Friday, May 31, 2024
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयवॉलीबॉल खेलती थी महजबीं, तालिबान ने सिर काट दिया: रिपोर्ट में दावा- अन्य महिला...

वॉलीबॉल खेलती थी महजबीं, तालिबान ने सिर काट दिया: रिपोर्ट में दावा- अन्य महिला खिलाड़ियों की भी कर रहा तलाश

अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के कोच ने कहा कि अगस्त में तालिबान के पूर्ण नियंत्रण से पहले टीम के केवल दो खिलाड़ी देश से भागने में सफल रहे थे। महजबीन हकीमी उन अन्य महिला खिलाड़ियों में शामिल थी, जो समय रहते देश नहीं छोड़ सकीं।

अफगानिस्तान में तालिबान ने जूनियर महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम की एक सदस्य का गला काटकर हत्या कर दी है। इसके बाद से अन्य खिलाड़ियों में डर का माहौल है। एक कोच ने पर्सियन इंडिपेंडेंट वेबसाइट को इसकी जानकारी दी है।

एक इंटरव्यू में कोच सुराया अफजली (बदला हुआ नाम) ने बताया कि तालिबान ने अक्टूबर में महजबीं हकीमी नाम की एक महिला खिलाड़ी की गला काटकर हत्या कर दी थी, लेकिन किसी को भी इस भीषण हत्या के बारे में पता नहीं चला। उन्होंने बताया कि तालिबानियों ने महिला खिलाड़ी के परिवार को धमकी दी थी कि अगर उन्होंने इसके बारे में किसी को भी बताया तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

पर्शियन इंडिपेंडेंट वेबसाइट के अनुसार, महजबीं अशरफ गनी सरकार के पतन से पहले काबुल नगरपालिका वॉलीबॉल क्लब के लिए खेलती थी। वह क्लब के स्टार खिलाड़ियों में से एक थी। कोच के अनुसार, कुछ दिनों पहले ही उसके कटे हुए सिर और खून से लथपथ गर्दन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई थीं।

अफगान महिला राष्ट्रीय वॉलीबॉल टीम के कोच ने कहा कि अगस्त में तालिबान के पूर्ण नियंत्रण से पहले टीम के केवल दो खिलाड़ी देश से भागने में सफल रहे थे। महजबीं हकीमी उन अन्य महिला खिलाड़ियों में शामिल थी, जो समय रहते देश नहीं छोड़ सकीं।

अफजली ने कहा कि अफगानिस्तान की सत्ता में आते ही तालिबान महिला एथलीटों की पहचान कर उन्हें पकड़ने में जुटा है। उन्होंने कहा कि तालिबानी खासकर अफगान महिला वॉलीबॉल टीम के सदस्यों की तलाश में हैं, जिन्होंने कई बार विदेशी और घरेलू प्रतियोगिताओं में भाग लिया और मीडिया कार्यक्रमों में शिरकत करती रही थीं।

अफजली ने बताया, “वॉलीबॉल टीम के सभी खिलाड़ी और महिला एथलीट बुरी स्थिति में हैं और काफी डरी हुई हैं। हर कोई भागने या फिर छुपकर रहने के लिए मजबूर है।”

बता दें कि अफगान राष्ट्रीय महिला वॉलीबॉल टीम की स्थापना 1978 में हुई थी। यह लंबे समय से देश में युवा लड़कियों के लिए आशा और सशक्तिकरण की जरिया रही है। हालाँकि, महजबीं की मौत के बाद से सभी डरे हुए हैं। टीम के सदस्य अफगानिस्तान छोड़ने के लिए विदेशी संगठनों और देशों का समर्थन हासिल करने के प्रयासों में जुटे हैं, लेकिन अब तक वे असफल रहे हैं।

गौरतलब है कि तालिबान के अफगानिस्तान की सत्ता पर काबिज होने के बाद से वहाँ के स्थानीय निवासी डर के साये में जीने को मजबूर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 220 से अधिक अफगान महिला जज तालिबानियों की सजा के भय से अभी भी खुफिया जगहों पर छिपी हुई हैं। उनका कसूर केवल इतना है कि वह महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ीं। ये उन लोगों की रक्षक रही हैं, जो देश में हाशिए पर थे और न्याय चाहते थे।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

200+ रैली और रोडशो, 80 इंटरव्यू… 74 की उम्र में भी देश भर में अंत तक पिच पर टिके रहे PM नरेंद्र मोदी, आधे...

चुनाव प्रचार अभियान की अगुवाई की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने। पूरे चुनाव में वो देश भर की यात्रा करते रहे, जनसभाओं को संबोधित करते रहे।

जहाँ माता कन्याकुमारी के ‘श्रीपाद’, 3 सागरों का होता है मिलन… वहाँ भारत माता के 2 ‘नरेंद्र’ का राष्ट्रीय चिंतन, विकसित भारत की हुंकार

स्वामी विवेकानंद का संन्यासी जीवन से पूर्व का नाम भी नरेंद्र था और भारत के प्रधानमंत्री भी नरेंद्र हैं। जगह भी वही है, शिला भी वही है और चिंतन का विषय भी।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -