Saturday, September 26, 2020
Home रिपोर्ट राजदीप सरदेसाई ने स्वीकारा 2002 के दंगों के लिए मोदी ज़िम्मेदार नहीं, मीडिया ने...

राजदीप सरदेसाई ने स्वीकारा 2002 के दंगों के लिए मोदी ज़िम्मेदार नहीं, मीडिया ने झूठ फैलाया

क्या 2002 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी इस घटना के लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार थे? राजदीप सरदेसाई ने स्वीकार किया कि वह व्यक्तिगत रूप से मानते थे कि गोधरा नरसंहार के बाद हुए 2002 के दंगों के लिए मोदी जिम्मेदार नहीं थे।

राजदीप सरदेसाई के लगभग पूरे करियर ने ही बीजेपी विरोध और उसमें भी मोदी विरोध की बदौलत आकार लिया है। यह ऐसे पत्रकार हैं जो बिना किसी सबूत के ही अपने मीडिया ट्रायल में खासतौर से भाजपा और उसके नेताओं को तुरंत दोषी ठहराते थे। और अगर कोर्ट ने किसी को बरी कर दिया तो भी ये अपने ही बयानों को ट्विस्ट देकर खुद को जस्टिफाई करने की लगातार कोशिश करते थे और इनके इस काम में इनका पूरा गिरोह बखूबी साथ देता था। खैर ऐसे कई मुद्दे हैं जहाँ राजदीप पहले भी बेनक़ाब हो चुके हैं, आखिरी समय तक इन्होंने कॉन्ग्रेस के लिए फील्डिंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अब उनके रुख में पिछले कुछ दिनों से बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यह उनके लिए कुछ अच्छा बेशक हो सकता है पर गिरोह के लिए ये किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।

हाल ही में, लेखक-पत्रकार मनु जोसेफ के साथ एक साक्षात्कार में, राजदीप सरदेसाई ने पुराने पाप धोकर गंगा नहाने की ठानी।

एक सवाल का जवाब देते हुए कि क्या 2002 में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी इस घटना के लिए किसी भी तरह से जिम्मेदार थे, राजदीप सरदेसाई ने स्वीकार किया कि वह व्यक्तिगत रूप से मानते थे कि गोधरा नरसंहार के बाद हुए 2002 के दंगों के लिए मोदी जिम्मेदार नहीं थे।

उन्होंने कहा, ”हमारे लिए यह कहना अनुचित है कि मोदी या कोई भी दंगे के लिए जिम्मेदार था। उन्होंने हिंसा को उकसाया नहीं।” फिर भी, राजदीप सरदेसाई ने दावा किया कि मुख्यमंत्री मोदी कुछ हद तक शांत थे क्योंकि उन्होंने दंगों को रोकने की कोशिश नहीं की थी। उन्होंने कहा कि राज्य पर मोदी का उतना नियंत्रण नहीं था जितना वीएचपी नेता प्रवीण तोगड़िया का वास्तविक नियंत्रण था क्योंकि मोदी 2002 में सत्ता में आए ही थे।

- विज्ञापन -

राजदीप सरदेसाई के अनुसार, मोदी उतने शक्तिशाली नहीं थे, जितना लोगों ने सोचा था और उन्होंने 2002 दंगों के दौरान प्रवीण तोगड़िया को अधिक स्पेस देने का समर्थन किया। हालाँकि, राजदीप का यह मानना है कि हिंसा में हमेशा कुछ राजनीतिक निवेश होता है, जो इस बात का संकेत है कि नरेंद्र मोदी 2002 की घटना से राजनीतिक रूप से लाभान्वित हुए थे।

मीडिया में दंगों की रिपोर्टिंग पर खेद व्यक्त करते हुए, राजदीप सरदेसाई ने स्वीकार किया कि गुजरात दंगों को मीडिया द्वारा सनसनीखेज बनाया गया था। राजदीप ने कहा कि दंगों जैसी संवेदनशील घटनाओं को रिपोर्ट करते समय सेल्फ सेंसरशिप की जरूरत है। राजदीप आखिरकार इस तथ्य पर सहमत हो गए कि मीडिया वास्तव में दंगों की तीव्रता को बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार था।

जबकि राजदीप का यह रहस्योद्घाटन अब हुआ है, हाल तक राजदीप यह कहते रहे हैं कि मोदी और भाजपा के हाथ खून से सने हैं और राजदीप ने 1984 के सिख नरसंहार की तुलना 2002 के दंगों से भी की थी जहाँ कॉन्ग्रेस के नेता सीधे तौर पर शामिल थे और राजीव गाँधी ने खुद हिंसा भड़काई थी यह भाषण देकर कि ‘जब एक बड़ा पेड़ गिरता है, तब धरती हिलती है।’ जबकि 2002 के दंगों की बात करें तो सरदेसाई ने अब स्वीकार किया कि मोदी की कोई भूमिका नहीं थी और अदालतों ने भी उन्हें क्लीन चिट दे दी है।

राजदीप 2018 में भी मोदी से 2002 के लिए माफ़ी माँगने को कह रहे थे लेकिन अब वह कह रहे हैं कि मोदी इसमें शामिल नहीं थे।

एक बात तो यह है कि राजदीप अब इस बात से सहमत हैं कि मोदी की दंगों में भूमिका नहीं थी और मीडिया ने दंगों को सनसनीखेज बना दिया था, क्या वह जानबूझकर इस ‘सनसनीखेजवाद’ को 2002 से लेकर हाल तक तक आगे बढ़ा रहे थे?

जैसा कि 2019 के लोकसभा चुनावों के पूर्व रुझानों से पता चलता है कि एनडीए सरकार सत्ता में वापस आ रही है, कॉन्ग्रेस समर्थित मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र नरेंद्र मोदी के साथ तालमेल बिठाने का मौका खोजने की कोशिश में अपने पुराने आकाओं और गिरोहों को छोड़ने का यह एक संकेत है। या इस बात का डर कि अब और कॉन्ग्रेसी या देश विरोधी एजेंडा चलाना संभव नहीं।

राजदीप सरदेसाई जैसे वामपंथी मीडिया और उनके गिरोह के अन्य पत्रकारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुले तौर पर और हमेशा के लिए पक्षपात किया क्योंकि वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे। पीएम मोदी के खिलाफ एक अथक अभियान चलाने वाले इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र ने आखिरकार महसूस किया कि उनका दुष्प्रचार सोशल मीडिया के युग में और अधिक काम नहीं करता दिख रहा है। इसलिए, लुटियंस इकोसिस्टम के कुछ वर्ग द्वारा पीएम मोदी और भाजपा के खिलाफ उनके निरंतर नाकामयाब घेरेबंदी के बाद, अब हताश होकर सच बोलने की कोशिश की गई है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यही लोग संस्थानों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का मौका नहीं छोड़ते’: उमर खालिद के समर्थकों को पूर्व जजों ने लताड़ा

दिल्ली दंगों में उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और सरकारी की मंशा पर सवाल उठाने वाले लॉबी को पूर्व जजों ने लताड़ लगाई है।

‘मारो, काटो’: हिंदू परिवार पर हमला, 3 घंटे इस्लामी भीड़ ने चौथी के बच्चे के पोस्ट पर काटा बवाल

कानपुर के मकनपुर गाँव में मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू घर को निशाना बनाया। बुजुर्गों और महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

चीन ने शिनजियांग में 3 साल में 16000 मस्जिद ध्वस्त किए, 8500 का तो मलबा भी नहीं बचा

कई मस्जिदों को सार्वजनिक शौचालयों में बदल दिया गया। मौजूदा मस्जिदों में से 75% में ताला जड़ा है या आज उनमें कोई आता-जाता नहीं है।

‘मुझे सोफे पर धकेला, पैंट खोली और… ‘: पुलिस को बताई अनुराग कश्यप की सारी करतूत

अनुराग कश्यप ने कब, क्या और कैसे किया, यह सब कुछ पायल घोष ने पुलिस को दी शिकायत में विस्तार से बताया है।

ड्रग्स चैट वाले ग्रुप की एडमिन थी दीपिका पादुकोण, दो नंबरों का करती थी इस्तेमाल

ड्रग्स मामले में दीपिका पादुकोण से एनसीबी शनिवार को पूछताछ करने वाली है। उससे पहले यह बात सामने आई है कि ड्रग चैट वाले ग्रुप की वह ए​डमिन थीं।

छद्म नारीवाद और हिंदू घृणा का जोड़: भारतीय संस्कृति पर हमला बोल कर कहा जाएगा- ‘ब्रेक द स्टिरियोटाइप्स’

यह स्टिरियोटाइप हर पोशाक की कतरनों के साथ क्यों नहीं ब्रेक किए जाते? हिंदुओं के पहनावे पर ही ऐसा प्रहार क्यों? क्यों नन की ड्रेस में मॉडल आदर्श होती है? क्यों बुर्के को स्टिरियोटाइप का हिस्सा नहीं माना जाता? क्यों केवल रूढ़िवाद की परिभाषा साड़ी और घूँघट तक सीमित हो जाती है?

प्रचलित ख़बरें

‘मुझे सोफे पर धकेला, पैंट खोली और… ‘: पुलिस को बताई अनुराग कश्यप की सारी करतूत

अनुराग कश्यप ने कब, क्या और कैसे किया, यह सब कुछ पायल घोष ने पुलिस को दी शिकायत में विस्तार से बताया है।

‘क्या आपके स्तन असली हैं? क्या मैं छू सकता हूँ?’: शर्लिन चोपड़ा ने KWAN टैलेंट एजेंसी के सह-संस्थापक पर लगाया यौन दुर्व्यवहार का आरोप

"मैं चौंक गई। कोई इतना घिनौना सवाल कैसे पूछ सकता है। चाहे असली हो या नकली, आपकी समस्या क्या है? क्या आप एक दर्जी हैं? जो आप स्पर्श करके महसूस करना चाहते हैं। नॉनसेंस।"

‘काफिरों का खून बहाना होगा, 2-4 पुलिस वालों को भी मारना होगा’ – दिल्ली दंगों के लिए होती थी मीटिंग, वहीं से खुलासा

"हम दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दबाव डालें कि वह पूरी हिंसा का आरोप दिल्ली पुलिस पर लगा दें। हमें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना होगा।”

…भारत के ताबूत में आखिरी कील, कश्मीरी नहीं बने रहना चाहते भारतीय: फारूक अब्दुल्ला ने कहा, जो सांसद है

"इस समय कश्मीरी लोग अपने आप को न तो भारतीय समझते हैं, ना ही वे भारतीय बने रहना चाहते हैं।" - भारत के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने...

‘ये लोग मुझे फँसा सकते हैं, मुझे डर लग रहा है, मुझे मार देंगे’: मौत से 5 दिन पहले सुशांत का परिवार को SOS

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मौत से 5 दिन पहले सुशांत ने अपनी बहन को एसओएस भेजकर जान का खतरा बताया था।

‘गिरती TRP से बौखलाए ABP पत्रकार’: रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी को मारा थप्पड़

महाराष्ट्र के मुंबई से रिपोर्टिंग करते हुए रिपब्लिक टीवी के पत्रकार और चुनाव विश्लेषक प्रदीप भंडारी को एबीपी के पत्रकार मनोज वर्मा ने थप्पड़ जड़ दिया।

‘यही लोग संस्थानों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने का मौका नहीं छोड़ते’: उमर खालिद के समर्थकों को पूर्व जजों ने लताड़ा

दिल्ली दंगों में उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और सरकारी की मंशा पर सवाल उठाने वाले लॉबी को पूर्व जजों ने लताड़ लगाई है।

नूर हसन ने कत्ल के बाद बीवी, साली और सास के शव से किया रेप, चेहरा जला अलग-अलग जगह फेंका

पानीपत के ट्रिपल मर्डर का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने नूर हसन को गिरफ्तार कर लिया है। उसने बीवी, साली और सास की हत्या का जुर्म कबूल कर लिया है।

‘मारो, काटो’: हिंदू परिवार पर हमला, 3 घंटे इस्लामी भीड़ ने चौथी के बच्चे के पोस्ट पर काटा बवाल

कानपुर के मकनपुर गाँव में मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू घर को निशाना बनाया। बुजुर्गों और महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

चीन ने शिनजियांग में 3 साल में 16000 मस्जिद ध्वस्त किए, 8500 का तो मलबा भी नहीं बचा

कई मस्जिदों को सार्वजनिक शौचालयों में बदल दिया गया। मौजूदा मस्जिदों में से 75% में ताला जड़ा है या आज उनमें कोई आता-जाता नहीं है।

‘मुझे सोफे पर धकेला, पैंट खोली और… ‘: पुलिस को बताई अनुराग कश्यप की सारी करतूत

अनुराग कश्यप ने कब, क्या और कैसे किया, यह सब कुछ पायल घोष ने पुलिस को दी शिकायत में विस्तार से बताया है।

‘नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ जरा?’: सितारों का बचाव कर संजय राउत ने ‘शराबी’ वाले अमिताभ की याद दिलाई

ड्रग्स मामले में दीपिका पादुकोण से पूछताछ से पहले संजय राउत ने बॉलीवुड सितारों का बचाव करते हुए NCB पर साधा निशाना है।

कानुपर में रिवर फ्रंट: ऐलान कर बोले योगी- PM मोदी ने की थी यहाँ गंगा स्वच्छता की प्रशंसा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर में गंगा तट पर खूबसूरत रिवर फ्रंट बनाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसे पीएम मोदी को उपहार बताया।

अतीक अहमद से अवैध प्रॉपर्टी को जमींदोज करने पर हुआ खर्च भी वसूलेगी योगी सरकार

बाहुबली अतीक अहमद की अवैध प्रॉपर्टी पर कार्रवाई के बाद अब उससे इस पर आया खर्च भी वसूलने की योगी सरकार तैयारी कर रही है।

पैगंबर पर कार्टून छापने वाली ‘शार्ली एब्दो’ के पुराने कार्यालय के पास चाकू से हमला: 4 घायल, 2 गंभीर

फ्रांस की व्यंग्य मैग्जीन 'शार्ली एब्दो' के पुराने ऑफिस के बाहर एक बार फिर हमले की खबर सामने आई है। हमले में 4 लोग घायल हो गए।

मोइनुद्दीन चिश्ती पर अमीश देवगन की माफी राजस्थान सरकार को नहीं कबूल, कहा- धार्मिक भावनाएँ आहत हुई है

जिस टिप्पणी के लिए पत्रकार अमीश देवगन माफी माँग चुके हैं, उस मामले में कार्रवाई को लेकर राजस्थान सरकार ने असाधारण तत्परता दिखाई है।

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
78,020FollowersFollow
324,000SubscribersSubscribe
Advertisements