Wednesday, September 22, 2021
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‘मेरा मियाँ, मेरा कल्चर’ कहकर ट्रोल हुईं पाकिस्तानी एक्ट्रेस सदफ कंवल, यूजर्स बोले- ‘इसे शौहर की नौकरानी बनकर रहना पसंद है’

शिराज हसन नाम के यूजर ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा, "भारत की पुरुष और महिला टीम टोक्यो ओलंपिक्स के सेमीफाइनल्स में पहुँच गई हैं और हम मेरा मियाँ मेरा कल्चर कर रहे हैं।"

फेमिनिज्म को लेकर पाकिस्तानी अभिनेत्री और मॉडल सदफ कंवल का अजीबोगरीब बयान आने के बाद सोशल मीडिया पर ‘मेरा मियाँ, मेरा कल्चर’ ट्रेंड पर है। सदफ ने एक इंटरव्यू में अपने शौहर के जूते उठाने, उन्हें खाना देने, उनकी जरूरतों का ख्याल रखने को नारीवाद का नाम दिया था। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स को उनके ख्याल और उनके द्वारा गढ़ी गई नारीवाद की परिभाषा पसंद नहीं आई और उन्हें ट्रोल किया जाने लगा। 

दरअसल, एक टीवी इंटरव्यू में सदफ से पूछा गया था कि क्या पाकिस्तानी महिलाएँ मजलूम हैं? इसके जवाब में उन्होंने कहा, “औरत मजलूम बिल्कुल नहीं है वो बहुत मजबूत हैं, मैं तो खुद को बिल्कुल भी मजलूम नहीं मानती। आप भी बहुत मजबूत होंगी। औरत बेचारी नहीं है।” इसके बाद आगे उन्होंने कहा,

“हमारा कल्चर क्या है? हमारे मियाँ है, मैंने शादी की है, मुझे उसके जूते उठाने हैं उसके कपड़े प्रेस करने हैं। हालाँकि ये काम मैं कम करती हूँ, लेकिन मुझे ये बात तो पता होनी ही चाहिए कि मेरे पति के कपड़े कहाँ हैं। मुझे पता होना चाहिए कि उनकी चीज़ें कहा हैं, क्या खाना है, क्योंकि मैं उसकी पत्नी हूँ और औरत हूँ पति से ज्यादा, मुझे उसके बारे में पता होना चाहिए। मैं यही देखकर बड़ी हुईं हूँ। आजकल काफी लिबरल्स आ गए हैं। लेकिन मेरा फेमिनिज्म यही कहता है।”

सदफ के इसी इंटरव्यू के बाद ‘मेरा मियाँ, मेरा कल्चर’ ट्रेंड कर रहा है। यूजर्स उन पर निशाना साध रहे हैं। शिराज हसन नाम के यूजर ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा, “भारत की पुरुष और महिला टीम टोक्यो ओलंपिक्स के सेमीफाइनल्स में पहुँच गई हैं और हम मेरा मियाँ मेरा कल्चर कर रहे हैं।”

मॉडल सबीका इमाम लिखती हैं, “जब आप फेमीनिज्म के बारे में नहीं जानती हैं तभी अपने पति के कपड़े इस्त्री करने के बारे में सोचती हैं।”

शोएब लिखते हैं, “सदफ को अपने शौहर की नौकरानी बनकर रहना पसंद हैं। यही उसके लिए अच्छा है। मैं अपनी बेटी की सोच अभी इसके जैसी नहीं चाहता।”

ईमान लिखते हैं, “मैं सच में बहुत सॉरी फील कर रहा हूँ। काश वह अपनी अहमियत समझ पाए और फिर लोगों को प्रभावित करे। ये सच बताऊँ बहुत दुखद है कि वह अपने आप को एक इंसान के तौर पर नहीं देखती जिसे केयर और बराबरी का हक है।”

बता दें कि इस इंटरव्यू के दौरान सदफ के पति शहरोज भी वहाँ पर मौजूद थे। उन्होंने भी अपनी पत्नी का समर्थन किया और कहा कि औरतें जो काम कर सकती हैं उसे मर्द कभी नहीं कर सकतें। जरूरी ये है कि दोनों को एक दूसरे की रेस्पेक्ट करनी चाहिए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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