में घुसने से रोकने पर पुलिस पर पथराव किया। पुलिस ने कहा कि हमले में स्थानीय स्टेशन हाउस अधिकारी का आधिकारिक वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया था।

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