यह भारत के लिए बहुत गर्व का पल था जब इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉक्टर अबी अहमद ने वैश्विक नेता के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इथियोपिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ से सम्मानित किया। इस सम्मान ने पीएम मोदी की दूरदर्शी नेतृत्व और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अहम योगदान को मान्यता दी है।
यह सम्मान भारत के ग्लोबल पावरहाउस के तौर पर उभरने को दिखाता है और ग्लोबल साउथ के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के लिए पीएम मोदी को मिले भरोसे और पहचान को भी उजागर करता है।
इतना ही नहीं पीएम मोदी के भव्य डिनर का आयोजन किया गया, जिसमें वंदे मातरम् गाकर कलाकारों ने मंत्रमुग्ध कर दिया। पीएम मोदी ने इस दौरान दोनों हाथों को हवा में उठाकर तालियाँ बजाई और कलाकारों की हौसला अफजाई की।
पीएम मोदी का ये पहला इथियोपिया दौरा है। इससे भारत और इथियोपिया के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ दोनों के गहरे भरोसे और सहयोग को नया आयाम मिलेगा। पीएम मोदी के दौरे में अक्सर अनौपचारिक बातचीत और व्यक्तिगत कैमेस्ट्री सुर्खियाँ बनती हैं। इस दौरे के दौरान भी ये देखा गया। इथियोपिया के पीएम अहमद का प्रोटोकॉल तोड़कर खुद गाड़ी चलाना और खास तरह का कॉफी पिलाना यह दिखाता है कि भारत अब अफ्रीका के लिए सिर्फ एक व्यापारिक भागीदार नहीं, बल्कि एक सच्चा दोस्त है।
पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान व्यापार, निवेश, एग्रीकल्चर, डिजिटल, स्किल डेवलपमेंट, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, आतंकवाद विरोधी अभियान और साइबर सुरक्षा पर बातचीत होगी। भारत और इथियोपिया ने अगले 5 साल में द्विपक्षीय संबंधों को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इथियोपिया भारत के लिए एफडीआई का अहम स्रोत है क्योंकि यहाँ 615 से ज्यादा भारतीय कंपनियाँ काम कर रही हैं।
पीएम मोदी ने इथियोपिया के संसद को संबोधित किया
प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा, “भारत और इथियोपिया का जलवायु और भावना, दोनों में गर्मजोशी है। लगभग 2000 साल पहले, हमारे पूर्वजों ने समुद्र पार कर गहरे रिश्ते बनाए थे। हिंद महासागर के पार, व्यापारी मसालों और सोने के साथ यात्रा करते थे, लेकिन उन्होंने सिर्फ सामान का ही व्यापार नहीं किया, बल्कि उन्होंने विचारों और जीवन शैली का भी आदान-प्रदान किया।”
#WATCH | Addis Ababa | PM Narendra Modi recieved a standing ovation and applause from the Ethiopian Parliament after concluding his speech pic.twitter.com/RNmCuLsIwL
— ANI (@ANI) December 17, 2025
उन्होंने कहा कि अदीस और धोलेरा जैसे बंदरगाह सिर्फ व्यापार केंद्र नहीं थे, बल्कि सभ्यताओं के बीच पुल थे। आधुनिक समय में हमारे रिश्ते एक नए युग में प्रवेश करते हैं। 1941 में भारतीय सैनिकों ने इथियोपिया की आज़ादी के लिए इथियोपियाई लोगों के साथ मिलकर लड़ाई लड़ी।”
पीएम मोदी ने कहा, “भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और इथियोपिया का राष्ट्रगान, दोनों हमारी ज़मीन को माँ कहते हैं। वे हमें अपनी विरासत, संस्कृति, सुंदरता पर गर्व करने और मातृभूमि की रक्षा करने के लिए प्रेरित करते हैं।”
2025 में पीएम मोदी ने की 5 अफ्रीकी देशों की यात्रा
पिछले 11 सालों में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-अफ्रीका संबंधों को काफी प्रमुखता दी और रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर पहुँचाया। यहाँ तक कि पिछले 1 साल में पीएम मोदी ने 6 अफ्रीकी देशों की यात्रा की। इनमें इथियोपिया के अलावा दक्षिण अफ्रीका (नवंबर 2025), घाना (जुलाई 2025), नामीबिया (जुलाई 2025), मॉरीशस (मार्च 2025) और नाइजीरिया (नवंबर 2024) शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च 2015 में पहली बार मॉरीशस और सेशेल्स की यात्रा की। इसके अगले साल यानी जुलाई 2016 में वे मोजाम्बिक, तंजानिया, केन्या और दक्षिण अफ्रीका की यात्रा पर गए। हालाँकि नवंबर 2025 में उन्होंने दोबारा दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की थी। ठीक दो साल बाद यानी जुलाई 2018 में वे रवांडा, युगांडा की यात्रा की। जुलाई 2025 में नामीबिया, घाना की यात्रा की थी।
उन्होंने अपनी यात्राओं के जरिए अफ्रीका के साथ इस जुड़ाव को और तेज़ किया है। इन यात्राओं ने पूरे अफ्रीका में राजनयिक और विकासात्मक संबंधों को नई जान दी है, जो उनके नेतृत्व में एक रणनीतिक पहुँच को दिखाता है।
Unprecedented push to India-Africa relations under PM Modi
— DD News (@DDNewslive) December 17, 2025
Over the past 11 years, Prime Minister @narendramodi has elevated India-Africa relations to a new level of strategic partnership.
In the last 1 year, PM has accelerated this connect with Africa through his visits.… pic.twitter.com/qc43AsJHDp
2025 की इस पाँचवीँ अफ्रीका यात्रा ने भारत के अफ्रीका प्रथम नीति को स्पष्टता से उभारा है। भारत, अफ्रीकी देशों के साथ मिलकर ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठा रहा है।
अफ्रीकी संघ का मुख्यालय इथियोपिया में है। पीएम मोदी की ये यात्रा अफ्रीकी संघ को जी-20 में शामिल करने के भारत की कोशिशों और ब्रिक्स देशों में अच्छा तालमेल बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ब्रिक्स का 2026 सम्मेलन की मेजबानी भारत करने वाला है।
G20 का अफ्रीकन यूनियन बना सदस्य
सितंबर 2023 में भारत की G20 समिट की मेज़बानी के दौरान सबसे यादगार पलों में से एक था, प्रधानमंत्री मोदी का अफ्रीकी यूनियन को G20 में स्थायी सदस्य के तौर पर शामिल होने का न्योता देना। उस वक्त एयू के चेयरपर्सन अजाली असौमानी थे। भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान, 2023 में अफ्रीकी संघ को G20 का स्थायी सदस्य बनाया गया। इससे अफ्रीकी देशों के साथ भारत के गहरे होते संबंधों की एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जाता है।
अफ्रीकी यूनियन के फिलहाल 55 सदस्य देश हैं। अब यूरोपीय यूनियन की तरह अफ्रीकी यूनियन का महत्व है। इस कदम ने समावेशी वैश्विक शासन को बढ़ावा देने और दुनिया के मंच पर अफ्रीका की आवाज़ को मज़बूत करने के प्रति भारत के समर्पण को दिखाया था।
चीन का बढ़ता असर और लोन लेने के लिए मजबूर देश
अफ्रीकी देशों के साथ भारत के रिश्ते बहुत पुराने हैं, लेकिन दशकों की डिप्लोमैटिक बयानबाजी के बावजूद, ये रिश्ते अक्सर ठंडे ही रहे। पीएम मोदी की तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने भारत-अफ्रीका संबंधों में नई जान फूँकी है, उन्हें प्राथमिकता दी है और कई तरह की पार्टनरशिप को आगे बढ़ाया है। कई लोग इसे इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के प्रति भारत की कूटनीति के तौर पर देखते हैं।
अफ्रीकी महाद्वीपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र यानी AfCFTA भारतीय निवेशकों को अफ्रीका के बड़े बाजार में व्यापक अवसर दे रहा है। दरअसल अफ्रीका भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसके साथ द्विपक्षीय व्यापार करीब 9 हजार करोड़ रुपए का है। यूरोपीय संघ और चीन दो सबसे बड़े व्यापार साझेदार हैं।
अफ्रीका में विकास की गति तेज हुई है। इससे उपभोक्ता बाजार का भी विस्तार हुआ है। निवेशक इसे एक अवसर के रूप में देख रहे हैं । भारत ने शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे द्विपक्षीय सहयोग के माध्यम से अफ्रीकी देशों में मानवीय जीवन में सुधार के लिए काफी सहयोग दिया है।
खास कर कोरोना के वक्त भारत ने कम से कम 25 अफ्रीकी देशों को टीके और आवश्यक चिकित्सा सामग्री उपलब्ध कराई थी, जिसकी अफ्रीकी देशों के साथ साथ पूरी दुनिया ने सराहना की थी।
अफ्रीका में भारत तकनीक विकास में भी मदद कर रहा है इसलिए आईआईटी कैंपस खोले गए हैं। पैन अफ्रीकी ई नेटवर्क चलाए जा रहे हैं। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से अफ्रीका को डिजिटल तौर पर मजबूत बनाने में भारत लगा हुआ है।
अफ्रीका के गरीब देशों के संसाधनों पर चीन की गिद्ध नजर है। इन देशों में निवेश कर और लोन देकर चीन अपने ऋण जाल में उसे फँसा रहा है। ऐसे में भारत को एक तरफ इन देशों की मदद करनी है, दूसरी तरफ चीन के बढ़ते निवेश से प्रतिस्पर्धा भी करनी है। ये बड़ी चुनौती है। कई परियोजनाओं को पूरा करने में देरी हो रही है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
भारत ने नई दिल्ली में 2015 में तीसरे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें अफ्रीकी देशों की भागीदारी चार गुना से अधिक बढ़ गई, जो गहरे और अधिक व्यापक जुड़ाव की दिशा में एक बदलाव का संकेत है। लेकिन इसके बाद भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन की बैठक हर तीन वर्षों में होनी थी, वह 2015 के बाद नहीं हो पा रही है।
आयुर्वेद का अफ्रीका में बड़ी संभावना
केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रायला ओडिंगा ने 2022 में पीएम मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा था कि आयुर्वेद ने उनकी बेटी की आँखों की रोशनी वापस लौटा दी। ओडिंगा ने पीएम मोदी को आयुर्वेद को अफ्रीका में लाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी पौधों का उपयोग चिकित्सीय उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है और इससे अनगिनत लोगों को लाभ होगा।
पिछले एक दशक में भारत ने अफ्रीका के साथ अपनी विकास साझेदारी को काफी मजबूत किया है। करीब 43 अफ्रीकी देशों के 206 बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं में भारत ने 12.37 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इसके अलावा अफ्रीकी युवाओं के लिए 50,000 स्कॉलरशिप भी दी हैं, जिनमें से 42,000 से ज्यादा का इस्तेमाल पहले ही किया जा चुका है।
पिछले 10 वर्षों में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 40,000 अफ्रीकियों ने भारत में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
भारत ने अपनी टेली-शिक्षा और टेलीमेडिसिन परियोजना के दूसरे चरण के तहत 2019 से अब तक 22 अफ्रीकी देशों के 15,000 से अधिक युवाओं को अलग-अलग तकनीकी डिग्री और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए छात्रवृत्ति दी है।
दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गाँधी द्वारा चलाए गए रंगभेदी निषेध आंदोलन की वजह से लोग आज भी भारत को महात्मा गाँधी के सत्य और अहिंसा के पुजारी के तौर पर देखते हैं। यहाँ से भारत-अफ्रीका एकजुटता की आध्यात्मिक सोच शुरू होती है। पीएम मोदी ने उस दृष्टिकोण को व्यावहारिक और प्रभावशाली नीतियों में परिवर्तित कर इसे भारत- अफ्रीका के बीच मजबूत आधारशिला में बदल दिया है।


