Sunday, June 26, 2022
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अर्णब के समर्थन में देश भर से सामने आए विभिन्न वर्गों के लोग: सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेकर जल्द रिहाई की माँग

दिग्गजों और नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी राष्ट्रपति से संपर्क कर इस घटना पर एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा, "यह अब हमारे लिए एक चुनौती है, क्या सत्य की जीत होगी, या अत्याचारी झूठ को शासन करने की अनुमति दी जाएगी।"

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी से नाराज देश भर के तमाम लोग उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया और प्रदर्शनों के माध्यम से लोग उनकी जल्द रिहाई की माँग कर रहे है। गोस्वामी को रविवार (नवंबर 8, 2020) सुबह अलीबाग क्वारंटाइन सेंटर से तलोजा जेल ले जाया गया। इस दौरान उन्होंने खुलासा किया कि उनकी जान को खतरा है और पुलिस द्वारा उनको प्रताड़ित किया जा रहा है।

रिपब्लिक टीवी के कंसल्टिंग एडिटर प्रदीप भंडारी ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अर्णब गोस्वामी को सुरक्षा प्रदान करने को लेकर स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।

दिग्गजों और नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी राष्ट्रपति से संपर्क कर इस घटना पर एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा, “यह अब हमारे लिए एक चुनौती है, क्या सत्य की जीत होगी, या अत्याचारी झूठ को शासन करने की अनुमति दी जाएगी।”

एक तरफ जहाँ बीजेपी अर्णब की गिरफ्तारी का विरोध कर रही, वहीं अब रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) में शामिल हुईं बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष ने भी अर्णब का समर्थन किया है। RPI की महिला शाखा की उपाध्यक्ष पायल घोष ने ट्वीट करते हुए कहा, “न्याय की लड़ाई में हम अर्णब गोस्वामी के साथ खड़े हैं। RPI अर्णब गोस्वामी के साथ है।”

फिल्मकार अशोक पंडित ने जम्मू कश्मीर के साहित्यिक सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के लोगों की तरफ से अर्णब की गिरफ्तारी की निंदा की है। उन्होंने कहा, “प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और यह प्रेस / मीडिया का कर्तव्य है कि वह चीजों की आलोचना करे। जनता की आँख और कान बने। एक भारतीय पत्रकार के प्रति इस तरह का व्यवहार किया गया। देश भर में जिसका व्यापक रूप से विरोध किया जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “रिपब्लिक टीवी चैनल के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को मुंबई में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की कोई वजह नहीं है। उन्हें सार्वजनिक रूप से धक्का दिया गया है। जो सबके आँखों के सामने हुआ है।”

अर्णब गोस्वामी के समर्थन में सेवानिवृत्त मेजर जनरल जीडी बख्शी भी दृढ़ता से सामने आए हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं, और आज एक कर्नल के बच्चे को दोषी ठहराया जा रहा है।”

राज्य सभा के सदस्य सोनल मानसिंह ने कहा, “अर्नब गोस्वामी के साथ जो हो रहा है उसे देखकर बेहद दुखी हूँ। मैं प्रार्थना करता हूँ कि सच्चाई प्रबल हो। इस तरह के ट्रीटमेंट से किसी को फायदा नहीं मिलेगा “

वहीं जयपुर में सत्र न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सीपी सिंह ने कहा, “जो हुआ, उससे पता चलता है कि अपराधियों के माध्यम से उन्हें परेशान करने के लिए उन पर दबाव डाला जा रहा है; यह राजनीतिक आतंकवाद है।”

अर्णब ने बताया अपनी जान को खतरा

गौरतलब है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और मुख्य संपादक अर्णब गोस्वमी ने अपनी जान को खतरा बताया है। पुलिस वैन के भीतर से ही मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें उनके वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह के 6 बजे जगा दिया गया और रविवार की सुबह उन्हें धक्का भी दिया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी खतरे में है। मैं भारत की जनता को, पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूँ कि मेरी जान खतरे में है।”

अर्णब की गिरफ्तारी

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को चार नवंबर की सुबह उनके घर से पुलिस ने बिना किसी सूचना के गिरफ्तार कर लिया था। अर्णब को दो साल पुराने केस में गिरफ्तार किया गया है जो पहले ही बंद हो चुका है। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को अलीबाग कोर्ट में पेश किया था, जहाँ पर पुलिस कस्टडी की माँग की गई थी, हालाँकि कोर्ट ने पुलिस कस्टडी से इनकार करते हुए अर्णब गोस्वामी को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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