Homeदेश-समाजJ&K: खानाबदोश गुज्जरों को आतंकियों ने किया अगवा, 1 को गोलियों से छलनी किया

J&K: खानाबदोश गुज्जरों को आतंकियों ने किया अगवा, 1 को गोलियों से छलनी किया

आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में इस तरह की यह पहली घटना है। इससे पहले पत्थरबाजों के हमले में एक स्थानीय ट्रक ड्राइवर की मौत हो गई थी।

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने खानाबदोश गुज्जर समुदाय के जिन दो लोगों को अगवा किया था, उनमें से एक की गोली मार कर हत्या कर दी है। दोनों सोमवार को अगवा किए गए थे। दूसरे व्यक्ति की तलाशा जारी है।

आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में इस तरह की यह पहली घटना है। इससे पहले पत्थरबाजों के हमले में एक स्थानीय ट्रक ड्राइवर की मौत हो गई थी।

ख़बर के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि राजौरी ज़िले के अब्दुल क़ादिर कोहली और श्रीनगर के खोनमोह इलाक़े के मंजूर अहमद का त्राल के जंगलों से शाम को 7:30 बजे अपहरण कर लिया। इसके बाद सुरक्षा बलों ने दोनों की तलाश शुरू कर दी। तलाश करने पर एक शख़्स का शव मिला है, जबकि दूसरे की तलाश अभी भी जारी है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 तो हटाए जाने के बाद प्रदेश में यह इस तरह की पहली घटना है। इससे पहले, 20 अगस्त को उत्तरी-कश्मीर के बारामूला ज़िले में हुई मुछभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का एक आतंकवादी ढेर हो गया था और एक विशेष अधिकारी की भी मृत्यु हो गई गई थी। इसके अलावा एक पुलिस उप-निरीक्षक भी घायल हो गए थे।  

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -