Saturday, July 13, 2024
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पाकिस्तान के फिर पीएम बन सकते हैं नवाज शरीफ, बिलावल की PPP ने समर्थन का किया ऐलान, जरदारी को राष्ट्रपति बनाने की रखी शर्त

यदि वर्तमान आँकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो PML-N और PPP के पास मिलकर बहुमत से मात्र 6 साँसदों की कमी है, वह निर्दलीयों के समर्थन से यह सँख्या पूरी कर सकते हैं।

पाकिस्तान में आम चुनाव के बाद अब सरकार बनाने की कोशिशें तेज हैं। चुनावों में तीसरे नम्बर पर सीटें लाने वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) को सहारा दिया है। PPP के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने कहा है कि वह PML-N के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को बाहर से समर्थन देंगे।

बिलावल ने कहा है कि वह पाकिस्तान में स्थिरता चाहते हैं, इसलिए PML-N को सरकार चलाने में सहायता करेंगे। PPP सरकार में शामिल नहीं होगी और ना ही कोई मंत्रिपद लेगी। वह PML-N के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का समर्थन करेंगे जो कि संभवतः नवाज शरीफ स्वयं या उनके परिवार का ही कोई व्यक्ति होगा। बिलावल का कहना है कि PTI ने उनकी पार्टी के साथ गठबंधन करने से मना कर दिया, इसके बाद वे PML-N का समर्थन करने का निर्णय लिया।

हाल ही में सम्पन्न हुए पाकिस्तान के चुनावों में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। 266 सीटों के लिए हुए चुनाव में सबसे अधिक 93 सीटें इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इन्साफ (PTI) के समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों को मिली हैं। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी PML-N को 75, जबकि PPP को 54 सीट मिली हैं। MQM को 17 सीटें और अन्य के खाते में 27 सीटें गई हैं। सरकार बनाने के लिए 133 सीटों की आवश्यकता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान की संसद में 336 सीट हैं, जिनमें से 266 सीटों के लिए चुनाव होता है। बाकी बचीं 70 सीटें इन चुनावों में जीतने वाली पार्टियों को उनकी संख्याबल के हिसाब से बाँट दी जाती हैं। इन 70 सीटों में 60 महिलाओं के लिए और 10 गैर-मुस्लिमों के लिए होती हैं। वर्तमान परिस्थिति में जहाँ PTI के पास पूरी संख्या नहीं है तो वहीं PML-N और PPP भी साथ मिलकर जादुई आँकड़े को नहीं छू पा रहे।

हालाँकि, दोनों के साथ आने के ऐलान के बाद माना जा रहा है कि कुछ छोटी पार्टियाँ भी उन्हें समर्थन दे सकती हैं। इससे पहले PTI ने PPP के साथ मिलकर सरकार बनाने के ऑफर को ठुकरा दिया था। यदि वर्तमान आँकड़ों के हिसाब से देखा जाए तो PML-N और PPP के पास मिलकर बहुमत से मात्र 6 सांसदों की कमी है। वह कमी निर्दलीयों या छोटी पार्टियों के समर्थन से पूरी कर सकते हैं।

सरकार भले PPP में शामिल नहीं होगी, लेकिन बिलावल भुट्टो ने अपने पिता आसिफ अली जरदारी की राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पुख्ता कर दी है। बिलावल भुट्टो ने खुद का नाम प्रधानमंत्री की रेस से हटा लिया है। अब माना जा रहा है कि नवाज शरीफ ही इस बार फिर से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनेंगे।

वह इन चुनावों के कुछ दिनों पहले ही लंदन से वापस पाकिस्तान लौटे हैं। संसद में संख्या बल से ज्यादा पाकिस्तान में सत्ता पाने के लिए सेना का आशीर्वाद जरूरी होता है। वर्तमान में यह आशीर्वाद नवाज शरीफ के साथ है। वहीं, इमरान की पार्टी कैसे भी करके आँकड़े जुटा ले तो भी वह सरकार बनाएगी, यह संदेहास्पद है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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