Saturday, June 22, 2024
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उइगर मुस्लिमों के दमन में पाकिस्तान बना चीन का भागीदार: इमरान खान ने बर्बर नीतियों का किया खुलकर समर्थन

बीजिंग दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने के बाद बयान दिया जिसमें कहा गया कि वो ताइवान समेत दक्षिण चीन सागर, हांगकांग और शिनजियांग प्रांत के मुद्दे पर भी शी चिनफिंग की नीतियों का पूरा समर्थन करते हैं।

पाकिस्तान के चीन के साथ गहराते संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री इमरान खान ने उइगर मुस्लिमों को खुल कर पीठ दिखा दी है। उन्होंने अपने बीजिंग दौरे के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने के बाद एक साझा बयान दिया जिसमें कहा गया कि वो ताइवान समेत दक्षिण चीन सागर, हॉन्ग-कॉन्ग और शिनजियांग प्रांत के मुद्दे पर भी शी जिनपिंग की वन चाइना-वन पॉलिसी की नीतियों का पूरा समर्थन करते हैं।

मालूम हो कि ताइवान, हॉन्ग-कॉन्ग, शिनजियांग चीन से जुड़े वो मु्द्दे हैं जिनके कारण उसे वैश्विक स्तर पर बदनामी झेलनी पड़ती है। कुछ जगह इन मुद्दों पर चीन की नीतियों को मानवाधिकारों का उल्लंघन भी बताते हैं। उइगरों पर अत्याचार तो ऐसा विषय है जिसे लेकर विश्व के करीब 243 संगठन आरोप लगा चुके हैं और चीन में उइगरों पर होते अत्याचारों की पोल भी खोल चुके हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स, विजुअल्स, पीड़ितों के बयान के बाद भी पाकिस्तानी पीएम ने चीन को अपना समर्थन दिया और उन सैंकड़ों लोगों की अनदेखी कर दी जो उसी मजहब के होने के नाते प्रताड़ित किए जा रहे हैं जिसकी बुनियाद पर पूरा पाकिस्तान बनाया गया।

उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार करने में PAK ने दिया चीन का साथ

उल्लेखनीय है कि मुस्लिमों का मसीहा बनने का दिखावा करने वाले पाकिस्तान (Pakistan) का चेहरा पहली बार उजागर नहीं हुआ। जो इमरान खान अक्सर भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार की झूठी बयानबाजी करते हैं। कश्मीर में मुस्लिमों के हालातों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाते हैं। वही पाकिस्तान और इमरान खान चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुस्लिमों (Uighur Muslims Repression) के दमन में चीन (China) का न केवल समर्थन करते आए हैं बल्कि उइगरों पर अत्याचार करवाने में भागीदार भी बने हैं। 

पिछले दिनों कनाडा स्थित थिंक टैंक अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय फोरम (IFFRAS) ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया था कि चीन की आर्थिक वृद्धि और विशेष रूप से ‘चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC)’ में अपने निवेश के कारण पाकिस्तान में बढ़ती उपस्थिति ने बीजिंग को मानव अधिकारों के उल्लंघन और शिनजियांग में उइगर अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न सहित देश में ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ करने का एक बड़ा अवसर दे दिया है।

उइगर छात्रों से लेकर मौलवियों को पाकिस्तान सौंप देता है चीन को

इसके अलावा पाकिस्तान कितना मुस्लिमों की परवाह करता है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक मामले में पाकिस्तानी सुरक्षबलों ने 14 उइगर इस्लामी छात्रों को केवल इसलिए चीन को सौंप दिया था, क्योंकि उन्हें शक था कि हो सकता है कि ये चीन में आतंकी घोषित किए गए हों। इन उइगरों को चीन को सौंपने के बाद चीनी सेना ने उनकी हत्या कर दी थी।

इसी तरह की एक घटना पाकिस्तान में पिछले साल 7 मई 2021 को घटी जब उइगर मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखने के कारण पाकिस्तान में अधिकारियों ने एक इस्लामिक मौलवी का ही अपहरण कर लिया। गिरफ्तार किए गए मौलवी के भाई अब्दुल वली ने द डिप्लोमैट को बताया कि उनके भाई पर पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े होने का आरोप लगाया गया था। ये एक आतंकवादी संगठन है। वली कहते हैं कि वो शिनजियांग प्रांत के रहने वाले थे। लेकिन जब 1960 के दशक में चीन ने उइगर मुस्लिमों के इस्लाम का पालन करने पर रोक लगाना शुरू किया था तभी उनके पिता वहाँ से पाकिस्तान आ गए थे।

बता दें कि चीन में उइगर मुस्लिमों को सुधारने के नाम पर उनपर तमाम बर्बरता की जाती हैं। इस बात के खुलासे कई बार अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में हुए हैं। उइगर औरतों के साथ न केवल रेप होता है बल्कि उनके प्राइवेट पार्ट्स में मिर्ची तक लगा दी जाती हैं, उनका गर्भपात करवा दिया जाता है। वहीं मुस्लिम पुरुषों को मारने में चीन गुरेज नहीं करता और उनके मस्जिदों को तोड़ने की खबरें भी आती रहती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वहाँ 10 लाख से ज्यादा उइगरोंकों कन्सेंट्रेशन कैंप में रखा गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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