Monday, September 26, 2022
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क्या कहता है सिरम इंस्टिट्यूट द्वारा ब्रिटेन में बड़े निवेश का ऐलान? PM मोदी के साथ वर्चूअल समिट में बोरिस जॉनसन ने की घोषणा

ये घोषणाएँ भारत और ब्रिटेन के बीच मज़बूत होते व्यापार सम्बंधों का सबूत हैं और उस समय हुई हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के बीच एक वर्चूअल समिट होने जा रही है। भारतीय कंपनियों द्वारा ब्रिटेन में निवेश भारत के उद्योग जगत की विकसित देशों में विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता का सबूत भी हैं।

अदार पूनावाला की कम्पनी सिरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ब्रिटेन में करीब 2400 करोड़ रूपए का निवेश करने वाली है। एक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी यह निवेश वैक्सीन सम्बंधित रीसर्च और क्लीनिकल ट्रायल की सुविधाएँ बनाने में करने जा रही है पर भविष्य में वैक्सीन उत्पादन पर भी विचार कर सकती है।

जैसा कि ज्ञात है, पुणे स्थिति सिरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया विश्व की सबसे बड़ी वैक्सीन उत्पादक कंपनी है और ऐस्ट्रा जेनेका के साथ मिलकर कोविशिल्ड नामक वैक्सीन बना रही है जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए होने वाले टीकाकरण में हो रहा है। कम्पनी भारत में ही नहीं बल्कि विश्व भर में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए होने वाले टीकाकरण में प्रमुख भूमिका निभा रही है। भारत में कम्पनी की वर्तमान उत्पादन क्षमता 7 करोड़ डोज प्रति माह की है और इस वर्ष की जुलाई तक यह क्षमता बढ़कर 10 करोड़ डोज प्रति माह हो जाएगी।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के कार्यालय से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि निवेश की इस योजना के तहत कंपनी ब्रिटेन में एक सेल्स ऑफिस, वैक्सीन पर अनुसंधान और क्लीनिकल ट्रायल के लिए सुविधाएँ तैयार करेगी साथ ही ब्रिटेन में सिंगल डोज वाली एक नेजल वैक्सीन के प्रथम चरण का क्लिनिकल ट्रायल भी शुरू करने जा रही है। नेजल वैक्सीन आम नेजल ड्राप की तरह इस्तेमाल किया जा सकेगा। विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि सीरम इंस्टिट्यूट का यह निवेश भारत और ब्रिटेन के बीच एक वृहद व्यापार समझौते का हिस्सा है और इस निवेश से लगभग साढ़े छ हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री जॉनसन के बीच आज मंगलवार 4 मई को होने वाली वर्चुअल वार्ता के पहले यह घोषणा भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार समझौते के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ब्रेक्सिट से निकलने के बाद ब्रिटेन भारत को अपने उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार मानता है। यह बात अलग है कि भारत खुद अब मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी योजनाओं के तहत अपनी जरूरतों के लिए उत्पादन करने के साथ ही दुनियाँ के लिए उत्पादन का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की आकांक्षा रखता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता कितना वृहद हो सकेगा, यह देखने वाली बात होगी।

सिरम इन्स्टिटूट द्वारा निवेश की इस घोषणा को भारत में एक अलग नज़रिए से देखे जाने के अनुमान भी लग रहे हैं पर ब्रिटेन के एक अख़बार को दिए अपने इंटर्व्यू में पूनावाला ने बताया कि वे वहाँ अपने निवेशकों और शेयर धारकों से मिलने गए हैं। अनुमान के पीछे शायद एक कारण यह भी था कि उसी इंटर्व्यू में उन्होंने उन्हें मिलने वाली धमकी की चर्चा करते हुए ब्रिटिश अख़बार को बताया कि उनसे जो कहा गया, उस बात को धमकी कहना उसे कम करके आँकने जैसा होगा। इन अनुमानों पर अब विराम लग जाना चाहिए क्योंकि सिरम इंस्टिट्यूट के साथ और भारतीय कम्पनियों ने भी ब्रिटेन में निवेश की घोषणा की हैं और ये घोषणाएँ भारत-ब्रिटेन के बीच एक बड़े व्यापार समझौते का हिस्सा हैं जिनमें लगभग बीस भारतीय कंपनियाँ ब्रिटेन में आईटी, बायोटेक और फ़ार्मा जैसे क्षेत्रों में निवेश करेंगी।

ये घोषणाएँ भारत और ब्रिटेन के बीच मज़बूत होते व्यापार सम्बंधों का सबूत हैं और उस समय हुई हैं जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के बीच एक वर्चूअल समिट होने जा रही है। भारतीय कंपनियों द्वारा ब्रिटेन में निवेश भारत के उद्योग जगत की विकसित देशों में विश्वसनीयता और तकनीकी क्षमता का सबूत भी हैं।   

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