Tuesday, June 15, 2021
Home रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय कबूतर से जहर खींचने वाला पाकिस्तान पानी से भी चला चुका है कार

कबूतर से जहर खींचने वाला पाकिस्तान पानी से भी चला चुका है कार

2012 में आगा वकार ने पाकिस्तान में 20 घंटे की बिजली कटौती आम होने का फायदा उठाकर उल्लू बनाया, सेना के चुनिंदा अफ़सर हिंदुस्तान से जिहाद का हवाला देकर मूर्ख बना रहे हैं और जिहादी कट्टरपंथी बना आम आदमी यह जानते हुए भी कि उसका कट रहा है, ख़ुशी-ख़ुशी कटवाए जा रहा है।

कबूतर के ज़रिए पाकिस्तान में हेपेटाइटिस-बी का “ज़हर खींच कर” इलाज करने के वायरल वीडियो ने एक बार फिर आगा वकार की यादें ताज़ा कर दीं हैं- उस ‘डिबेट’ के साथ ही, जिसमें हम यह सोचने की कोशिश करते हैं कि विभाजन के समय अपने मन-मुताबिक सब कुछ पाने के बाद भी पाकिस्तान आज ऐसा दो कौड़ी का देश के नाम पर मीम क्यों है। 2012 में इस पाकिस्तानी ‘अविष्कारक’ ने ‘वॉटर कार किट’ बनाने की घोषणा की थी, जिससे कार बिना जीवाश्म ईंधन (डीजल-पेट्रोल) के केवल पानी के दम पर चलनी की बात कही थी। उस समय पाकिस्तान या उम्मत ही नहीं, पूरी दुनिया में इसके चर्चे हुए थे। लेकिन बुलबुला अंत में बुलबुला ही निकला।

जापान-अली बाबा की कॉपी निकला ‘मॉडल’

आगा वकार ने दावा किया था कि उसने पानी के अणुओं (मॉलिक्यूल्स) को उनके अवयवों हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणुओं (एटम्स) में तोड़ने का आसान तरीका ईजाद कर लिया है और उसी प्रक्रिया में उत्पन्न ऊर्जा से वह कार दौड़ा सकता है। अभी तक परिदृश्य यह था कि पानी को हाइड्रोजन-ऑक्सीजन में तोड़ने का ‘आसान’ तरीका सारी दुनिया खोज रही थी। ऐसा इसलिए, क्योंकि पानी को हाइड्रोजन-ऑक्सीजन में तोड़ने पर ऊर्जा तो बहुत ज़्यादा निकलती है, लेकिन इससे अधिक ऊर्जा पानी के अणु को तोड़ने में खप जाती है।

आगा वकार ने इस प्रक्रिया को कम ऊर्जा की खपत में पूरी कर लेने का दावा कर तहलका मचा दिया था। चूँकि उस समय अरब क्रांति और आईएस के उभार के चलते मध्य-पूर्व से तेल की सप्लाई पर शंका के बादल थे, इसलिए दुनिया और ज्यादा उत्साहित हो गई। एक टीवी शो में पाकिस्तान के संघीय मंत्री ने उसकी कार की सवारी भी की। पाकिस्तान को चोरी का परमाणु बम दिलाने वाले अब्दुल कादिर खान ने भी ‘जाँच’ कर के आगा वकार को ‘सर्टिफिकेट’ दे दिया “there is no fraud involved,” का।

और इसी तरह आगा वकार का बुलबुला बड़ा होता गया। आगा वकार के चारों ओर पाकिस्तानी मीडिया भी नाचने लगी। स्थापित वैज्ञानिकों ने कई तरह के सवाल उठाए, लेकिन पाकिस्तान में उनकी कौन सुनता।

अंत में हालाँकि यह बुलबुला फ़ुस्स हो ही गया। इस बुलबुले में छेद करने वालों में खुद पाकिस्तान के ट्रिब्यून अख़बार की वेबसाइट पर छपा एक ब्लॉग था, जिसने आगा वकार के मॉडल और डिज़ाइन में इसके पहले जापान में अविष्कृत एक मिलते-जुलते यंत्र और eBay व Ali Baba पर बिक रहीं किटों में बहुत हद तक समानता देखी। फिर न्यू यॉर्क टाइम्स में छपे एक लेख में आगा वकार की बखिया उधेड़ने के साथ ही पाकिस्तान में थीसिस में नकलचोरी, डॉक्टरेट डिग्री जारी करने में गड़बड़झाले जैसी कई चीज़ें प्रकाश में आईं, जोकि विज्ञानोन्मुख समाज के लिए धब्बा होतीं हैं।

असली वैज्ञानिक को अँधेरे में धकेला, ‘जिहाद’ बना मूलमंत्र

जब हिंदुस्तान-पाकिस्तान आज़ाद हुए, तो पाकिस्तान को ऐसा नहीं है विकास और प्रगति के मौके नहीं मिले, या उनसे संसाधन छीन लिए गए। उन्हें सेना मिली, वैज्ञानिक मिले, संस्थान मिले, अंग्रेजी हुकूमत के हिंदुस्तानी खज़ाने का एक हिस्सा मिला। हिंदुस्तान में हालाँकि उद्योग-धंधे तो थे, लेकिन कच्चा माल देने वाली अधिकांश जगहें पाकिस्तान के हिस्से में गईं; कराची मुंबई की बजाय बेहतर स्थिति में था क्षेत्र के अंतरराष्ट्रीय व्यापार का प्रमुखतम बंदरगाह बनने के लिए।

लेकिन पाकिस्तान ने इन सब पर कोई ध्यान नहीं दिया। उसके दिमाग में केवल दो चीज़ें रहीं- “हँस के लिया है पाकिस्तान, लड़ के लेंगे हिंदुस्तान” और इसे पूरा करने के लिए एटम बम हथियाने की दाँव-पेंच, सेना के आगे राजतंत्र ही नहीं आम जनता का भी समर्पण, नागरिक विज्ञान की अनदेखी और महंगी सैन्य तकनीकों (जिनका आम आदमी की ज़िंदगी पर कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना था) का आयात।

परमाणु बम की तकनीक ‘नकलचोरी’ करने वाले अब्दुल कादिर खान को सर पर बिठाने वाले पाकिस्तान में असली वैज्ञानिकों की नाकद्री का अब्दुस सलाम से बड़ा उदाहरण नहीं हो सकता। जिसने 1979 आते-आते ‘गॉड पार्टिकल’ के विषय पर न केवल विश्व-विख्यात रिसर्च की, बल्कि उसका लोहा मनवाकर नोबेल भी जीत लिया, उन्हें पाकिस्तान ने कभी भाव नहीं दिया। क्यों? क्योंकि वे उस अहमदी समुदाय के थे, जिन्हें कट्टरपंथी ‘सच्चा’ नहीं मानते।

नतीजा यही है कि 2012 में आगा वकार ने पाकिस्तान में 20 घंटे की बिजली कटौती आम होने का फायदा उठाकर उल्लू बनाया, सेना के चुनिंदा अफ़सर हिंदुस्तान से जिहाद का हवाला देकर मूर्ख बना रहे हैं, और जिहादी कठमुल्ला बना आम आदमी यह जानते हुए भी कि उसका c****या कट रहा है, ख़ुशी-ख़ुशी कटवाए जा रहा है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा किए गए जमीन के सौदे की पूरी सच्चाई, AAP के खोखले दावों की पूरी पड़ताल

अंसारी को जमीन का मालिकाना मिलने के बाद मंदिर ट्रस्ट और अंसारी के बीच बिक्री समझौता हुआ। अंसारी ने जमीन को 18.5 करोड़ रुपए में ट्रस्ट को बेचने की सहमति जताई।

2030 तक 2.6 करोड़ एकड़ बंजर जमीन का होगा कायाकल्प, 10 साल में बढ़ा 30 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र: UN वर्चुअल संवाद में PM...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संयुक्त राष्ट्र में मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखे पर उच्च स्तरीय वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित किया।

ट्रस्ट द्वारा जमीन के सौदे में घोटाले का आरोप एक सुनियोजित दुष्प्रचार, समाज में उत्पन्न हुई भ्रम की स्थिति: चंपत राय

पारदर्शिता के विषय में चंपत राय ने कहा कि तीर्थ क्षेत्र का प्रथम दिवस से ही निर्णय रहा है कि सभी भुगतान बैंक से सीधे खाते में ही किए जाएँगे, सम्बन्धित भूमि की क्रय प्रक्रिया में भी इसी निर्णय का पालन हुआ है।

श्रीराम मंदिर के लिए सदियों तक मुगलों से सैकड़ों लड़ाई लड़े तो कॉन्ग्रेस-लेफ्ट-आप इकोसिस्टम से एक और सही

जो कुछ भी शुरू किया गया है वह हवन कुंड में हड्डी डालने जैसा है पर सदियों से लड़ी गई सैकड़ों लड़ाई के साथ एक लड़ाई और सही।

महाराष्ट्र में अब अकेले ही चुनाव लड़ेगी कॉन्ग्रेस, नाना पटोले ने सीएम उम्मीदवार बनने की जताई इच्छा

पटोले ने अमरावती में कहा, ''2024 के चुनाव में कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी। केवल कॉन्ग्रेस की विचारधारा ही देश को बचा सकती है।''

चीन की वुहान लैब में जिंदा चमगादड़ों को पिंजरे के अंदर कैद करके रखा जाता था: वीडियो से हुआ बड़ा खुलासा

वीडियो ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के उस दावे को भी खारिज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि चमगादड़ों को लैब में रखना और कोरोना के वुहान लैब से पैदा होने की बात करना महज एक 'साजिश' है।

प्रचलित ख़बरें

राम मंदिर में अड़ंगा डालने में लगी AAP, ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश: जानिए, ‘जमीन घोटाले’ की हकीकत

राम मंदिर जजमेंट और योगी सरकार द्वारा कई विकास परियोजनाओं की घोषणाओं के कारण 2 साल में अयोध्या में जमीन के दाम बढ़े हैं। जानिए क्यों निराधार हैं संजय सिंह के आरोप।

‘हिंदुओं को 1 सेकेंड के लिए भी खुश नहीं देख सकता’: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप से पहले घृणा की बैटिंग

भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज वेंकटेश प्रसाद ने कहा कि जीते कोई भी, लेकिन ये ट्वीट ये बताता है कि इस व्यक्ति की सोच कितनी तुच्छ और घृणास्पद है।

सिख विधवा के पति का दोस्त था महफूज, सहारा देने के नाम पर धर्मांतरण करा किया निकाह; दो बेटों का भी करा दिया खतना

रामपुर जिले के बेरुआ गाँव के महफूज ने एक सिख महिला की पति की मौत के बाद सहारा देने के नाम पर धर्मांतरण कर उसके साथ निकाह कर लिया।

केजरीवाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में फिर होने वाली थी पिटाई? लोगों से पहले ही उतरवा लिए गए जूते-चप्पल: रिपोर्ट

केजरीवाल पर हमले की घटनाएँ कोई नई बात नहीं है और उन्हें थप्पड़ मारने के अलावा स्याही, मिर्ची पाउडर और जूते-चप्पल फेंकने की घटनाएँ भी सामने आ चुकी हैं।

6 साल के पोते के सामने 60 साल की दादी को चारपाई से बाँधा, TMC के गुंडों ने किया रेप: बंगाल हिंसा की पीड़िताओं...

बंगाल हिंसा की गैंगरेप पीड़िताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। बताया है कि किस तरह टीएमसी के गुंडों ने उन्हें प्रताड़ित किया।

चाचा ने ही कर डाला चिराग तले अंधेरा: कार चलाना, आधे घंटे हॉर्न बजाना और मॉं की दुहाई भी काम न आई

उधर चिराग पासवान अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए खुद चाचा के घर पहुँचे, जहाँ उनके लिए दरवाजा तक नहीं खोला जा रहा था। वो खुद कार चला तक चाचा के बंगले पर पहुँचे थे।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
103,912FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe