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चीन के हस्तक्षेप से हिली पीएम ओली की कुर्सी, अब सत्ता बचाने के लिए पार्टी टूटने की कगार पर, पाक भी दे रहा समर्थन

ओली अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए नया पैंतरा चलने वाले हैं। लगातार उठ रही इस्तीफे की माँग के बीच ओली ने अपनी ही पार्टी को तोड़ने और विपक्षी पार्टी का साथ लेकर सरकार में बने रहने का प्लान तैयार किया है और इसमें चीन और पाकिस्तान उन्हें खुला समर्थन दे रहा है।

भारत के खिलाफ नेपाल को मोहरा बना रहे चीन और पाकिस्तान ओली को राजनीतिक संकट में देख बेचैन है और उसे बचाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी में ज्यादातर लोग ओली के खिलाफ हैं। भारत विरोधी टिप्पणी करने को लेकर प्रधानमंत्री पद से ओली के इस्तीफे की माँग के मद्देनजर बुधवार (जुलाई 8, 2020) को स्थाई समिति की मीटिंग रखी गई थी, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

पीएम ओली और कम्युनिस्ट पार्टी के उपाध्यक्ष प्रचंड के बीच मंगलवार (जुलाई 7, 2020) दोपहर मीटिंग हुई थी। दो घंटे की बैठक के अंत में केवल एक ही फैसला हुआ कि बुधवार को स्थाई समिति की बैठक होगी। इसका अर्थ यह लगाया गया कि पीएम ओली 44-सदस्यीय स्थाई समिति का सामना करने के लिए तैयार थे।

हालाँकि, बताया जा रहा है कि पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी के 44 में से 30 लोगों ने ओली से इस्तीफा देने के लिए कहा है। अब ओली अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए नया पैंतरा चलने वाले हैं। लगातार उठ रही इस्तीफे की माँग के बीच ओली ने अपनी ही पार्टी को तोड़ने और विपक्षी पार्टी का साथ लेकर सरकार में बने रहने का प्लान तैयार किया है और इसमें चीन और पाकिस्तान उन्हें खुला समर्थन दे रहा है।

बजट सत्र को स्थगित करने के बाद अब केपी ओली एक अध्यादेश लाकर पार्टी को तोड़ सकते हैं। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक ओली वहाँ मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस के संपर्क में हैं, जिससे उन्हें समर्थन मिल सके। दरअसल, ओली अध्यादेश लाकर पॉलिटिकल पार्टीज ऐक्ट में बदलाव कर सकते हैं। इससे उन्हें पार्टी को बाँटने में आसानी होगी। यह सब चीन और पाकिस्तान के समर्थन से हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि नक्शे पर विवाद के बीच ओली भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। इसके बाद ही पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने ओली से संपर्क साधा था। दूसरी तरफ नेपाल में मौजूद चीनी राजदूत भी इसकी कोशिशों में लगी हैं कि ओली को सत्ता में बनाए रखा जा सके। हाल में ओली द्वारा उठाए गए कुछ कदमों के पीछे चीनी राजदूत का रोल अहम बताया जाता है।

नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी में ज्यादातर लोग इस वक्त ओली के खिलाफ हैं। पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी के 44 में से 30 लोगों ने ओली से इस्तीफा देने को कहा था। अध्यादेश के बाद ओली को अपनी स्थिति मजबूत करने का वक्त मिलेगा और जबतक उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी नहीं लाया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर वह पार्टी को बाँट भी सकेंगे। पार्टी में कुछ खास नाम हैं जिनसे ओली की नहीं बन रही। इसमें पुष्प कमल दहल, बामदेव गौत, झाला नाथ और माधव कुमार नेपाल शामिल हैं।

अगर पार्टी टूटती है तो ओली को अपने समर्थन में 138 सांसद दिखाने होंगे। लेकिन अध्यादेश के बाद उन्हें सिर्फ 30 प्रतिशत सांसद का समर्थन दिखाना होगा। ऐसे में ओली के लिए चीजें आसान होंगी क्योंकि 40 प्रतिशत सांसद उनकी तरफ हैं।

बता दें कि नेपाल में चीनी हस्तक्षेप से देश की भौगोलिक क्षति होने के साथ ही राजनीति स्थिरता भी देखने को मिली और अब तो पार्टी भी टूटने के कगार पर खड़ी नजर आ रही है।

पिछले दिनों खबर आई थी कि चीन एक के बाद एक नेपाल की जमीन हड़पता जा रहा है। पहले तो चीन ने नेपाल के गोरखा जिले के रुई गाँव पर कब्जा किया, जो कि अब चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत के कब्जे में आ चुका है। ये अलग बात है कि नेपाल सरकार इस सच्चाई को बताने से गुरेज कर रही है। इसके बाद खबर आई कि हुम्ला जिले में 10 हेक्टेयर की नेपाली जमीन पर चीन ने कब्जा किया है। रासुवा जिले में नेपाल की 6 हेक्टेयर जमीन चीन ने हड़प ली। इसी तरह नेपाल के अन्य कई हिस्सों में कुल मिलाकर 33 हेक्टेयर जमीन चीन ने हड़प ली है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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