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श्री लंका में बुर्क़ा समेत हर तरह का नक़ाब पहनने पर लगा प्रतिबंध, राष्ट्रपति ने लिया फैसला

श्री लंका के अलावा कैमरून, मोरक्को, चाड, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, गाबोन, फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क और उत्तर पश्चिम चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध है।

21 अप्रैल को श्री लंका में हुए हमले के बाद वहाँ की सरकार ने हर तरह के नकाब पहनने पर बैन लगा दिया है, जिससे चेहरा ढका जाता है। श्री लंका सरकार का यह आदेश आज (अप्रैल 29, 2019) से लागू होगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्री लंका के राष्ट्रपति ने संविधान द्वारा दिए गए आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए ये फैसला लिया है। श्री लंका के राष्ट्रपति ने लिखा, “ऐसे कपड़े पहनना जो चेहरे को पूरी तरह से ढकते हों, सोमवार से उनपर प्रतिबंध लगा दिया गया है।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले श्रीलंका की संसद में सुरक्षा के लिहाज से बुर्के पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया गया था। इस दौरान सांसद आशु मरसिंघे ने कहा था कि ‘बुर्का’ मुस्लिमों का पारंपरिक परिधान नहीं है। साथ ही वहाँ के एसीजेयू (ऑल सिलॉन जमियाथुल अलामा) के मौलवी संगठनों ने भी एक आदेश जारी करते हुए बुर्का या चेहरा ढकने वाले किसी भी परिधान का इस्तेमाल न करने की बात की थी।

राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखने हुए श्री लंका सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि वहाँ के राष्ट्रपति ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राष्ट्रपति के फैसले के साथ ही श्री लंका उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने आतंकी हमले को रोकने के लिए ऐसे कदम उठाए। श्री लंका के अलावा कैमरून, मोरक्को, चाड, ऑस्ट्रिया, बुल्गारिया, गाबोन, फ्रांस, बेल्जियम, डेनमार्क और उत्तर पश्चिम चीन के मुस्लिम बहुल प्रांत शिनजियांग में बुर्का पहनने पर प्रतिबंध है।

ईस्टर के मौक़े पर हुए हमले के बाद कल रविवार (अप्रैल 28, 2019) को श्री लंका के किसी भी चर्च में कोई भीड़ इकट्ठा नहीं हुई। लोगों ने अपने घरों में रहकर ईसा मसीह से प्रार्थना की क्योंकि पूरे देश में कर्फ्यू लगा हुआ है। पुलिस टीम और सेना का जाँच अभियान के तहत हमले में शामिल सभी आरोपितों की धरपकड़ जारी है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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